...इसलिए केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर नहीं आ रहे हैं 261 आईपीएस अधिकारी
केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में आईपीएस डीआईजी को फील्ड में काम करना पड़ता है, इसलिए वह चाहता है कि उसे दिल्ली मिल जाए या गृह जिला। अधिकांश आईपीएस, आईजी बड़े-बड़े शहरों में ही पोस्टिंग लेते हैं...
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केंद्र में आईपीएस के लिए रिजर्व 261 पद अभी खाली पड़े हैं। इनमें तकरीबन सभी पद डीआईजी और एसपी रैंक के हैं। अगर एडीजी और आईजी को छोड़ दें तो बाकी की रैंकों में रिक्तियों की भरमार लगी हुर्ह है। केंद्रीय अर्धसैनिक बल और केंद्रीय पुलिस संगठनों में आईपीएस के लिए निर्धारित किए गए सभी पद नहीं भरे जा सके हैं।
हाल में दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में आईजी और डीआईजी के पदों को आईपीएस प्रतिनियुक्ति के जरिए भरने पर लगी रोक हटा दी थी। इसके बाद आईपीएस आईजी के कई पदों को 24 घंटे के भीतर प्रतिनियुक्ति से भर दिया गया।
दूसरी ओर आईपीएस डीआईजी व एसपी रैंक के पद अभी खाली पड़े हैं। इन पदों पर कोई भी आईपीएस नहीं आना चाह रहा। सीआरपीएफ से रिटायर हुए पूर्व एडीजी डीसी डे कहते हैं कि पदों के न भरने की एक मात्र वजह मन-माफिक पोस्टिंग का न मिलना, हार्ड एरिया पोस्टिंग समेत कई फायदों का अभाव है।
डे के मुताबिक, सब जानते हैं कि कोई आईपीएस अधिकारी, डीआईजी और एसपी के पद पर केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर आता है, तो उसे हार्ड एरिया पोस्टिंग मिलने के ज्यादा चांस होते हैं। कश्मीर, नक्सल प्रभावित क्षेत्र व उत्तर-पूर्व जैसे इलाके जोखिम भरे होते हैं। कुछ ऐसे आईपीएस भी हैं, जो अच्छे से इन इलाकों में कमांड करते हैं। हालांकि इनकी संख्या बहुत थोड़ी है।
सीआरपीएफ एवं बीएसएफ में तो अब बटालियन की कमान कैडर अफसर ही संभालता है। यहां पर आईपीएस अफसर, डीआईजी या इससे ऊंचे पदों पर ही आते हैं। कई बार यह देखने को मिलता है कि कोई आईपीएस डीआईजी किसी यूनिट या सेंटर को ज्वाइन कर लेता है, लेकिन कुछ ही समय बाद वह दिल्ली या मुंबई जैसे किसी महानगर में अपना तबादला करा लेता है।
उसे इन इलाकों में वे फायदे नहीं मिलते जो एक जिले या किसी दूसरे इलाके में हासिल होते हैं, जो शांत एरिया के तहत आता हो। अधिकांश आईपीएस अपना हित देखते हैं। वह कहां बेहतर तरीके से रह सकता है, उसके मुताबिक वे पोस्टिंग ले लेते हैं।
डे का कहना है कि ये तकरीबन हर अधिकारी की सोच होती है। कैडर अधिकारी भी सोचता है कि वह शांत इलाके में अपने परिवार के साथ रहे। यह अलग बात है कि उसे ऐसा मौका हासिल नहीं होता। अगर होता भी है तो आईजी रैंक पर पहुंचने के बाद मिलता है।
एक रिटायर्ड आईपीएस ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कुछ इलाके ऐसे हैं, जहां पर सीक्रेट फंड आता है। कथित तौर पर यह फंड भी पोस्टिंग लेने की इच्छा जागृत करता है। आज भी हार्ड पोस्टिंग वाले कई इलाके ऐसे हैं, जहां सीक्रेट फंड की वजह से कई अधिकारी शांत पोस्टिंग छोड़कर आ जाते हैं।
इनमें आईजी रैंक पर ही ज्यादा अधिकारी ज्वाइन करते हैं। दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद यह उम्मीद की जा रही थी कि अब केंद्रीय अर्धसैनिक बल एवं केंद्रीय पुलिस संगठनों में आईपीएस के लिए निर्धारित सभी पद भर जाएंगे, मगर आईजी को छोड़कर बाकी के पदों के लिए आईपीएस ने रूझान नहीं दिखाया।
सीबीआई, आईबी, सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, एनपीए, एनसीआरबी और बीपीआरएंडडी जैसी केंद्रीय एजेंसियों में आईपीएस अधिकारियों के दर्जनों पद रिक्त पड़े हैं। बीएसएफ के पूर्व एडीजी एसके सूद का कहना है कि ये सारा चक्कर पोस्टिंग का है।
केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में आईपीएस डीआईजी को फील्ड में काम करना पड़ता है, इसलिए वह चाहता है कि उसे दिल्ली मिल जाए या गृह जिला। अधिकांश आईपीएस, आईजी बड़े-बड़े शहरों में ही पोस्टिंग लेते हैं। केंद्र में आईपीएस अफसर डीआईजी और एसपी स्तर पर ज्वाइन ही नहीं करना चाहते।