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आचार्य प्रमोद कृष्णम ने पूछा: धर्म का कुंभ तो रुक गया, मोदी और शाह की राजनीतिक रैलियों का कुंभ कब रुकेगा?
Sun, 18 Apr 2021 10:10 PM IST
गौरव पाण्डेय
अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Sun, 18 Apr 2021 10:10 PM IST
सार
- कोरोना संक्रमण को देखते हुए पीएम मोदी ने हिंदू धर्माचार्यों से की थी कुंभ को सीमित करने की अपील, धर्माचार्यों ने कुंभ को सीमित करने का निर्णय लिया
- लेकिन पश्चिम बंगाल में अभी भी जारी है चुनावी महाकुंभ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह के साथ ममता बनर्जी के दर्जनों कार्यक्रमों की रूपरेखा है तैयार
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रैली करते पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह
- फोटो : एएनआई (फाइल)
विस्तार
एक तरफ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने ही पश्चिम बंगाल में अपनी आगे की चुनावी रैलियां स्थगित करके अन्य राजनीतिक दलों से भी ऐसा करने की अपील की है। वहीं, धर्माचार्यों ने भी कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत सभी नेताओं को कोरोना संक्रमण के मद्देनजर अपने चुनावी कार्यक्रम तत्काल रद्द कर देने चाहिए। प्रियंका गांधी के प्रमुख सलाहकार कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पश्चिम बंगाल में चल रही राजनीतिक रैलियों पर तुरंत विराम लगाना चाहिए।
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उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह द्वारा राजनीतिक रैलियां जारी रखने से देश में बेहद गलत संदेश जा रहा है। लोग समझ रहे हैं कि कोरोना महामारी के लिए जारी किया गया प्रोटोकॉल झूठा है क्योंकि देश के प्रधानमंत्री की रैलियों में ही इस प्रोटोकोल का पालन नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह के भ्रम को दूर करने के लिए पीएम को उच्च मापदंड स्थापित करना चाहिए और उन्हें भी राहुल गांधी की तरह अपनी रैलियों पर विराम लगाकर एक अच्छा संदेश देना चाहिए।
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आचार्य प्रमोद कृष्णम ने अमर उजाला से कहा कि प्रधानमंत्री की एक अपील पर देश के धर्माचार्यों ने 12 साल में एक बार आने वाले कुंभ का आयोजन सीमित कर दिया। लेकिन अब बारी प्रधानमंत्री की है। उन्हें भी यह आदर्श स्थापित करना चाहिए कि जनता के स्वास्थ्य से बढ़कर उनके लिए कुछ और नहीं है। बेहतर उदाहरण स्थापित करने के लिए उन्हें स्वयं राजनीतिक समुदाय से अपील करनी चाहिए कि जब तक कोरोना काल रहेगा, तब तक इस तरह भीड़ जुटाकर जनता की जिंदगी के साथ कोई खिलवाड़ नहीं करेगा।
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उन्होंने कहा कि जिस समय कोरोना संक्रमण रोकने के नाम पर स्कूल-कॉलेज, परीक्षाएं, होटल और मॉल बंद कर दिए गए हैं, उसी समय केवल राजनीतिक कार्यक्रमों पर रोक न लगाना जनता के मन में राजनेताओं के लिए नकारात्मक सोच का सृजन करता है। उन्होंने कहा कि इस परिस्थिति को देखते हुए रैलियों पर तत्काल रोक लगनी चाहिए।
‘राजा के कार्य जनता का आदर्श’
अयोध्या के संत आचार्य मधुप ने कहा कि देश का राजा जनता के बीच एक आदर्श की तरह होता है। राजा जिस प्रकार का व्यवहार करता है, जनता उसी को आदर्श मानकर उसका अनुकरण करती है। अगर प्रधानमंत्री और देश के गृह मंत्री स्वयं भारी-भरकम रैलियां कर रहे हैं तो इससे जनता में यही संदेश जा रहा है कि कोरोना की समस्या इतनी गंभीर नहीं है जितनी कि बताई जा रही है। अगर यह इतना ही गंभीर समस्या होती तो देश का प्रधानमंत्री ऐसा न करता। उन्होंने कहा कि जनता को एक आदर्श स्थापित करने के लिए पीएम को तत्काल सभी राजनीतिक कार्यक्रमों पर पाबंदी लगा देनी चाहिए।
एक तरफ कोरोना पर चर्चा और दूसरी तरफ चुनाव क्यों
आचार्य शैलेश ने कहा कि प्रधानमंत्री एक तरफ तो राज्य के मुख्यमंत्रियों, राज्यपालों और स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ बैठकें कर कोरोना के हालत का जायजा ले रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ वे पश्चिम बंगाल में बड़ी-बड़ी रैलियां आयोजित कर रहे हैं। इससे समाज में बेहद लोकप्रिय रहे प्रधानमंत्री के प्रति गलत संदेश जा रहा है कि वे दूसरों के लिए तो कोरोना की बाधा दिखा रहे हैं, लेकिन स्वयं अपने कार्यक्रमों के लिए कोई बाधा नहीं मान रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी की ही लोकप्रियता को ही नुकसान पहुंचता है जिससे उन्हें बचने की कोशिश करनी चाहिए।