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नहीं थम रहा आक्रोश: न्याय की मांग के बीच बीत गए 30 दिन, आरजी कर की तीसरी मंजिल पर उस रात क्या हुआ, आज भी रहस्य

Mon, 09 Sep 2024 07:26 AM IST
एन. अर्जुन Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Mon, 09 Sep 2024 07:26 AM IST
सार

आखिर आठ और नौ अगस्त की दरम्यानी रात को मेडिकल कॉलेज की तीसरे मंजिल पर आखिर हुआ क्या था, यह आज भी साफ नहीं हो पाया है। इस बीच, सोमवार को मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होगी। सभी कि निगाहें इस पर रहेंगी कि आखिर सीबीआई इस मामले में क्या रिपोर्ट जमा करेगी।

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30 days passed since demanding justice in Kolkata RG Kar Medical College doctor case
आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल - फोटो : ANI

विस्तार

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में न्याय की मांग करते हुए 30 दिन बीत गए। कोलकाता पुलिस से मामला सीबीआई को सौंपे भी कई दिन हो गए। एक आरोपी की गिरफ्तारी, कई लोगों पॉलीग्राफ टेस्ट, मामले में बहुत कुछ हुआ, लेकिन तमाम सवालों से पर्दा उठना आज भी बाकी है।

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आखिर आठ और नौ अगस्त की दरम्यानी रात को मेडिकल कॉलेज की तीसरे मंजिल पर आखिर हुआ क्या था, यह आज भी साफ नहीं हो पाया है। इस बीच, सोमवार को मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होगी। सभी कि निगाहें इस पर रहेंगी कि आखिर सीबीआई इस मामले में क्या रिपोर्ट जमा करेगी।
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जांच में अब तक यह आया सामने

  • गिरफ्तार आरोपी संजय रॉय नाम का सिविक वॉलंटियर है।
  • सीसीटीवी कैमरे से पहचान की गई। घटनास्थल से उसका हेडफोन बरामद हुआ।
  • गिरफ्तार आरोपियों के पीठ पर खरोंच के निशान हैं।
  • मौत रात 3:30 बजे से सुबह 4:30 बजे के बीच हुई।
  • शरीर पर 25 घाव के निशान हैं।

इनका अभी तक नहीं मिला जवाब

  • अपराधी एक ही है या एक से अधिक?
  • गिरफ्तार आरोपी के शरीर पर खरोंच के अलावा कोई अन्य प्रतिरोध के निशान हैं या नहीं?
  • पीड़िता के नाखूनों में किसी का ऊतक मिला या नहीं?
  • उस ऊतक का गिरफ्तार आरोपी के ऊतक से मिलान हुआ है या नहीं?
  • घटनास्थल सेमिनार रूम था या कोई अन्य स्थान?
  • सेमिनार रूम में शव होने के बावजूद पुलिस ने वहां इतनी बड़ी संख्या में लोगों को क्यों प्रवेश करने दिया?
  • पीड़िता के परिवार को पहले आत्महत्या क्यों बताई गई?
  • शव को इतनी जल्दी क्यों जलाया गया?
  • सुबह साढ़े 9 बजे एक रोगी की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए उसकी खोज क्यों की गई?
  • अस्पताल प्रशासन ने एफआईआर क्यों नहीं दर्ज की?
  • सेमिनार रूम के पास कमरे को तोड़ने की अनुमति क्यों दी गई?
  • सबूत नष्ट करने के आरोप में अभी तक कोई गिरफ्तार क्यों नहीं हुआ?

पीड़ित के परिजनों ने भी उठाए सवाल
पीड़िता के माता-पिता ने भी कई सवाल उठाए हैं। पुलिस पर जबरन बेटी के अंतिम संस्कार करने के दवाब सहित, पैसे देने तक के आरोप लगाए हैं। इतना ही नहीं, पीड़िता के पिता ने कहा, बेटी के अंतिम संस्कार के पैसे किसने दिए, उनको आज तक पता नहीं है। उन्होंने पुलिस पर सहयोग नहीं करने का भी आरोप लगाया है।

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घटना वाली रात महिला वार्ड की छत पर थी पार्टी, मौजूद लोगों की सूची सीबीआई ने मांगी
आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में जूनियर डॉक्टर की मौत के मामले में एक नई जानकारी सामने आई है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को पता चला है कि हत्या वाली रात को अस्पताल की इमरजेंसी बिल्डिंग के पास ही महिला वार्ड की छत पर पार्टी हो रही थी। सीबीआई ने अब उस पार्टी में कौन-कौन मौजूद था इसकी सूची मांगी है। सीबीआई यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या इस पार्टी का हत्या के साथ किसी तरह का संबंध है।


सूत्रों के मुताबिक, 8 अगस्त की रात आरजी कर मेडिकल कॉलेज के विभिन्न स्थानों पर पार्टी का आयोजन किया गया था। एक पार्टी केवी हॉस्टल की छत पर थी, जबकि दूसरी पार्टी आपातकालीन बिल्डिंग के महिला वार्ड की छत पर हो रही थी। कुछ मरीजों का कहना है कि मुख्य बॉय हॉस्टल से उन्हें पार्टी के शोर की आवाज सुनाई दे रही थी। इसके बाद से कई सवाल उठने लगे हैं। क्या अस्पताल के अंदर इतनी जोर से बॉक्स बजाकर पार्टी करना संभव है? इन सब सवालों के बीच सीबीआई ने ऑर्थोपेडिक विभाग के कितने डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी मौजूद थे, इसका पता लगाने के लिए ड्यूटी रोस्टर की मांग की है। इसके साथ ही, वे यह भी देख रहे हैं कि वहां के जूनियर डॉक्टरों की स्थिति क्या थी।

पुलिस आयुक्त को हटाने की मांग पर विचार करें सीएम : राज्यपाल
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ. सीवी आनंद बोस ने सीएम ममता बनर्जी को कैबिनेट की आपात बैठक बुलाकर कोलकाता के पुलिस आयुक्त विनीत गोयल को हटाने की लोगों की मांग पर फैसला करने का निर्देश दिया है। सूत्रों ने बताया कि बोस ने कहा है कि सरकार अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकती है और राज्य में परेशान करने वाले घटनाक्रम पर चुप नहीं रह सकती। राज्यपाल के मुताबिक, सरकार को सरकार को संविधान के दायरे और कानून के नियम के तहत काम करना चाहिए। राज्यपाल का यह भी मानना है कि आंख बंद कर लेने का रवैया सफल नहीं होगा।

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