अदालती हार के बाद भी सियासी गणित भाजपा के पक्ष में!
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उत्तराखंड की तरह अरुणाचल प्रदेश में भले ही भाजपा अदालती लड़ाई हार गई है, मगर सियासी लड़ाई में पार्टी अब भी कांग्रेस पर भारी है। सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद कांग्रेस भले ही वहां सरकार बना ले, मगर उसके लिए सरकार बचाना बेहद मुश्किल है।
चूंकि कांग्रेस के 20 बागी विधायक के अलावा पीपीए के 5 और 2 निर्दलीय विधायक अब भी भाजपा के साथ है। इसलिए भाजपा अदालती लड़ाई हारने के बावजूद सियासी लड़ाई में कांग्रेस को चारो खाने चित करने को ले कर निश्चिंत है। पार्टी की योजना कांग्रेस की सरकार बनते ही उसके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का है। गौरतलब है कि शीर्ष अदालत का फैसला कांग्रेस के पक्ष में आते ही पार्टी नेतृत्व ने राज्य इकाई को समर्थक विधायकों को अपने पक्ष में एकजुट रखने के लिए सतर्क कर दिया है।
हालांकि भाजपा नेतृत्व को उत्तराखंड की तर्ज पर अरुणाचल प्रदेश में भी विधानसभा अध्यक्ष द्वारा बागी विधायकों को अयोग्य करार देने का डर सता रहा है। भाजपा के एक वरिष्ठ रणनीतिकार के मुताबिक शीर्ष अदालत के फैसले के बाद भी अरुणाचल की राजनीति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आएगा।
कांग्रेस के पास 22 विधायक जबकि भाजपा के खेमे में 38 विधायक
उक्त रणनीतिकार के मुताबिक उत्तराखंड और अरुणाचल की सियासी स्थिति में बड़ा फर्क है। उत्तराखंड में अदालती और सियासी दोनों ही मोर्चे पर हार का बड़ा कारण पार्टी के पास जरूरी संख्या बल का नहीं होना था। मगर अरुणाचल में फिलहाल कांग्रेस के पास 22 विधायक ही हैं। जबकि भाजपा के खेमे में 38 विधायक हैं।
ऐसे में कांग्रेस एक बार वहां फिर से सरकार तो बना लेगी, मगर उसे किसी कीमत में बहुमत नहीं मिलेगा। सरकार बनते ही पार्टी उसके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाएगी। इसके बाद वहां फिर से वर्तमान स्थिति बहाल हो जाएगी। इस बीच पार्टी नेतृत्व वहां की स्थिति को ले कर बेहद सतर्क है। उसे कांग्रेस की ओर से अपने बागी विधायकों से संपर्क साधने की आशंका है। यही कारण है कि नेतृत्व ने इसके लिए राज्य नेतृत्व को पहले ही आगाह कर दिया है।
हालांकि नेतृत्व को यह भी डर सता रहा है कि नई परिस्थिति में विधानसभा अध्यक्ष कहीं उत्तराखंड की तरह बागी विधायकों को अयोग्य न घोषित कर दे। अगर 20 विधायक अयोग्य घोषित हुए तो विधानसभा में बहुमत का फैसला 60 की जगह 40 सीटों पर होगा। ऐसे में 22 विधायक वाली कांग्रेस अपनी सरकार बचा ले जाएगी।