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AAP: राघव चड्ढा ने बताया कैसे होगा पराली की समस्या का समाधान
Tue, 03 Dec 2024 04:21 PM IST
राहुल कुमार
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Tue, 03 Dec 2024 04:21 PM IST
सार
Raghav Chadha: राघव चड्ढा ने कहा कि वायु प्रदूषण के कारणों में पराली जलाना इसका इकलौता कारण नहीं है। आईआईटी के एक अध्ययन से यह स्पष्ट हुआ है कि वायु प्रदूषण के सभी कारणों में पराली जलाना एक कारण है, एकमात्र कारण नहीं।
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राघव चड्ढा
- फोटो : twitter @raghav_chadha
विस्तार
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पराली की समस्या का समाधान बताया है। उन्होंने मंगलवार को संसद में कहा कि यदि पंजाब और हरियाणा के किसानों को प्रति एकड़ ₹2500 का आर्थिक योगदान दिया जाए तो किसान पराली जलाना बंद कर देंगे और इससे दिल्ली में होने वाले वायु प्रदूषण की एक बड़ी समस्या का समाधान हो जाएगा।
राघव चड्ढा ने कहा कि वायु प्रदूषण के कारणों में पराली जलाना इसका इकलौता कारण नहीं है। आईआईटी के एक अध्ययन से यह स्पष्ट हुआ है कि वायु प्रदूषण के सभी कारणों में पराली जलाना एक कारण है, एकमात्र कारण नहीं। उन्होंने कहा कि किसानों को मजबूरी में पराली जलाना पड़ता है। उन्हें धान की फसल के बाद जल्द से जल्द 10-15 दिनों के अंदर दूसरी फसल के लिए खेत को साफ करना पड़ता है। मशीनों से पराली को हटाने पर प्रति एकड़ दो से ₹3000 का खर्च आता है। पहले ही आर्थिक दबाव में गुजर रहा किसान यह लागत नहीं खर्च कर पाता है। यही कारण है कि किसान पराली जलाने पर मजबूर होता है।
उन्होंने कहा कि इसके बदले में यदि पंजाब और हरियाणा के किसानों को ₹2500 प्रति एकड़ की दर से आर्थिक मुआवजा दे दिया जाए तो किसान पराली जलाना बंद कर देगा और इससे दिल्ली के वायु प्रदूषण की एक बड़ी समस्या का समाधान हो सकता है। राघव चड्ढा ने कहा कि पंजाब को इस समस्या से बचाने के लिए फसल विविधता पर भी ध्यान देना होगा, लेकिन यह लंबी अवधि का सुझाव हो सकता है। लेकिन तात्कालिक रूप से पराली जलाने से रोकने के लिए किसानों को मुआवजा देना अच्छा विकल्प हो सकता है।
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राघव चड्ढा ने कहा कि वायु प्रदूषण के कारणों में पराली जलाना इसका इकलौता कारण नहीं है। आईआईटी के एक अध्ययन से यह स्पष्ट हुआ है कि वायु प्रदूषण के सभी कारणों में पराली जलाना एक कारण है, एकमात्र कारण नहीं। उन्होंने कहा कि किसानों को मजबूरी में पराली जलाना पड़ता है। उन्हें धान की फसल के बाद जल्द से जल्द 10-15 दिनों के अंदर दूसरी फसल के लिए खेत को साफ करना पड़ता है। मशीनों से पराली को हटाने पर प्रति एकड़ दो से ₹3000 का खर्च आता है। पहले ही आर्थिक दबाव में गुजर रहा किसान यह लागत नहीं खर्च कर पाता है। यही कारण है कि किसान पराली जलाने पर मजबूर होता है।
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उन्होंने कहा कि इसके बदले में यदि पंजाब और हरियाणा के किसानों को ₹2500 प्रति एकड़ की दर से आर्थिक मुआवजा दे दिया जाए तो किसान पराली जलाना बंद कर देगा और इससे दिल्ली के वायु प्रदूषण की एक बड़ी समस्या का समाधान हो सकता है। राघव चड्ढा ने कहा कि पंजाब को इस समस्या से बचाने के लिए फसल विविधता पर भी ध्यान देना होगा, लेकिन यह लंबी अवधि का सुझाव हो सकता है। लेकिन तात्कालिक रूप से पराली जलाने से रोकने के लिए किसानों को मुआवजा देना अच्छा विकल्प हो सकता है।
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