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सवाल: कब और कैसे देश में सफेद मक्खियों ने दी दस्तक, जानिए किस तरह की खेती पर पड़ा बुरा असर

Sun, 23 May 2021 08:39 AM IST
Tanuja Yadav न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Tanuja Yadav Updated Sun, 23 May 2021 08:39 AM IST
सार

देश में सफेद मक्खियों के आक्रमण को समझने के लिए एक ताजा शोध किया गया है। ये शोध बताता है कि ये सफेद मक्खियां भारत कैसे पहुंची और यहां पहुंचकर किस तरह की खेती को प्रभावित कर रही हैं। 

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a team tell about that how and from where whitefly come and saw and conquer country crop
खेती (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Flickr

विस्तार

साल 1995 में केरल में पहली बार आक्रामक सफेद मक्खी का मामला सामने आया था लेकिन अब ये पूरे देश में फैल चुका है। वहीं एक ताजा शोध ने इन कीट से होने वाले नुकसान का विवरण जारी किया है। सफेद मक्खियों के इन आक्रमण के पैटर्न को समझने के लिए देश भर में साल 2015-2020 तक अध्ययन किए गए। 

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शोध करने वाली इस टीम ने लक्षद्वीप समेत देश के हर राज्य के 5-12 जिलों और इन जिलों के 5-10 स्थानों का दौरा किया। टीम ने हर बुजुर्ग सफेद मक्खी के अंदर से जीनोमिक निकाला और भारत में पाई जाने वाली आठ आक्रामक प्रजातियों के बारे में विस्तार से बताया।
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आईसीएफआरई इंस्टीट्यूट ऑफ वुड साइंस और टेक्नोलॉजी के फॉरेस्ट प्रोटेक्शन डिविजन से ताल्लुक रखने वाले आर सुंदरराज ने बताया कि इनमें से अधिकाशं प्रजातियां कैरिबियाई द्वीपों या मध्य अमेरिका या दोनों की मूल निवासी हैं। उन्होंने आगे कहा कि ये बताना मुश्किल है कि ये प्रजातियां हमारे देश में कैसे प्रवेश हुईं। ऐसा हो सकता है कि किसी आयातित पौधे के जरिए ये कीट भारत में प्रवेश किए हो। 
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इसके अलावा वैश्विकरण के चलते, ये भी संभव है कि विदेशी यात्रियों की ओर से साथ लाने वाले पौधों के जरिए ये कीट हमारे देश में आ गए हों। उन्होंने कहा कि इसे रोकने के लिए हमें सबसे पहले यात्रियों को इसके प्रति जागरुक करना होगा। टीम ने अपने शोध में बताया कि पहली आक्रामण सफेद मक्खी एलेउरोडिक्स डिस्पर्सस जम्मू-कश्मीर को छोड़कर पूरे भारत में फैल चुकी है। 

इसी के साथ रगोज स्पाइरैलिंग सफेद मक्खी साल 2016 में तमिलनाडु में सबसे पहली देखी गई थी, जो अब पूरे देश में फैल गई है। हाल ही में जारी की गई एक रिपोर्ट के मुताबिक, नारियल और ताड़ के तेल की खेती का लगभग 1.35 लाख हेक्टेयर हिस्सा इन सफेद मक्खी की वजह से प्रभावित हुआ है। 


इसके अलावा इन सफेद मक्खियों ने केला, आम, सपोटा, अमरूद, काजू, सजावटी पौधों पर ही अपना प्रभाव डाला है। शोध के पेपर लिखने वाले एक और लेखर सेलवराज कृष्णन का कहना है कि सिंथेटिक कीटनाशकों का इस्तेमाल करके सफेद मक्खियों को नियंत्रित करना मुश्किल है। इसलिए मौजूदा समय में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले कीट परभक्षी, पैरासिटोइड्स और एंटोमोपैथोजेनिक का इस्तेमाल किया जा हा है। 

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