फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   58 year old gets second life chance by implanting artificial heart

हार्ट फेल्योर के आखिरी चरण में पहुंच चुके 58 वर्षीय शख्स की जान कृत्रिम हृदय से बचाई

Thu, 27 Aug 2020 02:27 AM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Thu, 27 Aug 2020 02:27 AM IST
सार

- मरीज को दिल का दौरा पड़ चुका था और पहले बायपास सर्जरी भी हुई थी
- हिमोडायनामिक गड़बड़ी के कारण गंभीर स्थिति में अस्पताल लाया गया

विज्ञापन
58 year old gets second life chance by implanting artificial heart
हृदय संबंधी बीमारियां

विस्तार

हार्ट फेल्योर के आखिरी चरण में पहुंच चुके जयपुर के 58 वर्षीय मरीज को मैक्स हॉस्पिटल, साकेत में नई जिंदगी मिल गई। पोस्ट कार्डियोटोमी शॉक की शिकायत के कारण यहां लाया गया था। मरीज केसी अग्रवाल में मैकेनिकल हार्ट पंप यानी लेफ्ट-वेंट्रिकुलर असिस्ट डिवाइस (एलवीएडी) का सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण किया गया। उन्हें इससे पहले दिल का गंभीर दौरा पड़ चुका था और जयपुर के ही एक अस्पताल में कोरोनरी आर्टरी बायपास ग्राफ्टिंग (सीएबीजी) कराई गई थी। दुर्भाग्यवश पोस्ट कार्डियोटोमी शॉक की जानलेवा स्थिति में पहुंच जाने के बाद ही उन्हें मैकेनिकल सर्कुलेटरी सपोर्ट पर मैक्स हॉस्पिटल, साकेत लाया गया था।
विज्ञापन


मैक्स सुपर स्पेशियल्टी हॉस्पिटल, साकेत के मुख्य कंसल्टेंट, कार्डियक सर्जन और हार्ट ट्रांसप्लांट एंड वेंट्रिकुलर असिस्ट डिवाइस के निदेशक डॉ. केवल कृष्णन ने बताया, %मरीज को गंभीर स्थिति में भर्ती कराया गया था और अधिक से अधिक वेंटिलेटर सपोर्ट मिलने के बाद भी उनका ऑक्सीजन लेवल खतरनाक स्थिति में बहुत कम हो चुका था। लिहाजा उन्हें तत्काल वेनो-आर्टेरियल एक्सट्राकॉर्पोरियल मेंब्रेन ऑक्सीजेनेशन सपोर्ट (वी-ए ईसीएमओ) पर रखा गया। लगातार निगरानी में रखने के बाद उनका ईको शरीर की आवश्यकता के अनुरूप हो पाया। लेकिन उनकी हिमोडायनामिक्स की गंभीर स्थिति को देखते हुए ईसीएमओ का पूर्ण संचार बहाल करने के लिए सात दिन बाद ईको को हटाकर देखने की प्रक्त्रिस्या अपनाई गई। कई बार यह प्रयास विफल हो जाने के बाद डॉक्टरों की टीम ने ईसीएमओ जारी रखने का फैसला किया। हालांकि ईसीएमओ फेफड़े या हृदयगति रुक जाने की गंभीर स्थिति में ही दी जाती है।
विज्ञापन


उन्होंने बताया, चूंकि मरीज गंभीर कार्डियोजेनिक शॉक के कारण हार्ट फेल्योर के अंतिम चरण में पहुंच चुका था इसलिए उन्हें दिल का प्रत्यारोपण करने की सख्त जरूरत थी। लेकिन दिल का दान करने वाला कोई नहीं मिल रहा था इसलिए लक्ष्य-केंद्रित उपचार के तौर पर एक लेफ्ट वेंट्रिकुलर असिस्ट डिवाइस प्रत्यारोपित करने का फैसला किया गया। बिना किसी गड़बड़ी के यह प्रक्त्रिस्या पूरी हो गई जबकि वी-ए ईसीएमओ सपोर्ट को हटा लिया गया और एलवीएडी प्रत्यारोपित कर दिया गया। इस जटिल प्रक्त्रिस्या के लिए ऑपरेशन के बाद भी मरीज को आईसीयू और अस्पताल में रखे जाने की अवधि उम्मीद के अनुरूप रही और इसके बाद उन्हें सामान्य स्थिति में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
विज्ञापन
विज्ञापन


डॉक्टर कृष्णन ने बताया कि दिल की बीमारी के ज्यादातर मामले शुरुआती चरण में पकड़ में नहीं आते हैं जिस कारण हृदय की गतिविधि बिगड़ती चली जाती है और अंत में यही हार्ट फेल्योर का कारण बनता है। कई मरीजों को बार-बार दिल का दौरा पड़ता है और डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी के ऐसे मरीजों को एडवांस्ड हार्ट फेल्योर का खतरा अधिक रहता है। ऐसे मामलों में दिल का प्रत्यारोपण करने का ही विकल्प बचता है जबकि डोनर नहीं मिल पाने के कारण ऐसे 70 फीसदी मरीजों की मौत हो जाती है। ऐसे हालात में एलवीएडी उन मरीजों के लिए वरदान साबित हुआ है और इससे कई लोगों की जान बच पाई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed