एचएएल का 300वां एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर 'ध्रुव' लगाएगा आकाश में गोते, जानिए इसकी खूबियां
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हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने अपने 300वें एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर ध्रुव का निर्माण पूरा कर लिया है। कंपनी ने मंगलवार को इसे अपने हैंगर से रोल आउट कर दिया है। रोल आउट होने के बाद यह अब आकाश में गोते लगाने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
कंपनी के सीएमडी आर माधवन ने कहा ने कहा कि एएलएच मार्क- I से मार्क- IV तक का विकास अभूतपूर्व रहा है और यह हेलीकॉप्टरों के स्वदेशी डिजाइन और विकास को प्रोत्साहन देता है।
Bengaluru: 300th Advanced Light Helicopter (ALH-Dhruv) rolled out from HAL hangar today
"The evolution from ALH Mark-I to Mark-IV has been phenomenal and is a boost to the indigenous design and development of helicopters," said R Madhavan, CMD, HAL pic.twitter.com/MV7JMvOU2iविज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) September 29, 2020
स्वदेशी ध्रुव ने पहली बार 1992 में उड़ान भरी थी। उसके बाद से यह भारतीय सेना के लिए हर स्तर पर मददगार साबित हुई। इसकी खूबियां इसे और हेलीकॉप्टरों से अलग बनाती है। इसका उपयोग सेना और वायु सेना दोनों अधिकतम ऊंचाई वाली जगहों पर अपने अभियानों में कर रहे हैं।
इन हेलिकॉप्टरों के जरिए हथियार एवं अन्य उपकरण उन ऊंचाई वाले स्थानों पर ले जाया जा सकता है जहां अन्य हेलिकॉप्टर उड़ान भरने में सक्षम नहीं हैं। लद्दाख सेक्टर में इस तरह के 20 से ज्यादा हेलिकॉप्टर सेना की मदद कर रहे हैं।
सर्दी का मौसम में लद्दाख में तापमान शून्य से नीचे चला जाता है और इस तरह के मौसम में भी यह पेलोड ले जाने में कारगर साबित होते हैं। कंपनी के सीईओ भास्कर ने बताया कि 2 लाख 80 हजार घंटे से अधिक उड़ान के साथ एएलएच किसी भी समय और किसी भी मिशन के लिए एक मल्टीरोल हेलीकॉप्टर साबित हुआ है।
वर्तमान में, एचएएल सेना के लिए 41 हेलीकॉप्टरों, भारतीय नौसेना के लिए 16 हेलीकॉप्टरों, और भारतीय तटरक्षक के लिए 16 हेलीकॉप्टरों का उत्पादन कर रहा है। इसमें से 38 एएलएच का उत्पादन पहले ही हो चुका है और शेष का निर्माण 2022 तक पूरा हो जाएगा।