अभिजीत गंगोपाध्याय: शिक्षक घोटाले की सीबीआई जांच के आदेश से निशाने पर आए, अब भाजपा के टिकट पर सियासी मैदान में
जस्टिस गंगोपाध्याय ने सबसे अहम फैसला स्कूल सेवा आयोग शिक्षक भर्ती घोटाले के मामले में ही दिया। अप्रैल, 2022 में इस मामले में सीबीआई की जांच का आदेश देने के बाद सितंबर, 2022 में गलत तरीके से भर्ती किए गए 907 शिक्षकों को पद से हटाने का आदेश दिया।
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अप्रैल, 2022 में तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय को चैंबर से बाहर निकलने से रोक दिया। पीठ के बहिष्कार का भी एलान कर दिया। वजह थी, शिक्षक भर्ती घोटाले में प. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खास पार्थ चटर्जी को कोर्ट में हाजिर होने का आदेश देना और जांच सीबीआई को सौंपना।
इस वाकये के बाद से ही जस्टिस गंगोपाध्याय और तृणमूल कांग्रेस के बीच रस्साकशी शुरू हो गई। जस्टिस गंगोपाध्याय पर शिक्षक भर्ती घोटाले में अति सक्रियता के भी आरोप लगे। उन्होंने अपनी सफाई में एक टीवी चैनल को करीब एक घंटे का साक्षात्कार दिया। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें हिदायत देते हुए कहा कि सेवारत न्यायाधीशों को ऐसे साक्षात्कार से बचना चाहिए। आखिर में एक छोर से हो रहे सियासी हमलों से तंग आकर जस्टिस गंगोपाध्याय ने सियासत में उतरने का फैसला किया। वे नौ मार्च को भाजपा में शामिल हुए। पार्टी ने तामलुक क्षेत्र से प्रत्याशी घोषित कर दिया।
20 अगस्त, 1962 को कोलकाता में जन्मे अभिजीत गंगोपाध्याय ने हाजरा लॉ कॉलेज में कानूनी शिक्षा हासिल की थी। मई 2018 में कोलकाता हाईकोर्ट के अतिरिक्त जज, जुलाई 2020 में स्थायी जज बने। बतौर भाजपा नेता अभिजीत गंगोपाध्याय का दावा है कि 2026 में बंगाल से तृणमूल खत्म हो जाएगी। तृणमूल का किला भ्रष्टाचार के स्तंभों पर टिका है। चंद भ्रष्ट लोगों की गिरफ्तारी की देर है, इसके बाद तृणमूल भरभरा कर गिर जाएगी।
फैसला जिसने राजनीति की राह खोली
जस्टिस गंगोपाध्याय ने सबसे अहम फैसला स्कूल सेवा आयोग शिक्षक भर्ती घोटाले के मामले में ही दिया। अप्रैल, 2022 में इस मामले में सीबीआई की जांच का आदेश देने के बाद सितंबर, 2022 में गलत तरीके से भर्ती किए गए 907 शिक्षकों को पद से हटाने का आदेश दिया। जुलाई, 2023 में उन्होंने आदेश दिया कि अवैध तरीके से भर्ती किए गए इन शिक्षकों के नाम सार्वजनिक रूप से प्रकाशित किए जाएं। जस्टिस गंगोपाध्याय के आदेशों की वजह से इस मामले में पार्थ चर्टर्जी और तीन वरिष्ठ तृणमूल विधायकों को जेल जाना पड़ा। इसी मामले के बाद उन्होंने सियासत में उतरने का फैसला किया।
गोडसे-गांधी को लेकर विवादों में घिरे गंगोपाध्याय
गंगोपाध्याय ने एक साक्षात्कार में कहा कि कानून पेशेवर होने के नाते वे गोडसे और गांधी में किसी एक को चुनने का फैसला तब तक नहीं कर सकते, जब तक दोनों पक्षों की पूरी कहानी न सुन लें। वे गांधी की हत्या की निंदा करते हैं, लेकिन इस हत्या के पीछे गोडसे के मकसद को भी समझना चाहेंगे। वे गोडसे को पढ़कर जानना चाहेंगे कि आखिर उन्होंने गांधी की हत्या क्यों की थी। ऐतिहासिक घटनाओं के पहलुओं की जांच जरूरी है।