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सिर्फ विरोधियों के विरोध पर भाजपा को लग सकता है झटका
ब्यूरो/ अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Tue, 14 Jun 2016 12:06 AM IST
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राजनीति में सकारात्मक बदलाव का दिल्ली-बिहार के चुनाव ने दिया संकेत
- फोटो : PTI
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लोकसभा चुनाव से पूर्व हर रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यह कहना नहीं भूलते थे कि विरोधी दलों ने ही दिल्ली का उनका रास्ता आसान कर दिया है। मोदी-मोदी करके 90 फीसदी प्रचार तो विरोधी खुद कर देते हैं। राजनीतिक रणनीतिकारों ने भी माना कि कांग्रेस तथा अन्य दलों के जरूरत से ज्यादा विरोध ने मोदी को देश का चेहरा बना दिया। वहीं भाजपा विकास के एजेंडे को प्रभावी तरीके से लोगों के बीच ले जाने में सफल रही, जो उनकी बड़ी जीत का कारण बना। विश्लेषकों ने इसे भारतीय राजनीति में सकारात्मक बदलाव के रूप में लिया।
माना जा रहा है कि लोग अब विरोधियों पर हमले के बजाय यह जानना चाहते हैं कि बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार जैसी जड़ कर चुकी चुनौतियों से निपटने के लिए उनके पास क्या योजनाएं हैं। लेकिन लोगों की भावनाआें को समझने में नाकाम विरोधी दलों की इस सियासी चूक से भाजपा के रणनीतिकार सीख लेते नहीं दिख रहे हैं।दिल्ली और बिहार में झटका खाने के बावजूद भाजपा के रणनीतिकार अखिलेश सरकार की नाकामियों को लेकर अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में लोगों के बीच जाना चाहते हैं।
दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा तथा अन्य दल अपनी योजनाएं बताने के बजाय आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल पर अधिक हमलावर रहे। इसके बाद बिहार में भाजपा ने मुख्यमंत्री नीतिश कुमार और राष्ट्रीय जनता दल के लालू यादव गठबंधन पर हमला बोलकर चुनाव में बढ़त की रणनीति बनाई लेकिन दोनों ही चुनाव में अप्रत्याशित नतीजे सामने आए। इन दोनाें चुनाव में हार के बावजूद अब एक बार फिर भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की दो दिनी बैठक में यूपी फतह के लिए अखिलेश सरकार की नाकामियों के साथ जनता केबीच जाने का निर्णय लिया गया। बैठक में मथुरा, कैराना जैसी घटनाओं और प्रदेश की लचर कानून-व्यवस्था के एजेंडे को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव पारित किया गया।
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इसके बाद संगम की रेती पर आयोजित परिवर्तन रैली में भी भाजपा नेताओं का संबोधन पार्टी की नीतियों के बजाय अखिलेश सरकार और परिवारवाद पर केंद्रित रहा। उन्होंने भाजपा को सपा और बसपा के विकल्प के रूप में खुद को प्रस्तुत किया। इसके विपरीत नीतीश कुमार और केजरीवाल की तरह अखिलेश यादव चार साल में किए गए काम को लेकर अभी से लोगों के बीच में हैं। ऐसे में सियासी हल्के में यह चर्चा आम है कि विरोधियों के विरोध की रणनीति के चक्रव्यूह में भाजपा खुद न फंस जाएं। यह चिंता भाजपा नेताओं की भी है। हालांकि, भाजपा नेता खुलकर कुछ बोलने से बच रहे हैं, लेकिन उनका साफ मत है कि विधानसभा चुनाव में प्रदेश सरकार को कोसने के बजाय मोदी सरकार की दो साल की उपलब्धियों के साथ विजन-यूपी के एजेंडे के साथ आगे बढ़ा जाए। उनका यह भी कहना है कि इसका पूरा खाका तैयार किया जाना चाहिए।
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माना जा रहा है कि लोग अब विरोधियों पर हमले के बजाय यह जानना चाहते हैं कि बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार जैसी जड़ कर चुकी चुनौतियों से निपटने के लिए उनके पास क्या योजनाएं हैं। लेकिन लोगों की भावनाआें को समझने में नाकाम विरोधी दलों की इस सियासी चूक से भाजपा के रणनीतिकार सीख लेते नहीं दिख रहे हैं।दिल्ली और बिहार में झटका खाने के बावजूद भाजपा के रणनीतिकार अखिलेश सरकार की नाकामियों को लेकर अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में लोगों के बीच जाना चाहते हैं।
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दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा तथा अन्य दल अपनी योजनाएं बताने के बजाय आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल पर अधिक हमलावर रहे। इसके बाद बिहार में भाजपा ने मुख्यमंत्री नीतिश कुमार और राष्ट्रीय जनता दल के लालू यादव गठबंधन पर हमला बोलकर चुनाव में बढ़त की रणनीति बनाई लेकिन दोनों ही चुनाव में अप्रत्याशित नतीजे सामने आए। इन दोनाें चुनाव में हार के बावजूद अब एक बार फिर भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की दो दिनी बैठक में यूपी फतह के लिए अखिलेश सरकार की नाकामियों के साथ जनता केबीच जाने का निर्णय लिया गया। बैठक में मथुरा, कैराना जैसी घटनाओं और प्रदेश की लचर कानून-व्यवस्था के एजेंडे को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव पारित किया गया।
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इसके बाद संगम की रेती पर आयोजित परिवर्तन रैली में भी भाजपा नेताओं का संबोधन पार्टी की नीतियों के बजाय अखिलेश सरकार और परिवारवाद पर केंद्रित रहा। उन्होंने भाजपा को सपा और बसपा के विकल्प के रूप में खुद को प्रस्तुत किया। इसके विपरीत नीतीश कुमार और केजरीवाल की तरह अखिलेश यादव चार साल में किए गए काम को लेकर अभी से लोगों के बीच में हैं। ऐसे में सियासी हल्के में यह चर्चा आम है कि विरोधियों के विरोध की रणनीति के चक्रव्यूह में भाजपा खुद न फंस जाएं। यह चिंता भाजपा नेताओं की भी है। हालांकि, भाजपा नेता खुलकर कुछ बोलने से बच रहे हैं, लेकिन उनका साफ मत है कि विधानसभा चुनाव में प्रदेश सरकार को कोसने के बजाय मोदी सरकार की दो साल की उपलब्धियों के साथ विजन-यूपी के एजेंडे के साथ आगे बढ़ा जाए। उनका यह भी कहना है कि इसका पूरा खाका तैयार किया जाना चाहिए।
केंद्रीय मंत्रियों ने लगाई संगम में डुबकी
राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दूसरे दिन सोमवार को रेल व विधि मंत्री सहित भाजपा शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्रियों ने संगम में डुबकी लगाई और त्रिवेणी पूजन किया। सूर्योदय से पहले रेल मंत्री सुरेश प्रभु जहां रेलवे की बोट से संगम पहुंचे, वहीं विधि मंत्री सदानंद गौड़ा, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, गोवा के मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत यशवंत पार्सेकर आदि वीआईपी घाट से प्रशासन की मोटरबोट द्वारा संगम नोज पहुंचे। संगम नोज पहुंच कर मंत्रियों ने संगम में स्नान किया और विधिविधान से त्रिवेणी पूजन किया।
संगम स्नान के बाद विधि मंत्री सदानंद गौड़ा ने कहा कि संगम में डुबकी लगाकर अभिभूत हूं। त्रिवेणी स्नान, पूजन कर देश में समृद्धि और शांति के लिए प्रार्थना की है। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि संगम पर जल स्वच्छ होने की जरूरत है। रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा कि संगम में स्नान करके पुण्य कमाया है।
उमा, वसुंधरा ने किए बड़े हनुमानजी के दर्शन
केंद्रीय मंत्री उमा भारती, राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया और गोवा के मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत यशवंत पार्सेकार ने संगमनगरी में बड़े हनुमानजी का आशीर्वाद लिया। बड़े हनुमान मंदिर के व्यवस्थापक स्वामी आनंद गिरि की देखरेख में पूजा अर्चना और आरती हुई।
उमा भारती ने बजरंगबली से मां गंगा के लिए बड़ा कर सकें ऐसी प्रार्थना की। वसुंधरा राजे और गोवा के मुख्यमंत्री ने आरती पूजन कर अपने प्रदेशों की खुशहाली के लिए प्रार्थना की। बड़े हनुमानजी के दर्शन पूजन करने वालों में बंगाल, राजस्थान, गोवा के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदि भी रहे। स्वामी आनंद गिरि ने बताया कि लाल कृष्ण आडवाणी, गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी बड़े हनुमानजी से प्रार्थना की।
संगम स्नान के बाद विधि मंत्री सदानंद गौड़ा ने कहा कि संगम में डुबकी लगाकर अभिभूत हूं। त्रिवेणी स्नान, पूजन कर देश में समृद्धि और शांति के लिए प्रार्थना की है। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि संगम पर जल स्वच्छ होने की जरूरत है। रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा कि संगम में स्नान करके पुण्य कमाया है।
उमा, वसुंधरा ने किए बड़े हनुमानजी के दर्शन
केंद्रीय मंत्री उमा भारती, राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया और गोवा के मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत यशवंत पार्सेकार ने संगमनगरी में बड़े हनुमानजी का आशीर्वाद लिया। बड़े हनुमान मंदिर के व्यवस्थापक स्वामी आनंद गिरि की देखरेख में पूजा अर्चना और आरती हुई।
उमा भारती ने बजरंगबली से मां गंगा के लिए बड़ा कर सकें ऐसी प्रार्थना की। वसुंधरा राजे और गोवा के मुख्यमंत्री ने आरती पूजन कर अपने प्रदेशों की खुशहाली के लिए प्रार्थना की। बड़े हनुमानजी के दर्शन पूजन करने वालों में बंगाल, राजस्थान, गोवा के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदि भी रहे। स्वामी आनंद गिरि ने बताया कि लाल कृष्ण आडवाणी, गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी बड़े हनुमानजी से प्रार्थना की।
जेठ की गर्मी में कुंभ जैसी भीड़
मोदी का भाषण सुने बिना मायूस लौटे हजारों
- फोटो : PTI
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण सुनने सोमवार को परेड मैदान में उमड़ी भीड़ देखकर सहसा कुंभ मेले का एहसास हुआ। वही भीड़ का रेला, वही युवाओं, बुजुर्गों और महिलाओं की भीड़। रैली तक पहुंचने का रास्ता खोजते लोग आखिर में हजारों लोग बिना भाषण सुने ही लौट गए। सहसा यह लगा कि जेठ की गर्मी में कुंभ मेला कैसे लग गया। यह वह जगह हैं जहां हर साल माघ मेले और कुंभ में ऐसी ही भीड़ उमड़ती है।
परेड ग्राउंड पहुंचने वाले हर रास्ते बैरहना चौराहा, हर्षवर्धन मूर्ति तिराहा, फोर्ट रोड क्र ासिंग और अलोपीबाग मंदिर तक हर ओर भीड़ ही भीड़। बसों की छतों पर बैठ कर रैली स्थल तक पहुंचे लोग और हजारों युवा यहां-वहां भटकते देखे गए। भीड़ ऐसी की हजारों पंडाल तक पहुंच ही नहीं सके। ऊपर से सुरक्षा बलों की रोक टोक से भी लोग रास्ता भटक गए। परेड मैदान पर रखे पीपा पुल और चकर्ड प्लेट के बीच हजारों लोग फंसे रहे। भीड़ बढ़ जाने और वीवीआईपी मूवमेंट के कारण फोर्ट रोड क्रासिंग और हर्षवर्धन मूर्ति तिराहे के बीच का रास्ता रोक दिया गया था।
इसकी वजह से हजारों लोग रैली स्थल के पीछे से बने रास्ते की ओर से घुसने का प्रयास कर रहे थे। हालांकि सुरक्षा बलों ने उधर से किसी को घुसने की इजाजत नहीं दी तो मायूस होकर लौटना भी पड़ा। इस चक्कर कई किलोमीटर चलना पड़ा। आम लोगों के लिए रैली तक पहुंचने का रास्ता हर्षवर्धन तिराहा था। जाम से बचने के चक्कर में भी लोग इधर-उधर रास्ता खोजते नजर आए।
परेड ग्राउंड पहुंचने वाले हर रास्ते बैरहना चौराहा, हर्षवर्धन मूर्ति तिराहा, फोर्ट रोड क्र ासिंग और अलोपीबाग मंदिर तक हर ओर भीड़ ही भीड़। बसों की छतों पर बैठ कर रैली स्थल तक पहुंचे लोग और हजारों युवा यहां-वहां भटकते देखे गए। भीड़ ऐसी की हजारों पंडाल तक पहुंच ही नहीं सके। ऊपर से सुरक्षा बलों की रोक टोक से भी लोग रास्ता भटक गए। परेड मैदान पर रखे पीपा पुल और चकर्ड प्लेट के बीच हजारों लोग फंसे रहे। भीड़ बढ़ जाने और वीवीआईपी मूवमेंट के कारण फोर्ट रोड क्रासिंग और हर्षवर्धन मूर्ति तिराहे के बीच का रास्ता रोक दिया गया था।
इसकी वजह से हजारों लोग रैली स्थल के पीछे से बने रास्ते की ओर से घुसने का प्रयास कर रहे थे। हालांकि सुरक्षा बलों ने उधर से किसी को घुसने की इजाजत नहीं दी तो मायूस होकर लौटना भी पड़ा। इस चक्कर कई किलोमीटर चलना पड़ा। आम लोगों के लिए रैली तक पहुंचने का रास्ता हर्षवर्धन तिराहा था। जाम से बचने के चक्कर में भी लोग इधर-उधर रास्ता खोजते नजर आए।