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भारत में फीकी हो रही इंजीनियरिंग की चमक, 94 फीसदी नौकरी के लायक नहीं

Sat, 14 Jul 2018 05:38 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 14 Jul 2018 05:38 PM IST
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According to study 94 percent engineers in country are not fit for hiring

भारत में एक समय ऐसा था जब इंजीनियरिंग को सफल व्यक्ति की पहचान के साथ जोड़ा जाता था। अभिभावकों का तो सपना ही यही होता था कि उनका बच्चा इंजीनियर बने। लेकिन आज के समय में ये क्षेत्र अपना महत्व खोता जा रहा है। इंजीनियरिंग में दाखिला लेने के लिए छात्र पहले खूब मेहनत किया करते थे। अब वह इंजीनियरिंग छोड़ अन्य विकल्पों की तलाश कर रहे हैं।

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इसके अलावा पहले एक के बाद एक इंजीनियरिंग कॉलेज खुलते जा रहे थे वहीं अब उन पर ताला लगता जा रहा है। जिनका सपना इस क्षेत्र में करियर बनाना होता है वो कोर्स पूरा करने के बाद या तो स्कूलों में बच्चों को पढ़ा रहे हैं या कॉल सेंटर में नौकरी करने को मजबूर हैं। इसके पीछे एक नहीं बल्कि बहुत से कारण हैं। जिन्होंने इस उन्नत क्षेत्र की चमक फीकी कर दी है।
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94 फीसदी नौकरी के लायक नहीं

रोजगार योग्यता मूल्यांकन कंपनी एस्पाइरिंग माइंड्स के शोध के मुताबिक भारत में 94 फीसदी इंजीनियर सॉफ्टवेयर डिवेलपमेंट की नौकरी के काबिल नहीं हैं। इस शोध को बाद में टीवी मोहनदास ने पूरी तरह से बकवास बताया। मोहनदास मणिपाल ग्लोबल एजुकेशन के अध्यक्ष और इन्फोसिस के बोर्ड सदस्य हैं। वहीं टेक महिंद्रा के सीईओ और एमजी सीपी गुरनानी का कहना है कि 94 फीसदी इंजीनियरिंग ग्रेजुएट भर्ती के लिए पूरी तरह फिट नहीं हैं। टॉप 10 आईटी कंपनियां भी केवल 6 फीसदी की ही भर्ती करती हैं।
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यह भी पढ़ें- गुजरात : इंजीनियरिंग कॉलेज दाखिले पर दे रहे मुफ्त लैपटॉप और बाइक, सालाना फीस महज 2500 रुपए

उनसे जब पूछा गया कि बाकी के 94 फीसदी का फिर क्या होगा? इस सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि बड़े कौशल अंतर के कारण अब उन्हें भी काम दोबारा सिखाया जाता है, जिनकी भर्ती की जाती है। टेक महिंद्रा में भी उन्होंने पांच एकड़ में तकनीक सीखाने का केंद्र बनाया है। यह काम अन्य कंपनियां भी कर रही हैं। गुरनान ने उदाहरण देते हुए बताया कि जो छात्र 60 फीसदी अंक प्राप्त करता है और जिसे इंग्लिश ऑनर्स में दाखिला नहीं मिलता वह भी इंजीनियरिंग को ही चुनता है। लोगों में कौशल की कमी है। हम नौकरी करने के लिए उन्हें तैयार ही नहीं कर रहे हैं। भारतीय आईटी इंडस्ट्री को कौशल चाहिए।

नहीं मिल रही नौकरी हजारों ने छोड़ी पढ़ाई, कॉलेजों में लगे ताले

According to study 94 percent engineers in country are not fit for hiring

लाखों रुपये खर्च करने के बाद करोड़ों के पैकेज की चाहत के बीच नौकरी के लाले पड़ने से मायूस छात्र इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़ रहे हैं। इतना ही नहीं, इंजीनियरिंग के छात्र नहीं मिलने से दर्जनों कॉलेजों पर ताले लग गए हैं। और तो और प्रीमियम संस्थान आईआईटी के प्लेसमेंट में भी पांच फीसदी की गिरावट आई है। छात्रों की पहली पसंद रही इंजीनियरिंग की डिग्री से उनका मोहभंग होता जा रहा है।

तकनीकी शिक्षा में लगातार गिरावट और नौकरी की मांग में कमी के चलते इंजीनियरिंग कॉलेजों में पिछले साल 22 हजार से अधिक छात्रों ने पढ़ाई छोड़ दी। छात्र न मिलने के कारण 62 कॉलेजों में ताला लग गया था। देशभर में सबसे अधिक हरियाणा के 11 कॉलेज बंद हुए वहीं यूपी चौथे नंबर पर था।

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वर्ष 2014-15 में 12,553 छात्रों ने प्लेसमेंट में भाग लिया, जिनमें महज 9,141 छात्र ही चुने गए। यानी प्लेसमेंट प्रतिशत 72.82 फीसदी रहा। वहीं, वर्ष 2015-16 में 75.79 फीसदी छात्र चुने गए। जबकि 2016-17 में 12,525 छात्रों में से 8,874 छात्रों को ही नौकरी मिली।

बेरोजगारी के चलते स्कूलों में पढ़ाने को मजबूर इंजीनियरिंग के छात्र

According to study 94 percent engineers in country are not fit for hiring

इंजीनियरिंग में बढ़ती बेरोजगारी के चलते अब छात्र साइंस में ग्रेजुएशन कर स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। लेकिन साइंस कोर्स देश में दूसरे सबसे पॉपुलर अंडर ग्रेजुएट कोर्स के रूप में फिर से उभरा है। जबकि आर्टस पहले की तरह ही पीछे है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 2016-17 में 97.3 लाख छात्रों ने बीए में दाखिला लिया, जबकि बीएससी में दाखिला लेने वालों की संख्या 47.3 लाख और इंजीनियरिंग में दाखिला लेने वालों की संख्या 41.6 लाख थी।

थापर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलोजी के डॉयरेक्टर प्रकाश गोपालन का कहना है कि बीएससी कोर्स के साथ ही कंप्यूटर, फार्मा और इलैक्ट्रोनिक्स जैसी शाखाओं में बढ़ती विविधता से अब साइंस ही एक अकेला विकल्प नहीं रह गया है।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय के 2013 के आंकड़ों के अनुसार बीए कोर्स में 75.1 लाख छात्र, कॉमर्स में 28.9 लाख छात्र, बीटेक में 17.9 लाख, बीई में 16.4 लाख और बीएससी में 25.4 लाख छात्रों ने दाखिला लिया था।

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दाखिले के लिए मिल रहा मुफ्त लैपटॉप और बाइक

अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के कड़े मानदंडों के चलते प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज अब छात्रों को एडमिशन लेने के लिए कई तरह के लुभावने ऑफर दे रहे हैं। कुछ कॉलेज तो छात्रों से महज 2,500 रुपये सालाना फीस लेकर दाखिला दे रहे हैं। वहीं कुछ प्राइवेट कॉलेज मुफ्त लैपटॉप और दोपहिया वाहनों की भी पेशकश कर रहे हैं।

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