{"_id":"5a709ebc4f1c1b93268b7565","slug":"after-16-years-2002-godhra-train-burning-accused-arrested-by-gujarat-police","type":"story","status":"publish","title_hn":"16 साल बाद गुजरात पुलिस के हत्थे चढ़ा गोधरा ट्रेन कांड का अभियुक्त","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
16 साल बाद गुजरात पुलिस के हत्थे चढ़ा गोधरा ट्रेन कांड का अभियुक्त
एजेंसी, अहमदाबाद
Updated Tue, 30 Jan 2018 10:05 PM IST
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : AP
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वर्ष 2002 के गोधरा ट्रेन कांड के एक अभियुक्त को गुजरात पुलिस ने 16 साल बाद गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की है। 63 वर्षीय याकूब पटालिया को इस मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंप दिया जाएगा।
पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार याकूब के गोधरा में होने की पुख्ता सूचना मिलने के बाद कार्रवाई की गई जिसमें उसे गिरफ्तार कर लिया गया। उसे मंगलवार की सुबह इलाके में घूमते हुए देखा गया था। याकूब उस भीड़ में शामिल था जिसने 27 फरवरी, 2002 को गोधरा स्टेशन के पास साबरमती एक्सप्रेस के डब्बों को आग के हवाले कर दिया था। इस दर्दनाक घटना में 59 कारसेवक मारे गए थे। इसके बाद राज्यभर में दंगे हुए थे।
याकूब के खिलाफ सितंबर, 2002 में एफआईआर दर्ज की गई थी। गिरफ्तारी के बाद उस पर धारा 307 (हत्या की कोशिश) सहित आईपीसी की विभिन्न धाराओं में मुकदमा चलाया जाएगा। एफआईआर दर्ज होने के बाद से ही वह गिरफ्तारी से बच रहा था। इस मामले में याकूब के भाई कादिर पटालिया को 2015 में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन मामले की सुनवाई के दौरान जेल में उसकी मौत हो गई।
विज्ञापन
मालूम हो कि अक्तूबर, 2017 में गुजरात हाईकोर्ट ने इस मामले में 11 दोषियों की मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया था, जबकि अन्य 20 मुजरिमों की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था। इससे पहले निचली अदालत ने 31 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 63 को बरी कर दिया था।
विज्ञापन
पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार याकूब के गोधरा में होने की पुख्ता सूचना मिलने के बाद कार्रवाई की गई जिसमें उसे गिरफ्तार कर लिया गया। उसे मंगलवार की सुबह इलाके में घूमते हुए देखा गया था। याकूब उस भीड़ में शामिल था जिसने 27 फरवरी, 2002 को गोधरा स्टेशन के पास साबरमती एक्सप्रेस के डब्बों को आग के हवाले कर दिया था। इस दर्दनाक घटना में 59 कारसेवक मारे गए थे। इसके बाद राज्यभर में दंगे हुए थे।
विज्ञापन
याकूब के खिलाफ सितंबर, 2002 में एफआईआर दर्ज की गई थी। गिरफ्तारी के बाद उस पर धारा 307 (हत्या की कोशिश) सहित आईपीसी की विभिन्न धाराओं में मुकदमा चलाया जाएगा। एफआईआर दर्ज होने के बाद से ही वह गिरफ्तारी से बच रहा था। इस मामले में याकूब के भाई कादिर पटालिया को 2015 में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन मामले की सुनवाई के दौरान जेल में उसकी मौत हो गई।
विज्ञापन
मालूम हो कि अक्तूबर, 2017 में गुजरात हाईकोर्ट ने इस मामले में 11 दोषियों की मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया था, जबकि अन्य 20 मुजरिमों की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था। इससे पहले निचली अदालत ने 31 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 63 को बरी कर दिया था।