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जन्म के एक घंटे के भीतर केवल 42 फीसदी नवजातों को ही मिल पाता है मां का दूध
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 11 Aug 2018 09:57 AM IST
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स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार बच्चे के जन्म के एक घंटे के भीतर उसे स्तनपान कराना आवश्यक होता है। इससे उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। लेकिन नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे-4 के पंजाब में किए गए सर्वे के मुताबिक केवल 30 फीसदी माताएं ही नवजात को जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान कराती हैं। इससे बच्चे के स्वास्थ्य पर तो बुरा प्रभाव पड़ता ही है साथ ही उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाती है।
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सर्वे के अनुसार 30 फीसदी नवजातों को ही एक घंटे के भीतर अपनी मां का दूध मिल पाता है। अगर पूरे देश के आंकड़े देखें तो केवल 42 फीसदी बच्चों को ही जन्म के एक घंटे के भीतर मां का दूध मिल पाता है। यानि जीवन के उस अमूल्य एक घंटे में बड़ी संख्या में नवजात मां के दूध से वंचित रह जाते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. अनिल सूद का कहना है कि यदि जन्म के एक घंटे के भीतर बच्चे को मां का दूध मिल जाता है तो उसकी रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ जाती है। इस दूध में कोलोस्ट्रम होता है जो कि एंटीबैकटीरियल और एंटीवायरल होता है। जिन बच्चों को वक्त पर मां का दूध मिल जाता है उनके इंफेक्शन से बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
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केरल में बेहतर हैं हालात
डॉक्टर ने कहा कि पंजाब के मुकाबले केरल में बच्चे के जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान कराने का आंकड़ा दोगुना है। यहां पंजाब से ज्यादा बेहतर हालात हैं। उन्होंने माताओं को सलाह दी की वह किसी भी तरह की गलतफहमी से बचें।
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47 फीसदी को नहीं मिल पाता मां का दूध
पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री ब्रह्म महिंद्रा ने कहा कि यदि बच्चों को शुरुआत से ही मां का दूध मिले तो नवजात मृत्यु दर में 20 फीसदी की कमी आ सकती है। पंजाब में 53 फीसदी माताएं अपने बच्चे को शुरुआत के छह माह तक स्तनपान करवाती हैं। जबकि 47 फीसदी नवजात मां के दूध से वंचित रह जाते हैं।