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Kerala: देश में अफ्रीकी स्वाइन फीवर का फिर मामला आया सामने, अब त्रिशूर में मारे जाएंगे 310 सुअर
Fri, 05 Jul 2024 03:04 PM IST
काव्या मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, त्रिशूर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, त्रिशूर
Published by: काव्या मिश्रा
Updated Fri, 05 Jul 2024 03:04 PM IST
सार
अधिकारियों का कहना है कि अफ्रीकी स्वाइन फीवर एक से दूसरे सुअर के सीधे संपर्क में आने से फैलता है।
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अफ्रीकी स्वाइन फीवर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कोरोना वायरस महामारी के बीच भारत में एक नई खतरनाक बीमारी सामने आई है। हालांकि, इस बीमारी का कोई असर इंसानों पर नहीं पड़ता, लेकिन बड़ी संख्या में सुअरों की मौत इससे हो सकती है। जी हां हम अफ्रीकी स्वाइन फीवर की बात कर रहे हैं। अब केरल के त्रिशूर जिले के एक गांव के एक खेत (फार्म) में अफ्रीकी स्वाइन फीवर का प्रकोप सामने आया है।
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कैसे होता है स्वाइन फीवर?
अधिकारियों का कहना है कि अफ्रीकी स्वाइन फीवर एक से दूसरे सुअर के सीधे संपर्क में आने से फैलता है। साथ ही अगर किसी संक्रमित सुअर ने कुछ खाकर छोड़ दिया हो और उसे कोई दूसरा स्वस्थ सुअर खा ले, तो भी ये रोग जाता है। इसलिए त्रिशूर जिला कलेक्टर ने मडक्कथारा पंचायत में एक निजी खेत में 310 सुअरों को मारने का आदेश दिया है।
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उन्होंने कहा, '14वें वार्ड में वेलियंतारा के कुट्टलपुझा बाबू के खेत में सुअरों में स्वाइन फीवर के होने का पता चला था। जिला कलेक्टर ने जिला पशुपालन अधिकारी को सुअरों को मारने और उन्हें दफनाने का निर्देश दिया है।'
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10 किलोमीटर तक की...
उन्होंने आगे कहा कि डॉक्टरों, पशुधन निरीक्षकोंऔर परिचारकों की एक टीम सुअरों को मारने का काम करेगी। वहीं, कीटाणु उत्पन्न न हों इसके भी उपाए किए जाएंगे। प्रभावित खेत के एक किलोमीटर के दायरे में आने वाले क्षेत्र को रोग प्रभावित क्षेत्र घोषित किया गया है। वहीं 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले क्षेत्र को रोग निगरानी क्षेत्र घोषित किया गया है।
अधिकारियों ने कहा कि पशुपालन विभाग इस बात की जांच करेगा कि क्या पिछले दो महीनों के भीतर प्रभावित खेत से सुअरों को दूसरे खेतों में ले जाया गया था या नहीं।