एक ऐसा शख्स जो बिना चुनाव लड़े हैं तीन बार से विधायक
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'माफिया नहीं अच्छे लोग हैं वो'
पुराने लखनऊ के मॉडल हाउस इलाके में पीटर फैंथम का विद्यालय और घर है। सुबह करीब नौ बजे विद्यालय पहुंचने पर पीटर फैंथम से मुलाकात हुई तो उन्होंने विधानसभा में अपने कई अनुभव शेयर किए। मसलन, 1997 में विधानसभा में हुई मार-पीट वाली घटना से लेकर 'माफिया' कहे जाने वाले कुछ विधायकों के साथ अच्छे संबंधों तक। उनका कहना था कि ये लोग 'माफिया' नहीं बल्कि बहुत अच्छे लोग हैं, इनके बारे में 'गलत' बातें प्रचारित की जाती हैं।
'विधानसभा में कभी नजर नहीं आए पीटर'
पीटर फैंथम सदन में उठा चुके हैं सवाल
मनोनीत सदस्यों को क्या महत्व है?
जानकारों के मुताबिक ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि आजादी के बाद अंग्रेज तो भारत से चले गए लेकिन अंग्रेज पुरुषों और भारतीय महिलाओं की संतानें ज्यादातर यहीं रह गईं थीं जिन्हें एंग्लो-इंडियन कहा जाता है। चूंकि इस समुदाय के लोगों की देश भर में जनसंख्या महज पांच लाख के आस-पास थी और इसके आधार पर इनका कहीं से निर्वाचित होना संभव नहीं था, इसलिए इनके मनोनयन का प्रावधान किया गया ताकि इस समुदाय का प्रतिनिधित्व कायम रहे। लेकिन लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार योगेश मिश्र कहते हैं, "न तो मनोनीत सदस्य सदन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं और न ही उनका कोई महत्व है, सिर्फ प्रतीकात्मक तौर पर आजादी के साठ साल बाद भी गुलामी की एक परंपरा कायम है।" संविधानविद सुभाष कश्यप कहते हैं, " ये राज्यों के ऊपर है, किसी तरह की बाध्यता नहीं है। राज्यपाल को यदि लगता है कि एंग्लो इंडियंस का प्रतिनिधित्व पर्याप्त नहीं है, तभी मनोनीत कर सकते हैं। राज्य यदि चाहें तो प्रस्ताव पारित करके व्यवस्था को खत्म भी कर सकते हैं क्योंकि ये आरक्षण है और इसे अनंत काल तक के लिए नहीं दिया जा सकता।" बहरहाल, जानकारों का कहना है कि ये संवैधानिक व्यवस्था है और जब तक संविधान इसकी इजाजत देगा तब तक एंग्लो इंडियन सदस्य विधान सभाओं में मनोनीत होंगे। लेकिन कई बार आरोप ये भी लगते हैं कि मनोनीत विधायक सदन में उपस्थित नहीं होते हैं, बहस-मुबाहिसे में किसी स्तर पर उनकी भूमिका नहीं होती है और सिर्फ प्रतीकात्मक रूप में इस व्यवस्था को कायम रखा गया है। जहां तक पीटर फैंथम का सवाल है तो वो तीन बार से विधायक मनोनीत हो रहे हैं। जब मैंने उनसे सवाल किया कि क्या इसके लिए उनके समुदाय का कोई और व्यक्ति राजनीतिक दलों को नहीं मिलता है, तो उन्होंने हँसकर जवाब दिया, "मिलता होगा, लेकिन शायद लखनऊ में होने का फायदा मिलता हो।"