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ट्विटर..टूलकिट..टेलीग्राम..खालिस्तान और अब पाकिस्तान..आसान भाषा में समझें 26 जनवरी की हिंसा का पूरा कनेक्शन

Wed, 17 Feb 2021 04:00 PM IST
कुमार संभव कुमार सम्भव जैन, अमर उजाला, नई दिल्ली
कुमार सम्भव जैन, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार संभव Updated Wed, 17 Feb 2021 04:00 PM IST
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26 January violence ToolKit Case connection with twitter telegram khalistan pakistan isi greta thunberg mo dhaliwal disha ravi nikita jacob shantanu bhajan singh bhinder aka iqbal choudhary and peter friedrich
टूलकिट साजिश के कर्ताधर्ता - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस के दिन किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान दिल्ली में हुई हिंसा के तार ट्विटर, टूलकिट से होते हुए टेलीग्राम के रास्ते खालिस्तान तक पहुंचे और अब पाकिस्तान यानी आईएसआई से ताल्लुक जोड़ते नजर आ रहे हैं। दरअसल, यह पूरा खुलासा दिल्ली पुलिस ने किया है। इस मामले में ग्रेटा थनबर्ग के बाद एमओ धालीवाल, दिशा रवि, निकिता जैकब और शांतनु के नाम सामने आए। वहीं, दिल्ली पुलिस इस पूरे मामले में भजन सिंह और पीटर फ्रेडरिक के शामिल होने की बात कह रही है। आखिर टूलकिट है क्या? ये सब लोग कौन हैं और 26 जनवरी की हिंसा से उनका कनेक्शन क्यों जुड़ रहा है? कैसे किसान आंदोलन के उग्र होने के तार ट्विटर, टूलकिट और टेलीग्राम से होते हुए खालिस्तान और अब पाकिस्तान तक पहुंच गए। इस पूरे मामले को आसान भाषा में समझना चाहते हैं तो यह रिपोर्ट खास आपके लिए तैयार की गई है।

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26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस के दिन किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान दिल्ली में हुई हिंसा के तार ट्विटर, टूलकिट से होते हुए टेलीग्राम के रास्ते खालिस्तान तक पहुंचे और अब पाकिस्तान यानी आईएसआई से ताल्लुक जोड़ते नजर आ रहे हैं। दरअसल, यह पूरा खुलासा दिल्ली पुलिस ने किया है। इस मामले में ग्रेटा थनबर्ग के बाद एमओ धालीवाल, दिशा रवि, निकिता जैकब और शांतनु के नाम सामने आए। वहीं, दिल्ली पुलिस इस पूरे मामले में भजन सिंह और पीटर फ्रेडरिक के शामिल होने की बात कह रही है। आखिर टूलकिट है क्या? ये सब लोग कौन हैं और 26 जनवरी की हिंसा से उनका कनेक्शन क्यों जुड़ रहा है? कैसे किसान आंदोलन के उग्र होने के तार ट्विटर, टूलकिट और टेलीग्राम से होते हुए खालिस्तान और अब पाकिस्तान तक पहुंच गए। इस पूरे मामले को आसान भाषा में समझना चाहते हैं तो यह रिपोर्ट खास आपके लिए तैयार की गई है।

26 जनवरी से हुई मामले की शुरुआत

दरअसल, इस पूरे किस्से की शुरुआत होती है 26 जनवरी की हिंसा से। दरअसल, उस दिन किसान दिल्ली में ट्रैक्टर परेड निकाल रहे थे। उस दौरान कुछ उपद्रवियों ने दिल्ली में हिंसा भड़काई और लाल किले पर तिरंगे का अपमान किया। इस मामले में अब तक दीप सिद्धू को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि आरोपी गैंगस्टर लक्खा सिधाना की तलाश जारी है। उस पर एक लाख का इनाम घोषित किया गया है। वहीं, दिल्ली पुलिस ने इस मामले की जांच के दौरान टूलकिट का जिक्र किया।

क्या है टूलकिट और कैसे करता है काम?

दिल्ली पुलिस ने पहली बार टूलकिट का नाम लिया तो देश की आम जनता को समझ ही नहीं आया कि आखिर यह क्या बला है? क्या कोई हथियार है या एप्लिकेशन, जिसके इस्तेमाल से किसानों का आंदोलन उग्र हो गया। हम सबसे पहले बताते हैं कि टूलकिट है क्या और यह काम कैसे करता है? दरअसल, टूलकिट किसी मुद्दे को समझाने के लिए तैयार किया गया एक डॉक्युमेंट होता है। इसे किसी भी थ्योरी को प्रैक्टिकल के रूप में समझाने के लिए बनाया जाता है।  आसान भाषा में समझें तो आप किसी कार्यक्रम को शुरू करने या उसका दायरा बढ़ाने के लिए कुछ एक्शन पॉइंट्स बनाते हैं तो इसे डिजिटल भाषा में टूलकिट ही कहा जाता है। आंदोलन जैसे मामलों में इसी टूलकिट को उन लोगों के साथ साझा किया जाता है, जिनकी मौजूदगी से आंदोलन का असर बढ़ाया जा सकता है। किसान आंदोलन को उग्र करने के पीछे ऐसे ही एक टूलकिट को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।

कैसे तैयार होता है टूलकिट?

अब सवाल यह है कि टूलकिट कैसे तैयार होता है? दरअसल, टूलकिट को किसी रैली, हड़ताल या आंदोलन के दौरान दीवारों पर लगाए जाने वाले पोस्टर का डिजिटल वर्जन कह सकते हैं। इसमें सोशल मीडिया पर इस्तेमाल होने वाले हैशटैग का जिक्र किया जाता है। साथ ही, यह भी बताया जाता है कि किस दिन और किस वक्त किस तरह के ट्वीट्स या पोस्ट करने से आंदोलन को फायदा पहुंच सकता है। टूलकिट में आंदोलनकारियों को कैंपेन से जुड़ी सामग्री और खबरों आदि की जानकारी भी दी जा सकती है। साथ ही, प्रदर्शन करने का तरीका भी बताया जा सकता है। दिल्ली पुलिस का दावा है कि जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने गूगल डॉक्युमेंट के जरिए टूलकिट शेयर किया था।

26 जनवरी और टूलकिट का क्या लेना-देना?

दिल्ली पुलिस की साइबर सेल के जॉइंट कमिश्नर प्रेम नाथ के मुताबिक, टूलकिट के 'प्रायर एक्शंस' में डिजिटल स्ट्राइक करने और 'ऑन ग्राउंड एक्शंस' में 26 जनवरी को फिजिकल एक्शन का जिक्र था। दिल्ली पुलिस का दावा है कि राजधानी में 26 जनवरी को जो कुछ भी हुआ, वह टूलकिट में बताए गए एक्शन प्लान से हूबहू मिलता था। किसे फॉलो करना है और किसे टैग करना है, यह सब तय था। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, इस टूलकिट के पीछे जो संगठन है, वह प्रतिबंधित है और खालिस्तानी समर्थक है।

थनबर्ग का नाम कैसे आया सामने? 

दरअसल, जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने तीन फरवरी को किसान आंदोलन से जुड़ा एक टूलकिट ट्विटर पर पोस्ट किया। हालांकि, बाद में उसे डिलीट कर दिया गया। इस ट्वीट में ग्रेटा ने लिखा था, 'अगर आप किसानों की मदद करना चाहते हैं तो आप इस टूलकिट (दस्तावेज) की मदद ले सकते हैं।' चार फरवरी को ग्रेटा ने दोबारा टूलकिट शेयर किया और लिखा,  'यह नया टूलकिट है, जिसे उन लोगों ने बनाया है, जो इस समय भारत में जमीन पर काम कर रहे हैं। इसके जरिए आप चाहें तो उनकी मदद कर सकते हैं।' दिल्ली पुलिस ने इस टूलकिट को विद्रोह भड़काने वाला दस्तावेज बताया। साथ ही, इसके लेखकों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। गौर करने वाली बात यह है कि यह टूल किट 11 जनवरी को जूम पर हुई मीटिंग के बाद बना लिया गया था और आंदोलनकारियों तक पहुंच चुका था। ग्रेटा ने 3-4 फरवरी को जब इसे ट्वीट किया तो यह चर्चा में आ गया। 

एमओ धालीवाल, दिशा रवि, निकिता जैकब और शांतनु में कनेक्शन?

अब सवाल उठता है कि ग्रेटा थनबर्ग के बाद टूलकिट मामले में एमओ धालीवाल, दिशा रवि, निकिता जैकब और शांतनु का नाम कैसे सामने आया? इन सबके बीच क्या कनेक्शन है? दरअसल, इस मामले में ग्रेटा थनबर्ग के बाद अब तक चार मुख्य किरदार सामने आए हैं। इनके नाम एमओ धालीवाल, दिशा रवि, निकिता जैकब और शांतनु हैं।

एमओ धालीवाल पर क्या हैं आरोप? 

एमओ धालीवाल इस पूरे मामले की मुख्य कड़ी बताया जा रहा है। उसके संगठन पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन पर टूलकिट बनवाने का आरोप है। दिल्ली पुलिस इस संगठन को खालिस्तान समर्थक बता रही है। दरअसल, कनाडा में पैदा हुआ एमओ धालीवाल डिजिटल ब्रांडिंग क्रिएटिव एजेंसी स्काई रॉकेट में डायरेक्टर है। वह पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन का संस्थापक भी है। सितंबर 2020 में उसने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट की थी। इसमें उसने लिखा था कि मैं खालिस्तानी हूं। दिल्ली पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया कि विवादास्पद टूलकिट धालीवाल के संगठन ने बनवाई। गणतंत्र दिवस से पहले 11 जनवरी को जूम पर एक वर्चुअल मीटिंग हुई, जिसमें पुनीत नाम की महिला ने निकिता, दिशा, शांतनु समेत करीब 70 लोगों को जोड़ा। मीटिंग का मकसद यह था कि गणतंत्र दिवस और उससे पहले दुनियाभर में सोशल मीडिया पर खलबली मचा दी जाए। इसके बाद निकिता, दिशा और शांतनु ने टूलकिट का ड्राफ्ट तैयार किया।

कौन है शांतनु, इस मामले में कैसे फंसा?

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, टूलकिट मामले में शांतनु दूसरी अहम कड़ी है। महाराष्ट्र के बीड निवासी शांतनु इंजीनियर है और निकिता जैकब व दिशा का सहयोगी है। वह निकिता के साथ एनजीओ एक्सआर से भी जुड़ा हुआ है। दिल्ली पुलिस की साइबर सेल के जॉइंट कमिश्नर प्रेम नाथ के मुताबिक, शांतनु ने एक ईमेल अकाउंट बनाया, जो टूलकिट वाले गूगल डॉक्युमेंट का ओनर है। शांतनु ने यह टूलकिट दिशा, निकिता और अन्य लोगों के साथ साझा की थी। 

दिशा रवि की गिरफ्तारी क्यों?

दिल्ली पुलिस ने टूलकिट मामले में पहली गिरफ्तारी की, जिसके तहत 22 साल की एमबीए छात्रा दिशा रवि को बंगलुरु से गिरफ्तार किया गया। दरअसल, दिशा ने साल 2019 में क्लाइमेट एक्टिविस्ट ग्रुप फ्राइडे फॉर फ्चूयर की इंडिया विंग शुरू की थी। इस इंटरनेशनल ग्रुप की संस्थापक ग्रेटा थनबर्ग हैं। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, किसान आंदोलन से जुड़े जिस टूलकिट को ग्रेटा ने ट्विटर पर पोस्ट किया था, उसका ड्राफ्ट दिशा ने ही शांतनु और निकिता के साथ मिलकर तैयार किया। साथ ही, उसे संपादित भी किया। इस टूलकिट को सर्कुलेट करने के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाया। वहीं, दिशा ने यह टूलकिट ग्रेटा को टेलीग्राम ऐप के माध्यम से भेजा, लेकिन मामला बिगड़ता देखकर दिशा ने ग्रेटा से इसे हटाने के लिए कहा। बाद में दिशा ने टूलकिट के लिए बना व्हाट्सएप ग्रुप भी डिलीट कर दिया। दिशा का कहना है कि वह किसान आंदोलन का समर्थन करना चाहती थी। ऐसे में उसने इस गूगल डॉक्युमेंट की महज दो लाइनें ही संपादित की थीं। हालांकि, दिशा ने पुलिस पूछताछ में ग्रेटा से चैट करने और ट्वीट डिलीट करने की बात कबूली है।

निकिता जैकब को क्यों तलाश रही पुलिस?

टूलकिट मामले में दिल्ली पुलिस को निकिता जैकब की भी तलाश है। मुंबई निवासी निकिता महाराष्ट्र और गोवा स्टेट बार काउंसिल में रजिस्टर्ड है। वह सोशल जस्टिस और क्लाइमेट एक्टिविस्ट है। सोशल मीडिया प्रोफाइल के मुताबिक, वह बॉम्बे हाईकोर्ट में एडवोकेट है। दिल्ली पुलिस का आरोप है कि निकिता ने दिशा और शांतनु के साथ मिलकर टूलकिट बनाया और संपादित किया। इसके अलावा एमओ धालीवाल के संगठन के साथ जूम एप पर हुई वर्चुअल मीटिंग में भी निकिता शामिल थी। 

पहले खालिस्तान, अब पाकिस्तान से भी कनेक्शन

दिल्ली पुलिस का आरोप है कि इस पूरे मामले में खालिस्तान समर्थक टूलकिट के माध्यम से पूरी दुनिया में भारत की छवि खराब करने की साजिश रच रहे थे। वे भारतीय संस्कृति को नुकसान पहुंचाने के अलावा विदेशों में भारतीय दूतावास को निशाना भी बनाना चाहते थे। षड्यंत्र था कि किसानों के समर्थन में लोग भारतीय दूतावासों का घेराव करें। अब जांच के दौरान दिल्ली पुलिस को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े भजन सिंह भिंडर उर्फ इकबाल चौधरी और पीटर फ्रेडरिक के नाम टूलकिट सूची में मिले हैं। अब पड़ताल की जा रही है कि इसके लिए आईएसआई की ओर से फंडिंग तो नहीं हुई। पुलिस का कहना है कि निकिता जैकब और शांतनु की गिरफ्तारी के बाद ही इसका खुलासा हो पाएगा। 
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