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कोरोना संकट: मरीज के 10 मीटर तक हवा में रहते हैं एयरोसोल, हवादार रखें घर-दफ्तर
Fri, 21 May 2021 08:32 AM IST
Jeet Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Fri, 21 May 2021 08:32 AM IST
सार
- केंद्र सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार ने दी सलाह, घर, ऑफिस और सार्वजनिक जगहों पर वेंटिलेशन पर जोर
- किसी कोरोना संक्रमित रोगी की लार और छींक, ड्रॉपलेट और एयरोसोल के रूप में संक्रमण फैलाने की मुख्य वजह हैं।
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कोरोना वायरस
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कोरोना संक्रमित मरीज के आसपास 10 मीटर तक हवा में एयरोसोल रह सकते हैं। ऐसे में घर, ऑफिस या अन्य सार्वजनिक स्थानों को हवादार बनाए रखें। आमतौर पर संक्रमित मरीज से कोरोना वायरस दो मीटर तक हवा में रह सकते है, इसलिए दो गज दूरी अनिवार्य की गई है।
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हालांकि, अब एयरोसोल के बारे में मिली नई जानकारी को देखते हुए कोरोना नियमों का सख्ती से पालन करना जरूरी है, ताकि देश को संक्रमण की तीसरी लहर से बचाया जा सके। केंद्र सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार के विजय राघवन ने यह सलाह दी है।
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राघवन के मुताबिक, किसी कोरोना संक्रमित रोगी की लार और छींक, ड्रॉपलेट और एयरोसॉल के रूप में संक्रमण फैलाने की मुख्य वजह हैं। ड्रॉपलेट जहां दो मीटर तक जाकर सतह पर बैठ जाता है, वहीं एयरोसॉल 10 मीटर तक हवा में फैल सकता है।
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उन्होंने लोगों से अपील की है कि मास्क, सैनिटाइजेशन, सामाजिक दूरी के अलावा वेंटिलेशन (हवादार) जैसी सामान्य चीजों का पालन करके महामारी के संक्रमण को रोका जा सकता है।
इन दिशा-निर्देशों को लेकर एक रिपोर्ट भी जारी की है, जिसके मुताबिक शहरी और ग्रामीण इलाकों में घरों, ऑफिसों और सार्वजनिक जगहों पर तेजी से वेंटिलेशन सुनिश्चित करने की जरूरत है। घरों, दफ्तरों और केंद्रीय इमारतों में पंखे लगाकर, खिड़कियां-दरवाजे खोलकर हवादार बनाने की बात कही गई है।
बंद जगहों पर संक्रमण का खतरा ज्यादा
दिशा-निर्देश में कहा है कि घरों में हवा आने-जाने की समुचित व्यवस्था होने से वायरस का दबाव कम होता है, जबकि जिन घरों, कार्यालयों में हवा के आने-जाने का उचित प्रबंध नहीं होता, वहां वायरस लोड ज्यादा होता है।
हवादार स्थान होने के कारण एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे स्वस्थ व्यक्ति तक वायरस पहुंचने का जोखिम कम हो जाता है। पंखों को सही जगह लगाना, खिड़की-दरवाजे खोलकर रखना बहुत सरल उपाय हैं। अगर थोड़ी सी भी खिड़की खोलकर रखी जाए, तो उतने भर से ही बाहर की हवा मिलेगी और भीतर की हवा की गुणवत्ता बदल जाएगी।
दो मास्क लगाएं
राघवन ने लोगों को दो मास्क या एन 95 मार्का मास्क पहनने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि मास्क, हवादार स्थान, सामाजिक दूरी और स्वच्छता ऐसे हथियार हैं, जिनसे हम वायरस के खिलाफ जंग जीत सकते हैं।
-घर पर बना कॉटन का डबल लेयर मास्क सबसे बेहतर
-एन95 मास्क भी काफी कारगर है
-डबल मास्क पहनने से सुरक्षा कवच और मजबूत होगा
सावधानी
-मास्क टाइट पहनें, नाक और ठोड़ी के पास हवा जाने की जगह न हो
-कपड़े का मास्क रोज धोएं, धूप में सुखाएं
-बाहर निकलने पर मास्क लगाएं
डबल मास्क लगाते हैं तो..
-पहले सर्जिकल मास्क लगाएं, कपड़े से बना मास्क उसके ऊपर से लगाएं
-दो कॉटन मास्क भी एक साथ पहने सकते हैं
वायरस के फैलाव के तीन प्रमुख कारक
एयरोसोल - हवा से सूक्ष्म बूंदें
ड्रॉपलेट्स- हवा में बूंदें
सर्फेस - सतह पर वायरस
जब प्रोटोकॉल का पालन नहीं
वायरस का प्रसार होने की गति बहुत अधिक है। वायरस कुछ लोगों के जरिए एक बड़े समूह को भी अपनी चपेट में ले सकता है। नियमों का पालन करें, सभी सावधानी बरतें जिसमें वायरस को फैलने या पनपने का मौका न मिले। लक्षण रहित संक्रमित भी दूसरों को संक्रमित कर सकता है। जिनमें लक्षण नहीं हैं वो भी खुद को आइसोलेट रखें।