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चिंताजनक: एंटीबायोटिक प्रतिरोध से 25 वर्षों में हो सकती हैं चार करोड़ मौतें, एशिया और अफ्रीका में ज्यादा खतरा

Wed, 18 Sep 2024 04:46 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Wed, 18 Sep 2024 04:46 AM IST
सार

एंटीबायोटिक प्रतिरोध तब होता है जब कोई बैक्टीरिया एंटीबायोटिक दवा के प्रभाव से बचने के लिए विकसित हो जाता है। ऐसा होने पर एंटीबायोटिक दवाएं बैक्टीरिया के आगे बेअसर हो जाती हैं। 
 

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After data analyzing researchers estimated antibiotic resistance could cause 40 million deaths in 25 years
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एंटीबायोटिक प्रतिरोध के चलते अगले 25 साल में दुनियाभर में करीब चार करोड़ लोगों की मौत हो सकती है। द लांसेट मेडिकल जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं ने साल 1990 से 2021 के बीच करीब 31 साल के आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद यह अनुमान लगाया है।

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एंटीबायोटिक प्रतिरोध तब होता है जब कोई बैक्टीरिया एंटीबायोटिक दवा के प्रभाव से बचने के लिए विकसित हो जाता है। ऐसा होने पर एंटीबायोटिक दवाएं बैक्टीरिया के आगे बेअसर हो जाती हैं। शोधकर्ताओं का यह अनुमान 204 देशों के सभी आयु वर्ग के करीब 52 करोड़ से ज्यादा लोगों के चिकित्सा दस्तावेज के आधार पर निकाला है। यूके में ग्लोबल रिसर्च ऑन एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (जीआरएएम) प्रोजेक्ट के तहत इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने कहा कि एंटीबायोटिक दवाओं के प्रतिरोध से साल 2050 तक करीब 3.90 करोड़ लोगों की मौत हो सकती है। वहीं, यह प्रतिरोध अप्रत्यक्ष रूप से अतिरिक्त 1.69 करोड़ मौतों का कारण बन सकता है। अगर समय रहते सुधारात्मक उपाय नहीं किए गए तो 2050 तक वार्षिक मृत्यु दर क्रमशः 82 लाख का आंकड़ा पार कर सकती है। 
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एशिया व अफ्रीका में ज्यादा खतरा
शोधकर्ताओं के मुताबिक, साल 2022 में एंटीबायोटिक प्रतिरोध के कारण प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से होने वाली मौत में क्रमशः 68 फीसदी और 75 फीसदी की वृद्धि हुई है। भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश सहित दक्षिण एशिया में साल 2050 तक इसके कारण करीब 1.18 करोड़ लोग की मौत हो सकती है। एंटीबायोटिक प्रतिरोध के कारण होने वाली मौतें दक्षिणी और पूर्वी एशिया और उप-सहारा अफ्रीका के अन्य हिस्सों में भी अधिक होंगी।

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  • इसके अलावा, 1990 और 2021 के बीच के रुझानों से पता चलता है कि 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों में एंटीबायोटिक प्रतिरोध के कारण होने वाली मौत में 80 फीसदी से अधिक की वृद्धि हुई है और भविष्य में यह बुजुर्गों को अधिक प्रभावित करती रहेगी।

 

ऐसे बचा सकते हैं जिंदगियां
शोधकर्ताओं के मुताबिक, अगर समय रहते रोकथाम पर ध्यान दिया जाए तो काफी संख्या में लोगों की जिंदगियों को बचाया जा सकता है। गंभीर संक्रमणों के लिए बेहतर देखभाल, संक्रमणों को रोकने के लिए नए टीके और एंटीबायोटिक के उपयोग को उचित मामलों तक सीमित रखने वाले अधिक विवेकपूर्ण चिकित्सा प्रोटोकॉल तक पहुंच से 2025 और 2050 के बीच कुल 9.20 करोड़ लोगों के जीवन को बचाया जा सकता है।



उपायों पर होगी चर्चा
एंटीबायोटिक प्रतिरोध का यह अध्ययन संयुक्त राष्ट्र महासभा की उच्च स्तरीय बैठक से पहले जारी हुआ है। यह बैठक आगामी 26 सितंबर को होने वाली है, जिसमें दुनियाभर के सदस्य देश एंटीबायोटिक प्रतिरोध के बोझ से बाहर आने के उपायों पर चर्चा करेंगे।

  • ब्रिटेन में एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध पर संयुक्त राष्ट्र अंतर-एजेंसी समन्वय समूह की सदस्य प्रो. डेम सैली डेविस ने कहा कि पूरी दुनिया एक एंटीबायोटिक आपातकाल का सामना कर रही है, जिसकी वजह से दुनियाभर के परिवारों और समुदायों को विनाशकारी मानवीय नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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