{"_id":"611f844f5b31e568436156a7","slug":"afghanistan-not-much-different-since-1999-says-captain-of-the-hijacked-flight-of-air-india-by-taliban","type":"story","status":"publish","title_hn":"अफगानिस्तान: 20 साल में आया कितना अंतर, जानिए उस विमान के कैप्टन से जिसका 1999 में तालिबान ने किया था अपहरण","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
अफगानिस्तान: 20 साल में आया कितना अंतर, जानिए उस विमान के कैप्टन से जिसका 1999 में तालिबान ने किया था अपहरण
Fri, 20 Aug 2021 04:01 PM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Fri, 20 Aug 2021 04:01 PM IST
सार
अफगानिस्तान में सत्ता पर कब्जा अब तालिबान के हाथ में आ चुका है। 20 साल बाद तालिबान ने यहां का नियंत्रण फिर से हासिल किया है। यहां हम आपको बताने जा रहे हैं 20 साल पहले के अफगानिस्तान और आज के अफगानिस्तान में कितना अंतर है और कितनी समानता एयर इंडिया के उस अधिकारी की जुबानी जो 1999 में उस विमान के कैप्टन थे जिसका तालिबान ने अपहरण कर लिया था।
विज्ञापन
देवी शरण
- फोटो : एएनआई
विस्तार
एयर इंडिया के विमान आईसी 814 का दिसंबर 1999 में तालिबान ने कांधार में अपहरण कर लिया था। इस विमान के कैप्टन देवी शरण बताते हैं कि आज अफगानिस्तान में जिस तरह के दृश्य हम टीवी पर देख रहे हैं वह उससे अलग नहीं हैं जो उन्होंने अपहृत विमान के कॉकपिट से देखे थे।
विज्ञापन
समाचार एजेंसी एएनआई की एक रिपोर्ट के अनुसार देवी शरण ने इसे लेकर कहा, 'मुझे नहीं लगता कि 20 साल में कोई खास अंतर आया है। एकमात्र अंतर यही दिखता है कि अब वो (तालिबानी) अधिक शिक्षित प्रतीत होते हैं। जिन लोगों ने हमारे विमान को घेरा था वो लोग प्रशिक्षित नहीं थे।'
विज्ञापन
तालिबान की ओर से हाल ही में की गई एक प्रेस वार्ता को लेकर देवीशरण ने कहा कि जिस तरह के व्यवहार का सामना हमने 20 साल पहले किया था, यह विश्वास करना कठिन है कि भविष्य किस तरह का होगा। लेकिन निश्चित तौर पर हमने कांधार में बहुत खराब समय व्यतीत किया था।
विज्ञापन
20 साल पहले की स्थिति को याद करते हुए देवी शरण ने कहा, 'वो कांधार में रॉकेट लॉन्चर लेकर खुली जीपों में घूम रहे हैं। यह बिल्कुल वैसा ही है जब हम कांधार में अपने विमान के साथ फंस गए थे।' देवी शरण कहते हैं कि आज के वीडियो देख कर ऐसा लगता है कि वहां कुछ भी नहीं बदला है।
देवी शरण तालिबान के साथ अपने अनुभव को याद करते हुए कहते हैं, 'उस वक्त वह हमारी कोई बात नहीं सुन रहे थे। उनका केवल एक उद्देश्य था कि उनकी सारी मांगें पूरी कर दी जाएं। हमें मालूम था कि उनकी मांगों को स्वीकार करने के अलावा हमारे पास बचने का कोई तरीका नहीं था।'
बता दें कि बीते मंगलवार को तालिबान ने महिलाओं के अधिकार और विदेशी सेनाओं में काम करने वाले अफगान नागरिकों की सुरक्षा के मुद्दे पर आश्वासन दिया था। तालिबान ने कहा था कि इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान अब किसी भी अन्य देश के लिए खतरे का कारण नहीं बनेगा।