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AAP: क्या खत्म हो जाएगी केजरीवाल की राजनीति? पार्टी को बचाने की ये रणनीति अपना रही 'आप'

Mon, 11 Dec 2023 01:02 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Mon, 11 Dec 2023 01:02 PM IST
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सार
केजरीवाल की चिंता है कि यदि उन्हें गिरफ्तार किया जाता है, तो आम आदमी पार्टी कैसे चलेगी? ऐसी स्थिति में दिल्ली सरकार को कैसे संचालित किया जाए, जिससे आम आदमी पार्टी और स्वयं उनकी छवि खराब न हो। आगामी चुनावों में पार्टी की पूरी संभावना अरविंद केजरीवाल की विश्वसनीयता पर टिकी हुई है...
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AAP: Will arvind Kejriwal politics end? AAP is adopting this strategy to save the party
AAP: Arvind Kejriwal - फोटो : Amar Ujala/Rahul Bisht

विस्तार

जिस समय भाजपा 2024 की तैयारियों में लगी हुई है, कांग्रेस सहित समूचा विपक्ष लोकसभा चुनाव में मोदी को चुनौती देने की रणनीति बनाने में जुटा है, आम आदमी पार्टी दिल्ली में एक अभियान चलाकर लोगों से यह पूछ रही है कि यदि अरविंद केजरीवाल को शराब घोटाले में गिरफ्तार किया जाता है, तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए या नहीं। वह यह भी पूछ रही है कि क्या अरविंद केजरीवाल को जेल से सरकार चलानी चाहिए।

इसे केजरीवाल की उस रणनीति की तरह देखा जा रहा है, जिसमें वे अपनी संभावित गिरफ्तारी के बाद भी जेल से सरकार चलाते रहने की स्वीकार्यता चाहते हैं। आम आदमी पार्टी की इस पूरी कोशिश का परिणाम क्या निकलेगा? चूंकि आम आदमी पार्टी की पूरी राजनीति केजरीवाल के इर्द-गिर्द ही चलती है, प्रश्न यह भी है कि क्या केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद आम आदमी पार्टी की राजनीति खत्म हो जाएगी?

पूछताछ से बचना अब संभव नहीं

आम आदमी पार्टी के इस अभियान से एक बात तो साफ हो जाती है कि खुद अरविंद केजरीवाल को भी इस बात का विश्वास हो गया है कि उन्हें देर-सबेर गिरफ्तार किया जा सकता है। अब तक वे प्रवर्तन निदेशालय को यह कहकर जांच में शामिल होने से बचते रहे थे कि उन्हें मध्यप्रदेश सहित अन्य चुनावी राज्यों में चुनाव प्रचार के लिए जाना है, लिहाजा उनके पास एजेंसी के सामने पेश होने का समय नहीं है। लेकिन इन प्रदेशों में चुनाव समाप्त होने के बाद अब उनके पास ऐसा कोई कारण नहीं बचा है। लिहाजा, अब यदि उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया जाता है, तो उन्हें एजेंसी के सामने पेश होना पड़ेगा। मनीष सिसोदिया और संजय सिंह के ट्रेंड को देखते हुए माना जा रहा है कि दो-चार बार पूछताछ के लिए बुलाने के बाद उन्हें कभी भी हिरासत में लिया जा सकता है।

कैसे चले सरकार

केजरीवाल की चिंता है कि यदि उन्हें गिरफ्तार किया जाता है, तो आम आदमी पार्टी कैसे चलेगी? ऐसी स्थिति में दिल्ली सरकार को कैसे संचालित किया जाए, जिससे आम आदमी पार्टी और स्वयं उनकी छवि खराब न हो। आगामी चुनावों में पार्टी की पूरी संभावना अरविंद केजरीवाल की विश्वसनीयता पर टिकी हुई है। ऐसे में पार्टी ने 'ब्रांड केजरीवाल' को बचाने की रणनीति अपनानी शुरू कर दी है। 'मैं हूं केजरीवाल' अभियान इसी रणनीति के एक अंग के रूप में देखा जा रहा है।

आप ने पुरजोर तरीके से पंजाब में दिल्ली की सभी योजनाओं को लागू करना शुरू कर दिया है। अरविंद केजरीवाल भगवंत मान के साथ मिलकर मुफ्त राशन योजना, घर-घर राशन डिलीवरी, योजनाओं का ऑनलाइन लाभ दिलाकर भ्रष्टाचार समाप्त करने का काम लगातार किया जा रहा है। जिससे दिल्ली में पार्टी की संभावनाओं को कोई झटका लगने पर पंजाब के रूप में उसके पास लोगों को बताने के लिए एक सफल मॉडल रहे और उसे दिखाकर वह लोगों से वोट मांग सके। लेकिन पार्टी की यह रणनीति आम आदमी पार्टी को बचाने में कितनी सफल रहेगी?      

गहरी चोट, उबरना आसान नहीं

राजनीतिक विश्लेषक संजय रतन श्रीवास्तव ने अमर उजाला से कहा कि इस देश में लालू प्रसाद यादव, जयललिता और ओम प्रकाश चौटाला जैसे अनेक नेता रहे हैं जिन्हें भ्रष्टाचार के मामले में जेल जाना पड़ा है। लेकिन इसके बाद भी उनकी राजनीतिक पार्टियां न केवल बची हुई हैं, बल्कि पूरी मजबूती के साथ अपने-अपने क्षेत्रों में राजनीति कर रही हैं। इसलिए केवल भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण किसी राजनीतिक दल के समाप्त होने की बात जमीनी नहीं लगती।

लेकिन बड़ी बात यह है कि इन राजनीतिक दलों के पास अपना जातीय या एक वर्ग विशेष का वोट था, जो बड़े नेताओं के भ्रष्टाचार में आरोप साबित होने के बाद भी पूरी मजबूती के साथ उनके साथ खड़ा रहा। यह भारतीय लोकतंत्र की बड़ी खामी है, लेकिन सच्चाई यही है कि भ्रष्टाचार साबित होने के बाद भी यहां लोग अपने नेता के साथ खड़े दिखे हैं। लेकिन आम आदमी पार्टी की सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि अरविंद केजरीवाल के पास ऐसा कोई जातीय आधार नहीं है, जो उनके भ्रष्टाचार में शामिल सिद्ध होने के बाद भी उनके साथ खड़ा रहे। इससे आम आदमी पार्टी की मुश्किलें दूसरे दलों से अलग हैं।

केजरीवाल की सबसे बड़ी चिंता

केजरीवाल ने जिस वोट बैंक को हथियाकर अपनी राजनीति खड़ी की थी, वह परंपरागत तौर पर कांग्रेस का वोट बैंक था। मुसलमान, दलित और पिछड़ा वर्ग कांग्रेस पर भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद दिल्ली-पंजाब में केजरीवाल के साथ आ गया था। लेकिन अब अरविंदर सिंह लवली के नेतृत्व में कांग्रेस तेजी से दिल्ली में अपने उस वोट बैंक को वापस पाने की कोशिशों में जुटी हुई है।
पिछले लोकसभा चुनाव में जिस तरह मुस्लिमों ने कांग्रेस को एकजुट होकर साथ दिया और कांग्रेस हर लोकसभा सीट पर दूसरे स्थान पर रही और आम आदमी पार्टी को तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा। यह बात मानी जा सकती है कि यदि अरविंद केजरीवाल थोड़ा भी कमजोर हुए, तो यह पूरा गैर भाजपाई वोट बैंक खिसककर कांग्रेस के पास वापस जा सकता है। केजरीवाल की सबसे बड़ी चिंता यही है। क्योंकि वे भी जानते हैं कि एक बार इस वोट बैंक के कांग्रेस के पास वापस जाने के बाद उसे वापस लाना बेहद कठिन होगा।

अपने कार्यकर्ताओं को भ्रष्टाचार की ट्रेनिंग दे रहे केजरीवाल- भाजपा

दिल्ली भाजपा के उपाध्यक्ष विष्णु मित्तल ने अमर उजाला से कहा कि केजरीवाल की पूरी राजनीति ईमानदारी और अलग राजनीतिक के दावे पर टिकी हुई थी। लेकिन शराब घोटाले में आरोपी पाए जाने के बाद आम आदमी पार्टी की ईमानदार वाली छवि खत्म हो गई है। जनता ने देख लिया है कि किस तरह गली-गली में शराब की दुकानें खोलकर बच्चों तक के पास शराब पहुंचाने का काम किया गया। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल अपने कार्यकर्ताओं को संजय सिंह और मनीष सिसोदिया से सीख लेने की बात कह रहे हैं, जो स्वयं भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल में बंद हैं। इससे साबित होता है कि अरविंद केजरीवाल अपने कार्यकर्ताओं को भ्रष्टाचार करने की ट्रेनिंग दे रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल के अलावा आम आदमी पार्टी में कोई दूसरा नेता नहीं है। जनता ने भी उनकी असलियत देख ली है।  उनके जेल जाने के बाद पार्टी को बड़े चेहरे की कमी खलेगी और उसे चुनावी अभियान को आगे बढ़ाने में मुश्किल आएगी। उन्होंने कहा कि यह चुनाव अरविंद केजरीवाल की सियासत का अंतिम चुनाव होगा क्योंकि जनता इसके बाद अब उन्हें चुनाव लड़ने के काबिल नहीं छोड़ेगी। 

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