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ईवीएम को लेकर पार्टियों का बदला रुख, 50 प्रतिशत ईवीएम में चाहती हैं वीवीपैट
Sun, 10 Feb 2019 08:52 AM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Sneha Baluni
Updated Sun, 10 Feb 2019 08:52 AM IST
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ईवीएम
- फोटो : ANI
1 फरवरी को 21 राजनीतिक पार्टियां चुनाव आयोग के पास गई थीं। उनका कहना था कि पेपर के जरिए वोटों का मिलान किया जाना चाहिए। अब उन्होंने आयोग के सामने दूसरा ही विचार रखा है जो उनके पहले वाले बयान से बिलकुल उलट है। पिछले साल 27 अगस्त को चुनाव आयोग ने सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। जिसमें कांग्रेस ने 20 प्रतिशत, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने 33 प्रतिशत, सीपीएम ने 10 प्रतिशत और आम आदमी पार्टी ने 20 प्रतिशत ईवीएम का मिलान वीवीपैट पर्चियों से करवाने का प्रस्ताव रखा था।
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वहीं बहुजन समाज पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस ने बैलेट पेपर सिस्टम में वापस जाने की मांग की थी। 27 अगस्त को हुई बैठक में विभिन्न राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियों के दस्तावेजों के अनुसार अब उनका रुख बदल गया है। पांच महीने बाद डीएमके, जनता कदल सेक्युलर, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय लोक दल और टीडीपी ने चुनाव आयोग में एक संयुक्त याचिका दायर की है। उनका कहना है कि ईवीएम वीवीपैट के 50 प्रतिशत वोटों की गिनती पर्चियों से होनी चाहिए।
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पार्टियों का कहना है कि जहां किसी उम्मीदवार की जीत का अंतर 5 प्रतिशत कम होगा वहां 100 प्रतिशत पर्चियों से वोटों का मिलान होना चाहिए। उनका कहना है कि वह ईवीएम को रद्द नहीं करना चाहते लेकिन पर्चियों से उनका मिलान करने का सुझाव दिया है। वर्तमान में वीवीपैट पर्चियों का मिलान किसी एक विधानसभा सीट का ही किया जाता है।
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कांग्रेस ने 20 विपक्षी पार्टियों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ ईवीएम को लेकर जारी चिंता को लेकर चुनाव आयोग से मुलाकात की थी। पार्टी ने 27 अगस्त को ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे। जिसमें ईवीएम की खराबी और कथित तौर पर किसी एक पार्टी के पक्ष में वोट जाने का मुद्दा उठाया था। आयोग ने अभी यह साफ नहीं किया है कि वह कितने प्रतिशत वीवीपैट पर्चियों का मिलान करेगा।