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चारा घोटाले में 37 को हुई 3-14 साल की सजा, 34.91 करोड़ की अवैध निकासी का था मामला
एजेंसी, रांची
Updated Thu, 19 Apr 2018 01:04 AM IST
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Fodder Scam
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सीबीआई की विशेष अदालत ने बुधवार को चारा घोटाले के 51वें मामले में 37 दोषियों को तीन से 14 साल की सजा सुनाई। जज शिवपाल सिंह ने दुमका ट्रेजरी से अवैध निकासी के इस केस में मुजरिमों में शामिल पशुपालन विभाग के डॉक्टरों, अफसरों और सप्लायरों पर 50 लाख से दो करोड़ रुपये तक का जुर्माना भी लगाया गया है।
खास बात यह है कि इस केस में लालू प्रसाद सहित किसी भी पूर्व मुख्यमंत्री, मंत्री या जनप्रतिनिधि का नाम शामिल नहीं था। अदालत ने इस केस में 37 लोगों को 9 अप्रैल को दोषी ठहराया था, जबकि पांच आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। बता दें कि चारा घोटाले के चार मामलों में लालू प्रसाद को सजा सुनाई जा चुकी है। 23 मार्च को उन्हें 14 साल की सजा सुनाई गई थी।
क्या है मामला
दुमका ट्रेजरी से जुड़ा यह तीसरा (आरसी45ए/96) मामला है। इसमें 1991 से 96 तक पशुपालन विभाग के फंड का फर्जी आवंटन किया गया था। तत्कालीन डीएम राजीव अरुण एक्का ने फरवरी, 1996 में इसकी एफआईआर दर्ज करवाई थी।
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- कुल 72 आरोपियों के खिलाफ जांच शुरू हुई। अंतत: 60 आरोपियों पर आरोप तय किए गए, जबकि सुनवाई के दौरान 14 आरोपियों की मौत हो गई। दो ने अपराध स्वीकार कर लिया जबकि एक फरार है। एक आरोपी को हाईकोर्ट से राहत मिली हुई है।
- 42 आरोपियों में से पांच को अदालत ने बरी कर दिया, जबकि 37 को दोषी ठहराते हुए अलग-अलग सजा का एलान किया।
दोषियों में 16 डॉक्टर और अफसर
दिनेश्वर प्रसाद शर्मा, हरेंद्रनाथ वर्मा, कृष्ण कुमार प्रसाद, कृष्ण मुरारी साह, विमल कांत दास, सर्वेंदु कुमार दास, मनोज कुमार श्रीवास्तव, फ्रेडी करकेट्टा, नंदकिशोर प्रसाद, ओमप्रकाश दिवाकर, पंकज मोहन भूई, पीतांबर झा, रघुनंदन प्रसाद, राधामोहन मंडल, शशि कुमार सिन्हा, मनोरंजन प्रसाद।
21 सप्लायरों को सजा
त्रिपुरारी मोहन प्रसाद, संजय अग्रवाल, राकेश कुमार अग्रवाल, हरीशचंद्र अग्रवाल, अजित कुमार सिन्हा, अनिल कुमार सिन्हा, दिनेश कुमार सिन्हा, सुनील कुमार सिन्हा, सुशील कुमार सिन्हा, रवि कुमार सिन्हा, राकेश गांधी उर्फ सुनील गांधी, एमएस बेदी, राजन मेहता, गोपीनाथ दास, रामअवतार शर्मा, संजय शंकर, विनोद कुमार झा, दयानंद कश्यप, अरुण कुमार और अजित कुमार वर्मा।
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खास बात यह है कि इस केस में लालू प्रसाद सहित किसी भी पूर्व मुख्यमंत्री, मंत्री या जनप्रतिनिधि का नाम शामिल नहीं था। अदालत ने इस केस में 37 लोगों को 9 अप्रैल को दोषी ठहराया था, जबकि पांच आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। बता दें कि चारा घोटाले के चार मामलों में लालू प्रसाद को सजा सुनाई जा चुकी है। 23 मार्च को उन्हें 14 साल की सजा सुनाई गई थी।
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क्या है मामला
दुमका ट्रेजरी से जुड़ा यह तीसरा (आरसी45ए/96) मामला है। इसमें 1991 से 96 तक पशुपालन विभाग के फंड का फर्जी आवंटन किया गया था। तत्कालीन डीएम राजीव अरुण एक्का ने फरवरी, 1996 में इसकी एफआईआर दर्ज करवाई थी।
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- कुल 72 आरोपियों के खिलाफ जांच शुरू हुई। अंतत: 60 आरोपियों पर आरोप तय किए गए, जबकि सुनवाई के दौरान 14 आरोपियों की मौत हो गई। दो ने अपराध स्वीकार कर लिया जबकि एक फरार है। एक आरोपी को हाईकोर्ट से राहत मिली हुई है।
- 42 आरोपियों में से पांच को अदालत ने बरी कर दिया, जबकि 37 को दोषी ठहराते हुए अलग-अलग सजा का एलान किया।
दोषियों में 16 डॉक्टर और अफसर
दिनेश्वर प्रसाद शर्मा, हरेंद्रनाथ वर्मा, कृष्ण कुमार प्रसाद, कृष्ण मुरारी साह, विमल कांत दास, सर्वेंदु कुमार दास, मनोज कुमार श्रीवास्तव, फ्रेडी करकेट्टा, नंदकिशोर प्रसाद, ओमप्रकाश दिवाकर, पंकज मोहन भूई, पीतांबर झा, रघुनंदन प्रसाद, राधामोहन मंडल, शशि कुमार सिन्हा, मनोरंजन प्रसाद।
21 सप्लायरों को सजा
त्रिपुरारी मोहन प्रसाद, संजय अग्रवाल, राकेश कुमार अग्रवाल, हरीशचंद्र अग्रवाल, अजित कुमार सिन्हा, अनिल कुमार सिन्हा, दिनेश कुमार सिन्हा, सुनील कुमार सिन्हा, सुशील कुमार सिन्हा, रवि कुमार सिन्हा, राकेश गांधी उर्फ सुनील गांधी, एमएस बेदी, राजन मेहता, गोपीनाथ दास, रामअवतार शर्मा, संजय शंकर, विनोद कुमार झा, दयानंद कश्यप, अरुण कुमार और अजित कुमार वर्मा।