सरोगेसी के दुरुपयोग रोकने और निसंतान को संतान का सुख दिलाने वाला विधेयक पेश
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देश में व्यावसायिक मकसद के लिए किराये की कोख (सरोगेसी) के इस्तेमाल पर रोक लगाने, सरोगेसी के दुरुपयोग को रोकने और निसंतान दंपतियों को संतान का सुख दिलाना सुनिश्चित करने के लिए सरोगेसी विनियमन विधेयक 2019 सोमवार को लोकसभा में पेश किया गया।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न देशों के दंपतियों के लिए किराये की कोख के केंद्र के रूप में उभरा है।
अनैतिक व्यवहार, सरोगेट माताओं का शोषण, मानव भ्रूण के आयात जैसी घटनाएं बढ़ी हैं। विधि आयोग ने भी अपनी रिपोर्ट में वाणिज्यिक सरोगेसी का निषेध करने की सिफारिश की है। ऐसे में यह विधेयक राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर सरोगेसी बोर्डों के गठन की व्यवस्था करता है।
सरोगेसी के यह नियम जोड़े जाएंगे
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि विधेयक में सरोगेसी को लेकर कुछ नियम जोड़े जाएंगे। इसमें सरोगेसी से बच्चा चाहने वाले दंपति को कम से कम पांच साल से विधिपूर्वक विवाहित होना होगा। साथ ही इनका भारतीय नागरिक होना जरूरी है।
सरोगेट माता आशय वाले दंपति की निकट नातेदार होनी चाहिए और वह पहले से विवाहित होनी चाहिए जिसका स्वयं बच्चा हो।
साथ ही इसमें ऐसी व्यवस्था की गई है कि कोई व्यक्ति संगठन सरोगेसी क्लीनिक प्रयोगशाला व्यावसायिक सरोगेसी के संबंध में विज्ञापन नहीं दे सकता और भ्रूण का निर्यात करना अपराध होगा।