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अदालत ने मनी लॉन्ड्रिंग को बताया देश की एकता और वित्तीय व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा
Fri, 20 Sep 2019 05:30 PM IST
Gaurav Pandey
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Gaurav Pandey
Updated Fri, 20 Sep 2019 05:30 PM IST
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दिल्ली की एक अदालत ने कहा कि धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) न सिर्फ वित्तीय व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है, बल्कि देश की एकता और अखंडता के लिए भी खतरा है। इसके साथ ही अदालत ने एक व्यक्ति को बाघ के अंगों की तस्करी के जुर्म में चार साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
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विशेष न्यायाधीश संतोष स्नेही मान ने सूरजभान को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम की धारा तीन और चार के तहत मनी लॉन्ड्रिंग करने के लिए सजा सुनाई और 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया। बाघ के अंगों की तस्करी के आरोप में सात सितंबर 2013 को सूरजपाल, सूरजभान और नरेश को गिरफ्तार किया गया था। इन पर वन्यजीव संरक्षण कानून और मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया था।
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सूरजभान ने कबूल किया कि उसे बाघ के अंगों को खरीदने के लिए सूरजपाल से रुपये मिले थे। सुनवाई के दौरान सूरजपाल की मौत हो गई, जबकि नरेश को अदालत ने छोड़ दिया। मुकदमे के अनुसार सूरजपाल ने सूरजभान को बाघ के दो कंकाल लाने के लिए छह लाख रुपये दिए, जिसमें 50,000 से 60,000 रुपये उसे बतौर कमीशन मिलने थे।
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अदालत ने कहा, 'सूरजभान ने अपने बयान में माना कि उसकी कार से मिले 2.7 लाख रुपये, उस छह लाख रुपये का हिस्सा थे, जो उसे सूरजपाल ने बाघ के अंग खरीदने के लिए दिए थे।' हालांकि कोर्ट ने सूरजभान को उसकी बेहद कमजोर आर्थिक परिस्थिति को देखते हुए रिहा कर दिया। अदालत ने कहा कि चूंकि दोषी को जितनी सजा मिली है, उससे अधिक समय वह जेल में बिता चुका है, इसलिए सूरजभान को रिहा किया जाता है। हालांकि रिहा होने से पहले उसे जुर्माना जमा कराना होगा।
अदालत ने कहा, 'धनशोधन न सिर्फ वित्तीय व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है, बल्कि देश की एकता और अखंडता के लिए भी खतरा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की पहल के अनुसार ही धनशोधन रोकथाम अधिनियम को लागू किया गया है, ताकि अपराध के चलते उपजे धनशोधन की चुनौतियों का मुकाबला किया जा सके।'