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PNB फ्रॉड : नोटबंदी के चलते खुली हीरा कारोबारी नीरव मोदी की पोल
शिशिर चौरसिया, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 17 Feb 2018 09:02 AM IST
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केंद्र सरकार के 8 नवंबर 2016 में की गई नोटबंदी के चलते ही पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) का घोटाला सामने आ सका है। बैंक विशेषज्ञों का मानना है कि नोटबंदी की वजह से वर्ष 2017 की शुरुआत में नीरव मोदी की आमदनी घट गई थी, इसलिए वह अपने विदेशी आपूर्तिकर्ता के बिल का भुगतान नहीं कर पाया। ऐसा होने पर उनके आपूर्तिकर्ता ने पीएनबी से जारी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग को भुना लिया और उनकी पोल खुल गई।
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आमदनी घटने से विदेशी आपूर्तिकर्ताओं को नहीं चुका पाया पैसा
एक सरकारी बैंक में वरिष्ठ अधिकारी रहे विशेषज्ञ ने बताया कि यदि नोटबंदी नहीं होती तो जैसे पहले सब कुछ मैनेज हो रहा था, वैसे ही बाद में भी हो जाता। नीरव मोदी का यह खेल वर्ष 2011 में ही शुरू हुआ था लेकिन तब यह सामने नहीं आ पाया क्योंकि वह लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) की अवधि बढ़वा कर बाजार से पैसे जुटाता था और समय बीतने से पहले ही इंपोर्ट बिल का भुगतान कर देता था।
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आपूर्तिकर्ता के एलयूओ को भुनाने के चलते चला इसका पता
इसलिए बैंक की बैलेंस शीट में यह दिखता नहीं था और वह किसी की पकड़ में नहीं आया। नीरव मोदी के गहने बेहद महंगे होते हैं, इसलिए नोटबंदी के बाद उनकी बिक्री पर काफी असर पड़ा। शायद, यही वजह है कि वह फरवरी 2017 के बाद ऐसा नहीं कर पाया और जनवरी 2018 तक उसका भेद खुल गया।
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कैसे होता था खेल?
एक अग्रणी सरकारी बैंक के फोरेक्स डिविजन में लगातार चार साल तक एलओयू जारी करने का ही काम देखने वाले एक अधिकारी का कहना कि आयात करने वाले कारोबारी इंपोर्ट बिल के भुगतान करने के लिए एलओयू लेते हैं। एलओयू, जिसे आमतौर पर आयातक लेटर ऑफ क्रेडिट या एलसी कहते हैं, जारी करने से पहले बैंक आयातक फर्म से कुछ फीसदी रकम कैश मार्जिन रखने को कहते हैं। यही नहीं, बैंक कुछ कोलेटरल गारंटी भी मांगते हैं। इसके बाद एलसी जारी होती है जो कि आयातक फर्म विदेशी आपूर्तिकर्ता को देते हैं। इसे पाने के बाद ही विदेशी आपूर्तिकर्ता माल भेजता है। इसके बाद माल रवाना किए जाने के बाद नियत अवधि में यदि विदेशी आपूर्तिकर्ता को बिल का भुगतान नहीं किया जाता है तो वे एलसी भुना लेते हैं। जिस बैंक ने एलसी जारी किया है, संबंधित देश में उस बैंक के करोसपोंडेंट बैंक को उसे सौंप दिया जाता है जो कि उसके बदले में उतने डॉलर का भुगतान कर इसे स्विफ्ट सिस्टम में एमटी 740 फार्मेट में संदेश भेज देते हैं। इस संदेश को बैंक में शीर्ष प्रबंधन स्तर पर देखा जाता है।
एलओयू की अवधि बढ़ सकती है
बैंकिंग तंत्र में ऐसी व्यवस्था है कि 90 दिन की अवधि के लिए जारी हुए एलओयू की अवधि अधिकतम 360 दिन तक बढ़ाई जा सकती है। इस बीच एलओयू लेने वाला बाजार से इसके दम पर पैसे जुटाकर इंपोर्ट बिल का भुगतान कर सकता है। ऐसे में एलओयू को इंपोर्ट बिल के बदले नहीं भुनाया जाता है।
चार्टर्ड अकाउंटेंट इंस्टीट्यूट भी हुई सक्रिय
इस मामले पर भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट संस्थान (आईसीएआई) ने खुद पहल करते हुए एक उच्चस्तरीय समूह का गठन किया है जो इसकी जांच कर ऐसी स्थिति को रोकने का उपाय सुझाएगा।