फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Affected security opinions on AFSPA in disturbed areas

अशांत क्षेत्रों में अफस्पा की समीक्षा पर सुरक्षा तंत्र की राय जुदा

Thu, 04 Apr 2019 02:20 AM IST
गौरव द्विवेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव द्विवेदी Updated Thu, 04 Apr 2019 02:20 AM IST
विज्ञापन
Affected security opinions on AFSPA in disturbed areas
सांकेतिक तस्वीर

कांग्रेस घोषणा पत्र में सशस्त्र बल विशेष अधिकार कानून (अफस्पा) की समीक्षा के प्रस्ताव को लेकर सुरक्षा तंत्र में अंदरखाने बहस शुरू गई है। एक धड़े का मानना है कि 29 साल पुराने कानून की सुरक्षा और मानवाधिकार के नजरिये से समीक्षा की जरूरत है। वहीं दूसरे धड़े का मानना है कि अफस्पा कानून में कोई कमी नहीं है, उसके क्रियान्वयन में खामी के कारण कानून बदनाम हो गया है। बिना अफस्पा अशांत क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई संभव नहीं।

विज्ञापन


सेना के उत्तरी कमान ने पूर्व प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल (रिटा.) अता हसनैन ने कहा कि इसे सियासी नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए। लेकिन करीब तीन दशक पुराने इस कानून की नए सिरे से समीक्षा की जरूरत है। इसे जल्दबाजी में लागू किया गया था। तब कई मुद्दों पर मंथन नहीं हो सका था। अब हमारे पास अफस्पा के साथ कार्रवाई का 29 साल का तजुर्बा है। इसकी समीक्षा कर इसे बेहतर बनाया जा सकता है। हसनैन ने बताया कि अगर इसे किसी इलाके से हटाना भी है तो बिना सेना की सहमति के कोई फैसला लिया जाना उचित नहीं होगा।
विज्ञापन


इंस्टीट्यूट ऑफ कनफ्लिक्ट मैनेजमेंट के कार्यकारी निदेशक और सुरक्षा विशेषज्ञ अजय साहनी के मुताबिक अफस्पा कानून में कोई कमी नहीं है। अशांत क्षेत्र में आतंकी और उग्रवादी किसी कानून के तहत हमले नहीं करते। लिहाजा सैन्य बलों को भी उनसे मुकाबले के लिए कानूनी सुरक्षा कवच जरूरी है। गड़बड़ी दरअसल इस कानून के क्रियान्वयन में है। साहनी ने कहा कि अगर कोई सैन्य अधिकारी इस कानून की आड़ में मानवाधिकार का उल्लंघन करता है तो सजा का सख्त प्रावधान है। लेकिन पूरा उस पर पर्दा डाल देता है। यही वजह है कि यह कानून बदनाम हो गया है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


जस्टिस जीवन रेड्डी कमेटी रिपोर्ट

नवंबर 2004 में भी यूपीए सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज जस्टिस जीवन रेड्डी की अध्यक्षता में आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पावर एक्ट (अफस्पा) की समीक्षा के लिए कमेटी बनाई थी। जून 2005 में सरकार को सौंपी गई रिपोर्ट में कमेटी ने कहा कि यह कानून बदनाम हो गया है, लिहाजा इसे खत्म कर देना चाहिए। गृह मंत्रालय के अधिकारी के मुताबिक कमेटी को इसके प्रावधानों से कोई शिकायत नहीं थी, लेकिन उसके दुरुपयोग के कारण इसे खत्म करने की अनुशंसा की गई थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed