फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   30 baby born in shramik special train run by indian railways for migrant workers in lockdown

श्रमिक स्पेशल ट्रेन का सफर कईयों के लिए बना यादगार, यात्रा के दौरान 30 बच्चों का हुआ जन्म

Sun, 24 May 2020 11:27 PM IST
Rajeev Rai न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Rajeev Rai Updated Sun, 24 May 2020 11:27 PM IST
विज्ञापन
30 baby born in shramik special train run by indian railways for migrant workers in lockdown
श्रमिक स्पेशल ट्रेन - फोटो : PTI

कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए देशभर में लगे लॉकडाउन के बीच भारतीय रेलवे ने एक मई से प्रवासी श्रमिकों के लिए विशेष श्रमिक स्पेशल ट्रेनों की शुरुआत की थी। ये सुविधा अभी भी जारी है और इसके जरिए मेट्रो शहरों में फंसे श्रमिकों को उनके गांव पहुंचाने के लिए रोजाना नई ट्रेनें भी चलाई जा रही हैं।

विज्ञापन


लॉकडाउन में कई तरह की समस्यायों और परेशानियों से जूझ रहे श्रमिकों के लिए यह ट्रेनें जहां मददगार साबित हुईं वहीं इन ट्रेनों में सफर के दौरान कुछ श्रमिको को खुशियां भी प्राप्त हुईं, रेल मंत्रालय के मुताबिक एक मई से शुरू हुई इन श्रमिक विशेष रेलगाड़ियों में अबतक 30 बच्चों का जन्म हुआ है।
विज्ञापन


चाहे 23 वर्षीय संगीता हो या 27 वर्षीय मधु। लॉकडाउन की वजह से वे दो महीने से फंसी थीं और गर्भावस्था में जरूरी सुविधाएं तो दूर अक्सर बिना खाना-पानी के भी रहना पड़ा लेकिन श्रमिक विशेष रेलगाड़ी में सवार होने के बाद उन्होंने राहत की सांस ली। इसी पल उनके अजन्मे बच्चों ने भी दुनिया में सुरक्षित कदम रखने का फैसला किया।
विज्ञापन
विज्ञापन


पिछले सोमवार को नौ महीने के गर्भ के साथ संगीता बंगलूरू से उत्तर प्रदेश स्थित अपने घर लौटने के लिए श्रमिक विशेष रेलगाड़ी में सवार हुई थी। यात्रा के दौरान उन्होंने रेलगाड़ी में ही सह-यात्रियों की मदद से बेटे को जन्म दिया। इसके ठीक बाद उन्हें दवाएं उपलब्ध कराई गईं और जब वह पहुंची तो चिकित्सकों की टीम पहले से वहां मौजूद थी। 

गत शुक्रवार को 27 वर्षीय मधु कुमारी ने भी उत्तर प्रदेश स्थित घर लौटने के दौरान ही बच्चे को जन्म दिया। जब उन्हें प्रसव पीड़ा हुई तब रेलगाड़ी में सवार रेलवे कर्मचारियों ने इसकी सूचना रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) को दी। बच्चे का जन्म रेलगाड़ी के झांसी रेलवे स्टेशन पहुंचने से पहले ही हो गया। हालांकि, स्टेशन पर मधु को चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई गई।

रेलवे अधिकारियों ने निभाया फर्ज

रेलवे बोर्ड के अधिकारियों ने कहा, ‘हमें गर्व है कि इन रेलगाड़ियों में पैदा होने वाले सभी बच्चे स्वस्थ्य हैं और उनकी मां भी ठीक हैं। हम इस बात से खुश हैं कि हम उनकी मदद कर सके।’

हालांकि, इन विशेष रेलगाड़ियों में बच्चे के जन्म की पहली घटना आठ मई को हुई जब गुजरात से अकेले बिहार जा रही ममता यादव ने बच्चे को जन्म दिया।
इसी प्रकार 13 मई को पिंकी यादव ने अहमदाबाद-फैजाबाद श्रमिक विशेष रेलगाड़ी में आरपीएफ कर्मियों की मदद से बेटे को जन्म दिया। उन्हें उत्तर प्रदेश के कानपुर रेलवे स्टेशन पर चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई गई लेकिन आगे के इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर करने की जरूरत पड़ी।

रेलवे के मुताबिक 23 वर्षीय ईश्वरी देवी ने हबीबगंज-बिलासपुर श्रमिक विशेष रेलगाड़ी में गत रविवार को कर्मचारियों और महिला यात्रियों की मदद से बेटे को जन्म दिया। रेलवे ने अबतक करीब 2,800 श्रमिक विशेष रेलगाड़ियों का परिचालन किया है और इनमें बच्चों के जन्म से रोजमर्रा के तनाव से कुछ सुकून के पल मिले हैं।

चूंकि इन बच्चों का जन्म अंजान लोगों के बीच हुआ। इसलिए पहली बार रोने की उनकी आवाज रेलगाड़ी पर सवार कई लोगों ने सुनी। रविवार को उत्तर प्रदेश आने वाली विशेष रेलगाड़ी में जन्म लेने वाली एक बच्ची का नाम ‘ लॉकडाउन यादव’ रखा गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed