फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   91 percent glaciers in Svalbard archipelago Arctic region have shrunk significantly

चिंताजनक: आर्कटिक क्षेत्र के स्वालबार्ड में 91% ग्लेशियर सिकुड़े, तेजी से गर्म होने वाली जगहों से गायब हो रहे

Sat, 18 Jan 2025 06:24 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sat, 18 Jan 2025 06:24 AM IST
सार

ग्लेशियोलॉजी सेंटर के शोधकर्ताओं के अनुसार 1985 के बाद से इस नॉर्वेजियन द्वीप समूह में ग्लेशियर के किनारों पर 800 वर्ग किलोमीटर से अधिक इलाके का नुकसान हुआ है। आधे से अधिक यानी 62 फीसदी ग्लेशियर टूटने के मौसमी चक्र से गुजरते हैं। 
 

विज्ञापन
91 percent glaciers in Svalbard archipelago Arctic region have shrunk significantly
ग्लेशियर (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला/एजेंसी

विस्तार

आर्कटिक क्षेत्र में स्वालबार्ड द्वीपसमूह के लगभग 91 फीसदी ग्लेशियर काफी हद तक सिकुड़ गए हैं। पिछले 40 सालों में सबसे अधिक तापमान वाली जगहों में ग्लेशियर गायब हो रहे हैं। सबसे ज्यादा ग्लेशियर गायब होने की घटनाएं हाल के वर्षों में देखी गई हैं। यह जानकारी ब्रिस्टल विश्वविद्यालय के एक शोध में सामने आई है। इसके निष्कर्ष नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित हुए हैं।

विज्ञापन


ग्लेशियोलॉजी सेंटर के शोधकर्ताओं के अनुसार 1985 के बाद से इस नॉर्वेजियन द्वीप समूह में ग्लेशियर के किनारों पर 800 वर्ग किलोमीटर से अधिक इलाके का नुकसान हुआ है। आधे से अधिक यानी 62 फीसदी ग्लेशियर टूटने के मौसमी चक्र से गुजरते हैं। यह तब और अधिक बढ़ जाता है जब महासागर और हवा के बढ़ते तापमान के कारण बर्फ के बड़े टुकड़े टूट जाते हैं। पिछले कुछ दशकों में ग्लेशियरों के पीछे खिसकने का पैमाना तेजी से बढ़ा है। यह लगभग पूरे स्वालबार्ड को कवर करता है। यह ग्लेशियरों की जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशीलता को सामने लाता है।
विज्ञापन


खतरे की चेतावनी है स्वालबार्ड
दरअसल, दुनिया के सबसे उत्तरी क्षेत्र नॉर्वे के सुदूर आर्कटिक द्वीप स्वालबार्ड को जलवायु परिवर्तन की कोयला खदान में कैनरी (20वीं सदी में, कैनरी पक्षी कोयला खनन उद्योग का मुख्य हिस्सा थीं। खदान में कैनरी के गिरने से श्रमिकों को पता चल जाता था कि वहां जहरीली गैस है। इससे उन्हें वहां से निकलने की चेतावनी मिल जाती थी) कहा गया है। यहां आर्कटिक के अन्य क्षेत्रों की तुलना में दो गुना अधिक तेजी से और शेष पृथ्वी की तुलना में पांच से सात गुना अधिक तेजी से तापमान बढ़ रहा है। इस गर्मी के कारण स्वालबार्ड जलवायु शोधकर्ताओं को आर्कटिक के शेष भाग में आने वाले परिवर्तनों के बारे में एक शुरुआती जानकारी प्रदान करता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


पैटर्न को जल्दी से पहचानने के लिए एआई का इस्तेमाल
शोध टीम ने बड़े इलाकों में ग्लेशियर पिघलने के पैटर्न को जल्दी से पहचानने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल किया है। एक नए एआई मॉडल का उपयोग करते हुए पूरे स्वालबार्ड में ग्लेशियरों की अंतिम स्थिति को रिकॉर्ड करने वाली लाखों उपग्रह तस्वीरों का विश्लेषण किया। विश्लेषण के निष्कर्ष से कुछ नए तथ्य सामने आए जो क्षेत्र में ग्लेशियर के नुकसान के पैमाने और प्रकृति के बारे में अभूतपूर्व जानकारी देते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed