विदेशी डिग्री धारक 77 फीसदी भारतीय छात्र MCI परीक्षा में फेल
- 2004 से सिर्फ दो बार ही परीक्षा में बैठने वाले 50 फीसदी से अधिक छात्र हुए पास
- विदेश से मेडिकल की डिग्री लेकर आए भारतीय नागरिकों के लिए मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की अनिवार्य जांच परीक्षा पास करना है जरूरी
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पिछले 12 साल के दौरान विदेश से मेडिकल की पढ़ाई कर लौटे औसत 77 फीसदी छात्र मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) की जांच परीक्षा पास करने में असफल रहे।
देश के बाहर के किसी मेडिकल संस्थान से ‘प्राथमिक चिकित्सकीय योग्यता’ (एमबीबीएस या इसके समकक्ष) प्राप्त करने वाला भारतीय नागरिक अगर एमसीआई में या किसी राज्य की मेडिकल काउंसिल में अस्थायी या स्थायी रूप से पंजीकरण कराना चाहता है तो उसे एमसीआई द्वारा राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड (एनबीई) के माध्यम से संचालित जांच परीक्षा उत्तीर्ण करने की जरूरत होती है।
यह जांच परीक्षा ‘फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स एग्जामिनेशन’ (एफएमजीई) कहलाती है।
एक बार केवल चार छात्र ही उत्तीर्ण हो पाए
सूचना के अधिकार के तहत एनबीई द्वारा जांच परीक्षा में बैठने वाले छात्रों के साल-दर-साल के हिसाब से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों से प्रदर्शित होता है कि 2004 से सिर्फ दो बार 50 फीसदी से अधिक छात्र पास हुए। जबकि एक बार ऐसा भी हुआ कि इस परीक्षा में सिर्फ चार छात्र ही पास हो पाए।
2005 में सबसे अधिक 76.8 फीसदी छात्र इस परीक्षा में सफल हुए। परीक्षा में शामिल हुए छात्रों की संख्या 2,851 थी और 2,192 छात्र पास हुए थे। मार्च 2008 में परीक्षा देने वाले 1,851 छात्रों में से 1,087 छात्र पास हुए और पास होने वाले छात्रों का प्रतिशत 58.7 रहा।
वर्ष 2015 में हुए परीक्षा के दो सत्रों में सिर्फ 10.4 फीसदी और 11.4 फीसदी छात्र ही पास हो सके। पिछले साल जून में 5,967 फीसदी छात्र परीक्षा में बैठे लेकिन पास होने वालों की संख्या केवल 603 थी। जबकि दिसंबर 2015 में परीक्षा देने वाले 6,407 छात्रों में से केवल 731 छात्र ही पास हो पाए।
एक अन्य आंकड़े के अनुसार, एमसीआई ने कहा कि वर्ष 2012 से 2015 के बीच उसने भारत के बाहर से ‘प्राथमिक चिकित्सकीय योग्यता’ हासिल वाले भारतीय नागरिकों को 5,583 ‘योग्यता प्रमाणपत्र’ जारी किए।