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48 फीसदी किशोर इंटरनेट की लत से ग्रसित, जीवन पर पड़ रहा नकारात्मक असर

Wed, 19 Feb 2020 04:19 AM IST
संजीव कुमार झा अभिषेक पांचाल, नई दिल्ली
अभिषेक पांचाल, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Wed, 19 Feb 2020 04:19 AM IST
सार

इंटरनेट का अधिक प्रयोग किशोरों के जीवन को प्रभावित कर रहा है और उन्हें मानसिक रूप से कमजोर बना रहा है। इंटरनेट का नशा इस कदर किशोरों के सिर पर चढ़ रहा है कि उनका इलाज और काउंसलिंग तक करानी पड़ रही है।
 

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48 percent of teenagers suffering from Internet addiction have negative impact on life
सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

दिल्ली-एनसीआर में करीब 48 फीसदी किशोर इंटरनेट की लत से ग्रसित हैं और इससे उनके जीवन पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। दिल्ली-एनसीआर में 13 से 18 साल तक के करीब 76 फीसदी बच्चे हर दिन औसतन 2 घंटे तक इंटरनेट पर बिता रहे हैं। इनमें करीब 8 फीसदी किशोर दिन में 4 घंटे इंटरनेट का प्रयोग करते हैं। देशभर में बाल संरक्षण पर काम करने वाली गैर-सरकारी संस्था ‘क्राई’के सर्वे में यह तथ्य सामने आए हैं।

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सर्वे रिपोर्ट में कई चौंकाने वाली बातें भी हैं कि दिल्ली-एनसीआर में 93 फीसदी किशोरों के पास इंटरनेट की सुविधा है। सर्वे में खुलासा हुआ कि 41 फीसदी किशोर इंटरनेट पर सिर्फ फेसबुक और यूट्यूब चलाते हैं और महज 40 फीसदी किशोर ही इंटरनेट का प्रयोग पढ़ाई के लिए करते हैं।
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सर्वे में सामने आया कि 80 फीसदी से अधिक किशोर सोशल मीडिया के लिए ही इंटरनेट का प्रयोग करते हैं। एम्स अस्पताल के प्रोफेसर यतन पाल सिंह ने कहा कि उनके पास इलाज के लिए कुछ ऐसे किशोर भी आते हैं, जिनको दिन में 18 घंटे फोन पर बिताने की आदत है। वहीं कुछ ऐसे बच्चे भी आते हैं जो फोन पर गेम खेलने की लत के कारण अपनी परीक्षा तक छोड़ देते हैं, उन्होंने बताया कि यह एक प्रकार की बीमारी है, जिसको हम इलाज और काउंसलिंग से सही कर रहे हैं।

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तीन में से एक किशोर साइबर बुलिंग का शिकार

सर्वे में सामने आया कि तीन में से एक किशोर साइबर बुलिंग (सोशल मीडिया पर किसी के द्वारा परेशान किया जाना) का शिकार है। साइबर क्राइम के बारे में जानकारी के अभाव के कारण ही किशोर इसकी चपेट में आ रहे हैं। साइबर बुलिंग का किशोरों पर शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक रूप से बुरा प्रभाव पड़ रहा है।

इंटरनेट का प्रयोग सीमित समय के लिए करें

क्राई संस्था की उत्तरी क्षेत्र की निदेशिका सोहा मोइत्रा ने बताया कि उनकी संस्था काफी साल से बाल संरक्षण पर काम कर रही है। उन्होंने विशेषज्ञों से बातचीत कर बचाव के कुछ उपाय भी जारी किए हैं। इंटरनेट से बचाव पर विशेषज्ञों का कहना है कि किशोरों को उनके अभिभावकों की निगरानी में ही इंटरनेट का प्रयोग करने दिया जाना चाहिए।

अभिभावक को बच्चों को इंटरनेट के सुरक्षित प्रयोग के विषय में जानकारी देनी चाहिए, साथ ही बच्चों को निर्देश देना चाहिए कि इंटरनेट का प्रयोग सीमित समय के लिए करें। अभिभावकों को 18 साल से कम के बच्चों को इंटरनेट के प्रयोग के लिए स्मार्ट फोन नहीं देना चाहिए, बल्कि उनको घर के कंप्यूटर पर ही इंटरनेट का इस्तेमाल करने के लिए कहना चाहिए।

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