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संसद हमले की बरसी पर अर्धसैनिक बलों के 8 लाख रिटायर्ड कर्मी परिवार सहित करेंगे हुंकार रैली
डिजिटल ब्यूरो , अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 01 Oct 2018 08:24 PM IST
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देशभर में अर्धसैनिक बलों के करीब आठ लाख से ज्यादा सेवानिवृत कर्मी 13 दिसंबर को संसद हमले की बरसी के दिन संसद मार्ग पर हुंकार रैली आयोजित करेंगे। कन्फेडरेशन ऑफ एक्स-पेरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन ने दावा किया है कि इस रैली में सेवानिवृत कर्मियों के परिजन भी हिस्सा लेंगे। एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि 13 दिसंबर को सीआरपीएफ के जांबाजों ने भारतीय संसद को पाक आतंकी हमले से बचाया था। यही वजह है कि अर्धसैनिक बलों के सेवानिवृत कर्मियों ने हुंकार रैली के लिए संसद हमले की बरसी वाला दिन चुना है। रैली के दौरान यह फैसला भी लिया जाएगा कि आगामी लोकसभा चुनाव में सेवानिवृत कर्मचारी किस पार्टी के पक्ष में मतदान करेंगे।
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देश के लिए जान देने वाले अर्धसैनिक बलों के जवानों को भी सेना की तर्ज पर शहीद का दर्जा दिलाने और उनकी दूसरी मांगों के लिए अर्धसैनिक बलों के सेवानिवृत्त कर्मियों ने 28 से 30 सितंबर तक संसद मार्ग पर 72 घंटे की भूख हडताल की है। सोमवार को एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह ने कहा, केंद्र सरकार हमारी मांगों की ओर कोई ध्यान नहीं दे रही है। एसोसिएशन की मुख्य मांगों में सेना की तरह अर्धसैनिक बलों को वन रैंक वन-पैंशन देना, 2004 के बाद जवानों की बंद पेंशन दोबारा शुरू करना, पचास प्रतिशत जीएसटी फ्री सीपीसी कैंटीन, हर जिले में सीजीएचएस डिस्पेंसरी की स्थापना और सभी राज्यों में अर्धसैनिक कल्याण बोर्ड की स्थापना, आदि शामिल हैं।
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कश्मीर व नक्सल क्षेत्र में अर्धसैनिक बल के जवान शहीद होते रहते हैं। दुख की बात है कि अभी तक इन्हें शहीद का दर्जा नहीं मिल सका। एक तरफ तो सरकार इन बलों के जवानों को शौर्य चक्र और कीर्ति चक्र जैसा सम्मान प्रदान करती है तो दूसरी ओर उन्हें सातवें वेतन आयोग में सिविलियन का दर्जा दे दिया जाता है। 16 से 18 घंटे की ड्यूटी करने वाले अर्धसैनिक बल के जवानों का वेतन मात्र आठ घंटे की ड्यूटी देने वाले चपरासी के बराबर कर दिया गया है।
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सिंह के मुताबिक, 27 सितंबर 2016 को सरकार द्वारा केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवानों को सेना की तर्ज पर वेतन भत्ते व दूसरी सुविधाएं देने की घोषणा की गई थी। अर्धसैनिक बलों की सीपीसी कैंटीन पर पचास फीसदी जीएसटी की छूट देने के लिए 29 जून 2017 को केंद्रीय गृहमंत्री ने वित्त मंत्री को चिटृठी लिखी थी। सेना की कैंटीन पर पचास फीसदी जीएसटी की छूट दी गई है, लेकिन अर्धसैनिक बलों की कैंटीन को जीएसटी छूट का लाभ नहीं दिया गया। यही वजह है कि आज अर्धसैनिक बलों की कैंटीन बंद होने की कगार पर पहुँच गई हैं।
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू ने सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट आने से पहले अर्धसैनिक बलों को सर्विस-पे देने का ऐलान किया था, लेकिन अभी तक उसे अमल में नहीं लाया गया है। एसोसिएशन के महासचिव का कहना है कि आगामी लोकसभा चुनाव में जो राजनीतिक दल अर्धसैनिक बलों की मांगों को अपने चुनावी घोषणा पत्र में शामिल करेगा, वे उसका समर्थन करेंगे। बीते दिनों एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी से भी मुलाकात की थी।