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महाराष्ट्र को झकझोर देने वाले भीमा-कोरेगांव हिंसा में 5 लोग गिरफ्तार, जिग्नेश मेवानी ने उठाए सवाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 06 Jun 2018 01:22 PM IST
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रोना जैकब विल्सन
- फोटो : ANI
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पुणे के भीमा-कोरेगांव में हुई हिंसा के मामले में पुणे पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। इन सभी पर नफरत भरे भाषण देने और विवादास्पद पर्चे बांटने का आरोप है। पुणे पुलिस ने दिल्ली पुलिस की मदद से दिल्ली से मानवाधिकार कार्यकर्ता रोना जैकब विल्सन को गिरफ्तार किया है। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने रोना को दो दिनों की ट्रांजिट रिमांड पर भेज दिया है। 8 जून को उन्हें पुणे की स्थानीय अदालत में पेश किया जाएगा। इससे पहले पुलिस ने रोना के घर की तलाशी ली थी और कई दस्तावेजों और उनके लैपटॉप को जब्त कर लिया था।
इसके अलावा नागपुर से एक्टिविस्ट वकील सुरेंद्र गाडलिंग को भी केस से जुड़े होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। उन्हें उत्तर नागपुर में भीमा चौक से उनके घर से पकड़ा गया।
ऐसी ही एक अन्य कार्यवाही में पुणे पुलिस ने भरतनगर में प्रोफेसर सोमा सेन के घर में तलाशी ली। सेन एक एक्टिविस्ट हैं और आरटीएम नागपुर विश्वविद्यालय में अंग्रेजी की विभागाध्यक्ष हैं। सेन के पति तुषारकांत भट्टाचार्य को भी माओवादियों के साथ उनके कथित संबंधों के लिए कई बार गिरफ्तार किया गया था।
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पुणे पुलिस ने मुंबई, नागपुर और दिल्ली से कुल पांच लोगों को गिरफ्तार किया है।
जिग्नेश मेवानी ने इन गिरफ्तारियों पर सवाल खड़ा करते हुए इन्हें अंबेडकवादी आंदोलन पर हमला बताया है। मेवानी ने ट्वीट कर लिखा, "महाराष्ट्र पुलिस ने मुंबई में अंबेडकरवादी कार्यकर्ता और संपादक सुधीर धावले, नागपुर में वकील सुरेंद्र गाडलिंग और दिल्ली में रोना विल्सन को गिरफ्तार कर लिया है। तीनों पर यूएपीए के सख्त कानून के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है, जबकि भीमा कोरेगांव का अपराधी मनोहर भिड़े आजाद घूम रहा है।"
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इसके अलावा नागपुर से एक्टिविस्ट वकील सुरेंद्र गाडलिंग को भी केस से जुड़े होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। उन्हें उत्तर नागपुर में भीमा चौक से उनके घर से पकड़ा गया।
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ऐसी ही एक अन्य कार्यवाही में पुणे पुलिस ने भरतनगर में प्रोफेसर सोमा सेन के घर में तलाशी ली। सेन एक एक्टिविस्ट हैं और आरटीएम नागपुर विश्वविद्यालय में अंग्रेजी की विभागाध्यक्ष हैं। सेन के पति तुषारकांत भट्टाचार्य को भी माओवादियों के साथ उनके कथित संबंधों के लिए कई बार गिरफ्तार किया गया था।
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पुणे पुलिस ने मुंबई, नागपुर और दिल्ली से कुल पांच लोगों को गिरफ्तार किया है।
जिग्नेश मेवानी ने इन गिरफ्तारियों पर सवाल खड़ा करते हुए इन्हें अंबेडकवादी आंदोलन पर हमला बताया है। मेवानी ने ट्वीट कर लिखा, "महाराष्ट्र पुलिस ने मुंबई में अंबेडकरवादी कार्यकर्ता और संपादक सुधीर धावले, नागपुर में वकील सुरेंद्र गाडलिंग और दिल्ली में रोना विल्सन को गिरफ्तार कर लिया है। तीनों पर यूएपीए के सख्त कानून के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है, जबकि भीमा कोरेगांव का अपराधी मनोहर भिड़े आजाद घूम रहा है।"
Attack on Ambedkarite movement : Maharashtra police has arrested Ambedkarite activist & editor Sudhir Dhawale in Mumbai, advocate Surendra Gadling in Nagpur and Rona Wilson in Delhi. All 3 booked under draconian UAPA while Bhima Koregaon culprit Manohar Bhide roams scot free.
— Jignesh Mevani (@jigneshmevani80) 6 June 2018
क्या हुआ था भीमा-कोरेगांव में?
भीमा-कोरेगांव हिंसा
गौरतलब है कि पुणे के नजदीक एक जनवरी को भीमा-कोरेगांव युद्ध के 200 साल पूरा होने के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दो समूहों के बीच संघर्ष में एक युवक की मौत हो गई थी और चार लोग घायल हुए थे। इस हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हो जाने के बाद इसकी आंच महाराष्ट्र के 18 जिलों तक फैल गई।
भीमा-कोरेगांव में लड़ाई की 200वीं सालगिरह को शौर्य दिवस के रूप में मनाया गया जिसमें बड़ी तादाद में दलित इकट्ठा हुए थे।
इस दौरान कुछ लोगों ने भीमा-कोरेगांव विजय स्तंभ की तरफ जाने वाले लोगों की गाड़ियों पर हमला बोल दिया। इसके बाद हिंसा भड़क गई जिसमें साणसवाड़ी के राहुल पटांगले की मौत हो गई।
इस हिंसा के विरोध में दलित संगठनों ने बंद बुलाया था जिसमें मुंबई, नासिक, पुणे, ठाणे, अहमदनगर, औरंगाबाद और सोलापुर सहित राज्य के एक दर्जन से अधिक शहरों में दलित संगठनों ने जमकर तोड़फोड़ और आगजनी की थी।
भीमा-कोरेगांव में लड़ाई की 200वीं सालगिरह को शौर्य दिवस के रूप में मनाया गया जिसमें बड़ी तादाद में दलित इकट्ठा हुए थे।
इस दौरान कुछ लोगों ने भीमा-कोरेगांव विजय स्तंभ की तरफ जाने वाले लोगों की गाड़ियों पर हमला बोल दिया। इसके बाद हिंसा भड़क गई जिसमें साणसवाड़ी के राहुल पटांगले की मौत हो गई।
इस हिंसा के विरोध में दलित संगठनों ने बंद बुलाया था जिसमें मुंबई, नासिक, पुणे, ठाणे, अहमदनगर, औरंगाबाद और सोलापुर सहित राज्य के एक दर्जन से अधिक शहरों में दलित संगठनों ने जमकर तोड़फोड़ और आगजनी की थी।