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विशेष प्रावधानों के तहत विदेशी लोगों को पहले भी मिली है भारत की नागरिकता

Tue, 17 Dec 2019 12:49 AM IST
आसिम खान डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला  
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला   Published by: आसिम खान Updated Tue, 17 Dec 2019 12:49 AM IST
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4.5 lakh Tamils, 15 thousand Bangladeshi and 2830 Pakistanis have taken citizenship of India
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केंद्रीय गृह मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि समय समय पर पहले भी भारत सरकार के विशेष प्रावधानों के तहत विदेशी लोगों को भारत की नागरिकता प्रदान की गई है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 6 ऐसे व्यक्ति को भारत का नागरिक मानता है जो 19 जुलाई 1948 से पहले पाकिस्तान से भारत आकर बस गए थे। दूसरा, इस तिथि या इसके बाद कोई व्यक्ति पाकिस्तान से भारत आकर रजिस्टर्ड हो गया हो, बशर्तें वह छह माह तक भारत में रह चुका हो। 1964 से 2008 के बीच 4.61 लाख भारतीय मूल के श्रीलंकाई तमिलों को भारत की नागरिकता प्रदान की गई थी। इसके अलावा पिछले छह साल में 2830 पाकिस्तानी नागरिक, 912 अफगानी और 172 बांग्लादेशियों को भारत का नागरिक बनाया गया।

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2014 में भारत और बांग्लादेश के बीच बॉर्डर एग्रीमेंट हुआ था। तब 50 एन्क्लेव को बांग्लादेश से भारत में शामिल किया गया था। इसके चलते 14864 बांग्लादेशी नागरिकों को भारत की नागरिका प्रदान की गई थी। गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, नागरिक संशोधन बिल 2016 से पब्लिक डोमेन में है। इसे संसद की लोकसभा एवं राज्यसभा की 30 सदस्यीय समिति द्वारा क्लीयर किया गया था। मौजूदा कानून भी विस्तृत रूप में उसी बिल पर आधारित है। भारत सरकार ने 2015-16 में कानूनी प्रावधानों में उचित बदलाव कर उन विदेशी नागरिकों की भारत में लीगल एंट्री सुनिश्चित की थी, जो तीन देशों के छह अल्पसंख्यक समुदायों से संबंधित थे।
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प्रावधान के अनुसार, धार्मिक आधार पर उत्पीड़न के शिकार इन लोगों को दिसंबर 2014 तक भारत में आ जाना था। भारत सरकार ने इस श्रेणी के कई लोगों के लिए लंबी अवधि का वीजा योजना भी शुरू की थी। नागरिक संशोधन कानून के तहत अब इन लोगों को भारत की नागरिकता मिल जाएगी, बशर्ते वे नागरिकता लेने की सभी योग्यताएं पूरी करते हों, जिनके आधार पर वे 31 दिसंबर 2014 से पहले माइग्रेट होकर भारत में आए थे।
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केंद्र सरकार समय समय पर ऐसे कई प्रावधान बनाती रही है
1964 से 2008 के बीच 4.61 लाख भारतीय मूल के तमिलों को भारत की नागरिकता प्रदान की गई थी। इसके अलावा पिछले छह साल में 2830 पाकिस्तानी नागरिक, 912 अफगानी और 172 बांग्लादेशियों को भारत का नागरिक बनाया गया। इन सभी लोगों को केंद्र सरकार द्वारा समय समय पर बनाए जाने वाले विशेष प्रावधानों के तहत नागरिकता प्रदान की गई है। तमिलों को इतनी बड़ी संख्या में इसलिए नागरिकता मिल सकी, क्योंकि 1964 और 1974 में भारत श्रीलंका के बीच अंतरराष्ट्रीय समझौता हुआ था। 

वर्तमान में 95 हजार श्रीलंकन शरणार्थी तमिलनाडु में रह रहे हैं। उन्हें राशन कार्ड सहित दूसरी सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं। यह इसलिए किया गया कि वे समय पर भारतीय नागरिकता लेने के लिए आवेदन कर सकें। 1962 से 1978 के बीच दो लाख से अधिक भारतीय मूल के वे लोग जो बर्मा में रहते थे, उन्हें भारत में बसाया गया। वजह, उन लोगों का बर्मा में बड़ा कारोबार था, लेकिन उस पर वहां की सरकार ने जबरन कब्जा कर लिया। इन लोगों को भारत लाकर विभिन्न हिस्सों में रहने की इजाजत दी गई।


सूत्र बताते हैं कि मौजूदा नागरिक संशोधन कानून बाहर से आए किसी धार्मिक समुदाय को निशाना नहीं बनाता। ये उन लोगों को केवल एक तरीका बताता है, जो अवैध नागरिक शब्द साथ लगने का दर्द सह रहे थे। वे लोग अब योग्यताएं पूरी कर भारत की नागरिकता ले सकते हैं। केंद्र सरकार इस बाबत नियम बनाएगी। यह तय है कि कोई भी प्रवासी खुद ब खुद भारत का नागरिक नहीं बन जाएगा। उसे ऑन लाइन आवेदन करना होगा। सक्षम अथॉरिटी उस व्यक्ति की योग्यताएं चैक करेगी। यदि वह सभी योग्यताएं पूरी करता है तो उसे नागरिकता मिल जाएगी।

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