Adani Row: अगले आम चुनाव में BJP को घेरने के लिए बड़ा हथियार साबित होगा अदाणी विवाद, विपक्ष ने बनाई ये रणनीति
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विस्तार
अगले आम चुनाव में भाजपा और पीएम नरेंद्र मोदी को रोकने के लिए अदाणी विवाद (Adani Row) विपक्ष का प्रमुख हथियार बन सकता है। बजट सत्र की शुरूआत से ही विपक्ष ने अदाणी-हिंडनबर्ग रिपोर्ट पर हमलावर रुख अपनाए रखा है और इस बीच सरकार को बार-बार रक्षात्मक रुख अपनाना पड़ा है। मामले की जांच पर जेपीसी गठित करने की मांग को लेकर हुए हंगामे के बीच राज्यसभा को 13 मार्च तक स्थगित करना पड़ा है, जबकि तमाम गतिरोध के साथ निचले सदन में कार्यवाही जारी है। विपक्ष बजट सत्र के दूसरे चरण में भी इस विवाद पर अपना रुख बनाए रख सरकार पर दबाव बनाए रखने की कोशिश करेगा। विपक्षी नेताओं के रुख से यह भी स्पष्ट हो गया है कि अगले आम चुनाव को ध्यान में रखते हुए वह अदाणी-हिंडनबर्ग विवाद को एक बड़े राजनीतिक अवसर के रूप में बदलने की रणनीति बना चुका है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार सुबह अदाणी विवाद पर विपक्षी नेताओं को भरोसे में लिया और एकमत से सरकार के विरोध का निर्णय लिया गया। इस निर्णय का असर लोकसभा-राज्यसभा में दिखाई पड़ा और दोनों सदनों में दिन भर हंगामेबाजी होती रही। ज्यादा हंगामे के कारण अंततः राज्यसभा को 13 मार्च तक के लिए स्थगित तक करना पड़ गया। कांग्रेस की पहल पर लगभग एक दर्जन विपक्षी दलों का इस मुद्दे पर साथ आना आगामी चुनावी की दृष्टि से एक बेहतर संकेत माना जा रहा है।
विपक्षी एकता की पहली झलक दिखी
भारत जोड़ो यात्रा के समापन के अवसर पर राहुल गांधी के नेतृत्व में दूसरे दलों को साथ लाने की कोशिश अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाई थी, इससे 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्षी एकता का मुद्दा भी सवालों के घेरे में आ गया था। लेकिन जिस तरह अदाणी विवाद में कांग्रेस कई दलों को साथ लाने में कामयाब रही है, उससे पार्टी का मनोबल बढ़ा है। इससे यह संकेत भी मिल गया है कि यदि कांग्रेस मुद्दों को आगे रखकर एक साझा रणनीति बनाने की कोशिश करती है तो उसे बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।
इस मामले पर सर्वोच्च न्यायालय में भी सरकार की किरकिरी हुई है। सरकार जेपीसी गठित होने पर सहमत होती हुई दिखाई पड़ रही है, उससे भी विपक्षी रणनीति कारगर होती दिख रही है। यदि इस मामले पर जेपीसी का गठन हो जाता है, तो इस मामले पर सरकार को बचाव कर पाना कठिन हो जाएगा। इससे कंपनी की आर्थिक स्थिति पर चाहे जो असर पड़े, सरकार की सेहत खराब होना तय है। विपक्ष इस लाभ को हाथ से न जाने देने की कोशिश करेगा। कांग्रेस इस मुहिम में विपक्षी खेमे का नेतृत्व कर सकती है।
किसानों के मुद्दे के बाद दूसरी बार फंसी सरकार
आर्थिक सुधारों के लिए कठोर कदम उठाने और जनता को दवा के कड़वे घूंट के लिए तैयार रहने की सीख देने वाले प्रधानमंत्री मोदी को अपने कार्यकाल में अब तक दो बार बैकफुट पर आना पड़ा है। एससी-एसटी आरक्षण और तीन विवादित कृषि कानूनों को वापस लेने पर मजबूर होने के बाद यह तीसरा मामला होगा, जहां सरकार विपक्ष के सामने कमजोर होती दिख रही है। यही कारण है कि विपक्ष इस मामले को जोरशोर से उठाकर बढ़त लेने की कोशिश कर रही है।
सरकार को घेरने की करेंगे हर संभव कोशिश
कांग्रेस नेता रितु चौधरी ने अमर उजाला से कहा कि अदाणी विवाद में देश के करोड़ों निवेशकों की जिंदगी भर की कमाई दांव पर लगी हुई है। ऐसे में विपक्ष के सबसे बड़े दल होने के नाते वे अपनी जिम्मेदारी संसद से सड़क तक निभाएंगे और सरकार को इस मामले की जांच के लिए मजबूर करेंगे। कांग्रेस नेता ने कहा कि भारत जोड़ो यात्रा 1.0 से राहुल गांधी ने जनता के मुद्दों को ही उठाने का काम किया है।
अब यात्रा के दूसरे चरण में सिविल सोसाइटी के लोगों ने जनता के मुद्दों को उठाते रखने की रणनीति अपनाई है। इसमें देश के हर कोने-कोने तक में छोटी-छोटी जनसभाओं के जरिए लोगों तक इस मामले की पूरी जानकारी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि जनता को वर्तमान सरकार से निजात दिलाने के लिए कांग्रेस सभी दलों को साथ लेने की कोशिश अवश्य करेगी। बदलते हालात में उन्हें उम्मीद है कि ज्यादा से ज्यादा दल साथ आकर सरकार को गलत कार्य करने से रोकने का काम करेंगे।