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अध्ययन: गर्म हो रही मिट्टी...पौधों-जीवों पर बढ़ा संकट, जंगलों के घटने का दिख रहा असर

Mon, 21 Oct 2024 04:56 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Mon, 21 Oct 2024 04:56 AM IST
सार

एक अध्ययन के अनुसार, लगातार जंगलों के घटने और नमी वाली जमीन को कृषि भूमि में बदले जाने से सॉइल कंपाउंड ड्राउट हीटवेव (एससीडीएचडब्ल्यू) का खतरा और बढ़ जाएगा।

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According to study due to depletion of forests warming soil plants and animals are in increasing danger
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 मिट्टी पारिस्थितिकी तंत्र में अहम भूमिका निभाती है। पौधों की जड़ों को सहारा देती है और कई सूक्ष्मजीवों को आश्रय देती है। मिट्टी के लगातार सूखने और गर्म होने की घटनाओं में भारी वृद्धि होने के कारण पौधों और जीवों पर संकट गहराने लगा है। अत्यधिक सूखी या अत्यधिक नम मिट्टी पौधों व जीवों में बीमारियों को बढ़ाती है। एक अध्ययन के अनुसार, लगातार जंगलों के घटने और नमी वाली जमीन को कृषि भूमि में बदले जाने से सॉइल कंपाउंड ड्राउट हीटवेव (एससीडीएचडब्ल्यू) का खतरा और बढ़ जाएगा।

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चीनी अकादमी ऑफ साइंसेज के नानजिंग इंस्टीट्यूट ऑफ ज्योग्राफी एंड लिम्नोलॉजी के शोधकर्ताओं का यह अध्ययन नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित हुआ है। शोध में 1980 से 2023 तक दुनियाभर में मिट्टी पर सूखे और भयंकर गर्मी का असर जिसे सॉइल कंपाउंड ड्राउट हीटवेव कहा जाता है, से संबंधित घटनाओं की मात्रा तय की गई है। इसके साथ ही यह पूर्वानुमान भी जारी किया गया है कि इस सदी के अंत तक वह किस तरह और बढ़ेगी। नमी वाली जमीन को कृषि भूमि में बदलने से भी मिट्टी के सूखने और गर्म होने की घटनाएं बढ़ रही हैं। इसके अलावा खेती में रसायनों का अंधाधुंध इस्तेमाल करने से मिट्टी अम्लीय होती जा रही है, जिसके कारण यह जल्दी टूट भी रही है और गर्म भी हो रही है।
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मिट्टी का सूखना जल सुरक्षा चक्र के लिए चुनौती
अध्ययन के अनुसार, मिट्टी के सूखने और गर्म होने की अवधि गर्मी के मौसम पर आधारित है जो जल सुरक्षा चक्र के लिए भी एक भारी चुनौती है। मिट्टी ऊष्मा की अतिचालक है इसलिए उसका तापमान सर्दियों में गर्म और गर्मी में ठंडा होता है। मिट्टी पर सूखे और भयंकर गर्मी का बहुत ज्यादा असर देखा गया। मिट्टी के सूखने से पौधों की संख्या कम होती है, जिससे जल चक्र प्रभावित होता है और वर्षा कम होती है।

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