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गगन यान के लिए भारत फ्रांस के बाद अब रूस से करेगा समझौता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 23 Sep 2018 06:44 PM IST
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भारत की तरफ से अपने मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन को पूरी तरह सफल बनाने के लिए फ्रांस के बाद अब रूस से भी मदद लेने की तैयारी की जा रही है। फिलहाल दोनों देशों के बीच ग्लोनास (रूसी जीपीएस) और नाविक (भारतीय जीपीएस) के लिए एक-दूसरे के यहां ग्राउंड स्टेशन बनाने पर वार्ता की जा रही है।
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इस वार्ता के लिए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज अगले महीने मास्को जा रही हैं, जहां गगनयान के लिए सहयोग पर भी चर्चा होगी। मिशन-2022 के लिए रूस को भारतीय अंतरिक्षयात्रियों की ट्रेनिंग की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इस बारे में इसरो और रूसी अंतरिक्ष एजेंसी वर्ष 2015 में एक एमओयू पर भी हस्ताक्षर कर चुके हैं।
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नया नहीं है भारत-रूस का साथ
भारत का अंतरिक्ष के सफर में रूस का साथ करीब 4 दशक पुराना है। वर्ष 1975 में भारत की पहली अंतरिक्ष सेटेलाइट ‘आर्यभट्ट’ को रूस (तत्कालीन सोवियत संघ) ने ही अपने विमान सोयुज की मदद से अंतरिक्ष में स्थापित कराया था। इसके बाद भारत के इकलौते अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा को भी वर्ष 1984 में रूस ने ही अंतरिक्ष में अपने यान से भेजा था।
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इसरो बना रहा है तीसरा लांचपैड
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अपने गगनयान मिशन के लिए आंध्र प्रदेश स्थित अपनी अंतरिक्ष विमान लांच साइट श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस रिसर्च सेंटर में तीसरा लांच पैड बना रहा है। इसरो इस मिशन में जीएसएलवी एमके-3 लांच व्हीकल का इस्तेमाल करेगा, जिस पर अंतरिक्ष में जाते समय गगनयान का भारी बोझ होगा। वजन ज्यादा होने के चलते इसरो को नया लांच पैड बनाने की जरूरत पड़ी है।