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Aditya-L1: 9.2 लाख किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर चुका ISRO का यान, पृथ्वी के प्रभाव क्षेत्र से बाहर निकला

Sat, 30 Sep 2023 07:32 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 30 Sep 2023 07:32 PM IST
सार

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शनिवार को जानकारी दी कि उसका अंतरिक्ष यान 9.2 लाख किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर चुका है। इसके साथ ही यह पृथ्वी के प्रभाव क्षेत्र से सफलतापूर्वक बाहर निकल गया है। 

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Aditya L-1: spacecraft has travelled beyond a distance of 9.2 lakh kilometres from Earth
isro aditya l1 mission - फोटो : ISRO (File)

विस्तार

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शनिवार को जानकारी दी कि उसका अंतरिक्ष यान 9.2 लाख किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर चुका है। इसके साथ ही यह पृथ्वी के प्रभाव क्षेत्र से सफलतापूर्वक बाहर निकल गया है। अब यह सन-अर्थ लैंग्रेज प्वाइंट 1 (एल1) की ओर अपना रास्ता तय कर रहा है। यह दूसरी बार है जब इसरो किसी अंतरिक्ष यान को पृथ्वी के प्रभाव क्षेत्र से बाहर भेज सका है, इससे पहले मंगलयान  को पहली बार पृथ्वी के प्रभाव क्षेत्र से बाहर भेजा गया था। 

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इसी महीने हुई थी लॉन्चिंग
भारतीय स्पेस एजेंसी इसरो ने दो सितंबर को भारत के पहले सौर मिशन आदित्य-एल1 की लॉन्चिंग की थी। इसरो ने पीएसएलवी सी57 लॉन्च व्हीकल से आदित्य एल1 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया था। लॉन्चिंग आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी) से हुई थी। यह मिशन भी चंद्रयान-3 की तरह पहले पृथ्वी की परिक्रमा करेगा और फिर यह तेजी से सूरज की दिशा में उड़ान भरेगा।

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15 लाख किलोमीटर की दूरी तय करेगा आदित्य-एल1
जानकारी के अनुसार, आदित्य-एल1 अंतरिक्ष यान को सौर कोरोना (सूर्य की सबसे बाहरी परतों) के दूरस्थ अवलोकन और एल-1 (सूर्य-पृथ्वी लैग्रेंजियन बिंदु) पर सौर हवा की यथास्थिति अवलोकन के लिए बनाया गया है। एल-1 पृथ्वी से करीब 15 लाख किलोमीटर दूर है।
 

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तारों के अध्ययन में सबसे ज्यादा मदद करेगा
इसरो के मुताबिक, सूर्य हमारे सबसे करीब मौजूद तारा है। यह तारों के अध्ययन में हमारी सबसे ज्यादा मदद कर सकता है। इससे मिली जानकारियां दूसरे तारों, हमारी आकाश गंगा और खगोल विज्ञान के कई रहस्य और नियम समझने में मदद करेंगी। हमारी पृथ्वी से सूर्य करीब 15 करोड़ किमी दूर है। आदित्य एल1 वैसे तो इस दूरी का महज एक प्रतिशत ही तय कर रहा है, लेकिन इतनी सी दूरी तय करके भी यह सूर्य के बारे में हमें ऐसी कई जानकारियां देगा, जो पृथ्वी से पता करना संभव नहीं होता।

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