मध्यप्रदेश में 75 % मतदान : कांग्रेस ने कहा बदलाव को उमड़ी जनता, भाजपा बोली मोदी के विकास पर लगी मुहर
मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में अच्छे मतदान की खबर है। चुनाव आयोग के मुताबिक शाम पांच बजे तक 75 फीसदी तक मतदान हुआ था जो शेष खराब ईवीएम वाले बूथों की गणना आने के बाद बढ़ सकता है। पिछले विधानसभा चुनाव में 72.07 फीसदी मतदान हुआ था। मध्यप्रदेश की लगभग 87 फीसदी ग्रामीण क्षेत्र वाले राज्य के लिहाज से इसे काफी अच्छा कहा जा सकता है।
तेज मतदान को कांग्रेस और भाजपा दोनों ने ही अपने पक्ष में बताने की कोशिश की है। कांग्रेस ने कहा कि यह मध्यप्रदेश में किसानों-युवाओं का सरकार के लिए गुस्सा था जो मतदान के रूप में सामने आया। वहीं भाजपा ने कहा कि यह पीएम नरेंद्र मोदी की योजनाओं के प्रति लोगों की उम्मीद थी जो और बेहतरी की उम्मीद में उन्हें मतदान केंद्रों तक खींच लाई।
कांग्रेस की प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने मध्यप्रदेश के तेज मतदान को कांग्रेस के पक्ष में जाने की बात बताते हुए कहा कि पूरे देश की तरह मध्यप्रदेश के किसी एक भी वर्ग में भाजपा और नरेन्द्र मोदी से उम्मीद नहीं बची है। मंदसौर में किसानों के ऊपर हुई गोलीबारी और छह लोगों की मौत से अन्नदाता नाराज था।
वहीं युवाओं की एक पूरी पीढ़ी व्यापम में व्याप्त भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई और उन्हें नौकरी नहीं मिली। पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमतों से किसानों के साथ-साथ घरेलू औरतों का भी बजट बिगड़ गया। उन्होंने कहा कि लोगों के इसी गुस्से को कम करने के लिए भाजपा ने राममंदिर का राग खूब अलापा, लेकिन उसकी एक भी कोशिश काम नहीं आई।
भाजपा ने कहा - पीएम मोदी के आने के बाद से बदल गए पुराने समीकरण
वहीं भाजपा ने इस तेज मतदान को अपने पक्ष में बताया है। भाजपा प्रवक्ता सुदेश वर्मा ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने देश के पुराने समीकरणों को उलट कर रख दिया है। पहले तेज मतदान को सत्ताधारी दल के खिलाफ माना जाता था लेकिन नरेंद्र मोदी के आने के बाद कई बार यह साबित हुआ है कि तेज मतदान सरकार के कामों पर जनता की मुहर के रूप में तब्दील हो गई है। अपनी बात के समर्थन में वे मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के चुनाव के आंकड़े देते हैं। दोनों दलों में किसके दावे पर जनता अपनी मुहर लगाती है, यह 11 दिसंबर को पता चलेगा जिस दिन मतगणना होगी।