फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   77% of the children in the country are not getting nutritious food, mothers being uneducated is also affectin

चिंताजनक : देश के 77 फीसदी बच्चों को नहीं मिल रहा पोषक आहार, मांओं के अशिक्षित होने से भी पड़ रहा असर

Thu, 24 Oct 2024 05:49 AM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Thu, 24 Oct 2024 05:49 AM IST
सार

चिंताजनक: राष्ट्रीय परिवार एवं स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2019-21 (एनएफएचएस-5) के आंकड़ों का अध्ययन सामने आया है। जिसमें पाया गया है कि 2005-06 में, 87.4 फीसदी लोग विविधता से भरा भोजन नहीं खा रहे थे, हालांकि बीते कुछ सालों में इनमें मामूली सुधार आया है।

विज्ञापन
77% of the children in the country are not getting nutritious food, mothers being uneducated is also affectin
बच्चों को नहीं मिल रहा पोषक आहार - फोटो : istock

विस्तार

भारत के 6-23 महीने की उम्र के लगभग 77 फीसदी से अधिक बच्चों को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ओर से सुझाया गया पोषक आहार नहीं मिल रहा है। देश के मध्य क्षेत्र में सबसे ज्यादा बच्चे इस न्यूनतम आहार मानक को पूरा नहीं करते हैं। दरअसल, डब्ल्यूएचओ एक बच्चे के आहार की गुणवत्ता का मूल्यांकन करने के लिए न्यूनतम आहार विविधता (एमडीडी) स्कोर इस्तेमाल करने का सुझाव देता है। 
विज्ञापन


जानकारी के अनुसार इसे तब विविधतापूर्ण माना जाता है, जब इसमें मां के दूध, अंडे, फलियां, मेवे, फल और सब्जियों सहित पांच या अधिक खाद्य समूह शामिल होते हैं। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में 80 फीसदी से ज्यादा बच्चों के आहार में विविधता की कमी पाई गई। वहीं, सिक्किम और मेघालय ऐसे दो राज्य थे जहां 50 फीसदी से कम बच्चों में यह समस्या देखी गई। बता दें कि अध्ययन नेशनल मेडिकल जर्नल ऑफ इंडिया में प्रकाशित हुआ है। 
विज्ञापन


पिछले सालों में आया थोड़ा सुधार
राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान के लोगों सहित शोधकर्ताओं ने राष्ट्रीय परिवार एवं स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2019-21 (एनएफएचएस-5) के आंकड़ों का अध्ययन में पाया कि 2005-06 में, 87.4 फीसदी लोग विविधता से भरा भोजन नहीं खा रहे थे, लेकिन 14 वर्षों में इसमें मामूली सुधार आया है। अब 75% से अधिक आबादी विविधता भरा न्यूनतम आहार नहीं लेती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


मांओं का अशिक्षित होने से पड़ रहा प्रभाव
मांओं के अशिक्षित होने से भी बच्चों पर पड़ रहा असर...शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि अशिक्षित और ग्रामीण इलाकों में रहने वाली मांओं के बच्चे जो आंगनवाड़ी या एकीकृत बाल विकास सेवा (आईसीडीएस) केंद्रों पर परामर्श और स्वास्थ्य जांच के संपर्क में नहीं हैं, उनके विविधता में कमी वाला आहार लेने की संभावना अधिक है। एनीमिक होने या जन्म के वक्त कम वजन वाले बच्चों के भी विविधता वाला आहार न लेने की संभावना बढ़ जाती है।

मां के दूध और डेयरी उत्पादों की खपत में आई कमी
शोधकर्ताओं के मुताबिक, विटामिन ए से भरपूर फलों और सब्जियों की खपत में 7.3% बढ़ोतरी हुई। वहीं, फलों और सब्जियों की खपत में इसी दौरान 13% वृद्धि हुई। हालांकि, मां के दूध और डेयरी उत्पादों की खपत एनएफएचएस-3 के 87% से घटकर एनएफएचएस-5 में 85% पहुंच गई। यह 54% से घटकर 52% हो गई।


सार्वजनिक वितरण प्रणाली करें बेहतर
शोधकर्ताओं ने बच्चों के आहार में विविधता की कमी से निपटने के लिए सरकार से एक व्यापक नजरिया अपनाने की मांग की है। इसके लिए एक बेहतर सार्वजनिक वितरण प्रणाली, गहन एकीकृत बाल विकास सेवा कार्यक्रम, सोशल मीडिया का इस्तेमाल और स्थानीय प्रशासन के जरिये पोषण से जुड़े सुझाव दिए जाने की जरूरत बताई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed