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तालिबानी सरकार में पाकिस्तानी चेहरे: पाक आतंकी मदरसे के छात्र रह चुके हैं एक चौथाई मंत्री, पांच पर करोड़ों का इनाम

Wed, 08 Sep 2021 02:23 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Wed, 08 Sep 2021 02:23 PM IST
सार

पाकिस्तान की शह पर बनी तालिबानी आतंकी सरकार एक तरह से पाकिस्तान का ही प्रतिनिधित्व करेगी। पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने कहा कि आईएसआई ने सभी नियुक्तियां कराई है।

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Afghanistan crisis news taliban government is puppet like isi and pakistan
afghanistan - फोटो : amar ujala

विस्तार

अफगानिस्तान में तालिबानियों की जो आतंकी सरकार बनी है उसमें एक चौथाई मंत्री ऐसे हैं जो पाकिस्तानी मदरसों के न सिर्फ स्टूडेंट रहे हैं बल्कि अभी भी वहां के मदरसों में इस्लामी शिक्षा के नाम पर आतंकवादी तैयार कर रहे हैं। यही नहीं तालिबानियों की सरकार में पांच मंत्री ऐसे भी हैं जो अमेरिका की लिस्ट में खूंखार आतंकवादी है और उनके सिर पर करोड़ों रुपये का इनाम भी घोषित है। दरअसल तालिबानियों की आतंकी सरकार पाकिस्तान की शह पर बनाई गई है। यही नहीं आईएसआई ने ऐसी गणित सेट की है कि पूरे तालिबान में होने वाली गवर्नर की नियुक्ति भी उसी के इशारे पर होगी। यानी पूरे अफगानिस्तान में अब कहने को तो तालिबानियों का राज होगा लेकिन पाकिस्तान की प्रॉक्सी सरकार चलेगी।

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33 मंत्रियों में से आठ पाकिस्तानी मदरसे के छात्र
अफगानिस्तान में 33 मंत्रियों की बनाई गई आतंकी सरकार में 8 मंत्री ऐसे हैं जो पाकिस्तानी मदरसे जामिया हककानिया सेमिनरी के छात्र रहे हैं। जानकारी के मुताबिक इसमें हक्कानी नेटवर्क के मुखिया और तालिबानी सरकार में नियुक्त किए गए गृहमंत्री सिराजुद्दीन हक्कानी से लेकर तालिबानी सरकार के उप प्रधानमंत्री बनाए गए अब्दुल गनी बरादर समेत रहबरी शूरा काउंसिल से जुड़े कई सदस्य और छःअन्य मंत्री पाकिस्तान के इस मदरसे के स्टूडेंट रहे हैं। इसके अलावा तालिबान सरकार में बनाए गए प्रधानमंत्री और कट्टरपंथी संगठन रहबरी शूरा के मुखिया मुल्ला अखुंद, उप प्रधानमंत्री मुल्ला बरादर, दूसरे उप प्रधानमंत्री अब्दुल सलाम हनफी, गृहमंत्री सिराजुद्दीन हक्कानी विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी को खतरनाक आतंकी घोषित किया जा चुका है। तालिबान के प्रधानमंत्री उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री समेत विदेश मंत्री को प्रतिबंधित सूची में भी डाला जा चुका है। जबकि तालिबान के नियुक्त किए गए गृहमंत्री हक्कानी पर तो अमेरिका ने पचास लाख डॉलर का इनाम भी घोषित किया है।

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आईएसआई के इशारे पर बनी तालिबानी सरकार

दरअसल, अफगानिस्तान तालिबानियों की बनी सरकार पूरी तरीके से आईएसआई के इशारे पर तैयार की गई है। आईएसआई के मुखिया फ़ैज़ हामिद के पहुंचने से पहले ही तालिबान में नई सरकार के गठन का एलान होना था। लेकिन पाकिस्तान को इस बात की भनक लग चुकी थी कि तालिबानियों के बनने वाली सरकार में सबसे ज्यादा योगदान कतर में स्थित तालिबान मुख्यालय का है तो पाकिस्तान ने अपना नया खेल खेलना शुरू कर दिया। पाकिस्तान ने तालिबानियों के बीच मौजूद अपने प्यादों को सक्रिय कर के मंत्रिमंडल के गठन को रुकवा दिया। इसी दौरान आईएसआई के चीफ का काबुल में दौरा तय हुआ और तालिबानियों की सरकार का गठन रुक गया। आईएसआई के मुखिया फैज हामिद कि पाकिस्तान वापसी के बाद वहां पर जो सरकार का चेहरा सामने आया वह पूरी तरीके से पाकिस्तान के नियंत्रण वाली सरकार के चेहरों के तौर पर था। विदेशी मामलों के विशेषज्ञों का कहना है दरअसल पहले जिस सरकार का गठन किया जाना था उसमें ज्यादातर लोग वो थे या अहम पदों पर वह चेहरे सामने आ रहे थे जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तालिबान को समर्थन दिलाने के लिए अमेरिका भारत समेत दुनिया के तमाम मजबूत देशों के साथ बातचीत का सिलसिला शुरू किया था। यही बात पाकिस्तान को नागवार गुजर रही थी। इसीलिए आईएसआई चीफ के दौरे के बाद तालिबान की आतंकी सरकार का पूरा चेहरा ही बदल गया।

पाकिस्तान का अगला दांव

आईएसआई चीफ ने अफगानिस्तान में ऐसी गोटियां सेट की कि अब वहां के सभी 34 प्रांतों में बनने वाले गवर्नर और आंतरिक सुरक्षा के प्रमुखों की नियुक्ति पाकिस्तान के इशारे पर ही होगी। दरअसल पाकिस्तान ने अपने सबसे चहेते हक्कानी नेटवर्क के मुखिया और भारत को अपना दुश्मन मानने वाला सिराजुद्दीन हक्कानी तो गृहमंत्री बनाकर पूरे देश की सुरक्षा और नियुक्तियों को अपने कब्जे में कर लिया। बतौर गृहमंत्री हक्कानी ही सभी 34 प्रांतों में बनने वाले गवर्नर की नियुक्ति करेगा। विदेशी मामलों के जानकार और दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एमएस वाडिया कहते हैं कि हक्कानी हमेशा से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के इशारे पर ही काम करता रहा है। ऐसे में अफगानिस्तान की तालिबानी सरकार में उसको मिले अहम मंत्रालय में पाकिस्तान का न सिर्फ़  पूरा दखल होगा बल्कि वहां होने वाली नियुक्ति में पाकिस्तान की चलेगी। प्रोफेसर वाडिया कहते हैं अगर अफगानिस्तान में पाकिस्तान की प्रॉक्सी सरकार का नाम दिया जाए तो गलत नहीं होगा। क्योंकि जिस तरीके से पाकिस्तान का दखल आतंकियों की बनाई गई सरकार में है उससे पाकिस्तान की मंशा पूरी तरीके से साफ दिख रही है।
ब्रिटेन और अमेरिका के मुंह पर तमाचा : कंवल सिब्बल
भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने ट्वीट करते हुए कहा कि तालिबानियों के मंत्रिमंडल की पूरी नियुक्ति ही आईएसआई ने कराई है। उन्होंने कहा यह ब्रिटेन और अमेरिका के मुंह पर तमाचा है। रक्षा मामलों के जानकार सुशांत सरीन ने भी ट्वीट करते हुए तालिबानियों की बनी सरकार पर कमेंट किया और कहा कि जब आतंकवादी ही सरकार में होंगे तो आतंक को रोका कैसे जाएगा। उन्होंने कहा यह देखना दिलचस्प होगा कि अमेरिका आतंकवाद को रोकने के लिए किए जाने वाले प्रयासों में आतंकियों से कैसे बातचीत करता है। 

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