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Pension: 25 साल बीएसएफ में सेवा, वीआरएस के 16 महीने बाद भी पेंशन नहीं; PM मोदी और कार्मिक मंत्रालय से की अपील
सार
बीएसएफ के पूर्व हवलदार ने पीएम मोदी और कार्मिक मंत्रालय से अपना पेंशन शुरू करने की गुहार लगाई है। दरअसल, पूर्व हवलदार के ईपीपीओ वाली फाइल की 'पीडीएफ' डैमेज हो गई है। ऐसे में केस को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। 'भविष्य पोर्टल' पर ईपीपीओ की पीडीएफ फाइल न तो 'पीएओ' स्तर पर और न ही 'सीपीएओ' लेवल पर दिखाई पड़ रही है।
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सरकार के बीएसएफ हवलदार की गुहार
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सीमा सुरक्षा बल 'बीएसएफ' में 25 साल और 17 दिन तक सेवा देने वाले हवलदार गौतम बच्छार ने 31 जुलाई 2023 को वीआरएस ले लिया। ऐसे केस में एक दो माह के भीतर पेंशन शुरु होने का नियम है। पूर्व हवलदार को अभी तक पेंशन नहीं मिल पा रही है। उसे कई सरकारी कार्यालयों के धक्के खाने पड़ रहे हैं। बीएसएफ की 31वीं बटालियन ने उनका पेंशन केस, पीएडी बीएसएफ को फॉरवर्ड किया था। वहां से वह केस सीपीएओ के पास पहुंचा। सीपीएओ की तरफ से कहा गया कि उक्त मामले की फाइल वापस कर दी गई है। इसके पीछे जो वजह बताई गई है वह हैरान करने वाली थी। उसमें कहा गया कि पूर्व हवलदार के ईपीपीओ वाली फाइल की 'पीडीएफ' डैमेज हो गई है। ऐसे में केस को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। 'भविष्य पोर्टल' पर ईपीपीओ की पीडीएफ फाइल न तो 'पीएओ' स्तर पर और न ही 'सीपीएओ' लेवल पर दिखाई पड़ रही है। नतीजा, पूर्व जवान धक्के खाने के लिए मजबूर है। बीएसएफ, डीओपीटी और पीएम मोदी को पत्र भेजा गया है, लेकिन अभी तक पूर्व हवलदार गौतम को राहत नहीं मिल सकी।
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बता दें कि गौतम बच्छार ने 31 जुलाई 2023 को बीएसएफ की 31वीं बटालियन से बतौर हवलदार वीआरएस ले ली थी। उसका पीपीओ नंबर 021862310757 जनरेट किया गया, मगर पेंशन शुरु नहीं हो सकी। इस संबंध में बीएसएफ पीएडी के वरिष्ठ लेखा अधिकारी द्वारा अगस्त 2024 में सीपीएओ को पत्र लिखकर गौतम की पेंशन रिलीज करने की मांग की गई। इससे पहले सीपीएओ की तरफ से कहा गया था कि उक्त मामले की फाइल वापस कर दी गई है। इसके पीछे जो वजह बताई गई है वह हैरान करने वाली थी। कहा गया कि हवलदार के ईपीपीओ वाली फाइल का 'पीडीएफ' डैमेज हो गई है। ऐसे में केस को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। 'भविष्य पोर्टल' पर ईपीपीओ की पीडीएफ फाइल न तो 'पीएओ' स्तर पर और न ही 'सीपीएओ' लेवल पर दिखाई पड़ रही है।
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इस मामले का हल निकालने के लिए बीएसएफ की 31वीं बटालियन के कमांडेंट द्वारा 'भविष्य' पोर्टल की तकनीकी टीम से सरकारी ईमेल के द्वारा संपर्क किया गया। इसके बावजूद वीआरएस लेने वाले जवान की पेंशन शुरु नहीं हो सकी। इतना ही नहीं, इस बाबत पीएफएमएस हेल्प डेस्क पर भी संपर्क किया गया। वहां से जवाब मिलता है कि पीएओ द्वारा 'भविष्य' से केस पापस ले लिया गया है। यहां पर भी हैरान करने वाली बात देखने को मिली। वापस किया हुआ केस डीडीओ लेवल पर नहीं दिख रहा था। ऐसे में उस केस की फाइल में सुधार कैसे होगा। उसे दोबारा से अपलोड भी नहीं किया जा सकेगा। जब सालभर तक कुछ नहीं हुआ तो बीएसएफ पीएडी के वरिष्ठ लेखा अधिकारी द्वारा 'भविष्य' पोर्टल की तकनीकी टीम को पत्र लिखा गया। इसमें डैमेज पीडीएफ फाइल को लेकर बात की गई।
बीएसएफ की तरफ से कहा गया कि उक्त केस की फाइल डीडीओ लेवल पर नहीं दिख रही है। सीपीएओ स्तर पर भी वह फाइल नहीं दिख रही। बीएसएफ की 31वीं बटालियन के कमांडेंट ने इस संबंध में पत्राचार किया था, मगर उसके बावजूद मामले का हल नहीं निकल सका। इस केस का जल्द समाधान किया जाए। नवंबर 2024 को स्पेशल डीजी बीएसएफ पूर्वी कमांड की पर्स शाखा द्वारा भी पीएडी बीएसएफ को पेंशन रिलीज करने के लिए पत्र भेजा गया। उसमें बताया गया कि पीपीओ नंबर जनरेट हो गया, लेकिन वह ईपीपीओ पर दिख नहीं रहा।
सेंट्रल पेंशन अकाउंट्स ऑफिस 'सीपीएओ' ने कहा, ईपीपीओ को दोबारा जनरेट/अपलोड करो। ईपीपीओ अगर वापस होता है तो उसे मैनुअली प्रोसेस नहीं किया जा सकता। ऐसे में आप बीएसएफ के पीएओ से संपर्क करें।
सेंट्रल पेंशन अकाउंट्स ऑफिस 'सीपीएओ' ने कहा, ईपीपीओ को दोबारा जनरेट/अपलोड करो। ईपीपीओ अगर वापस होता है तो उसे मैनुअली प्रोसेस नहीं किया जा सकता। ऐसे में आप बीएसएफ के पीएओ से संपर्क करें।
बीएसएफ के पीएडी की तरफ से अगस्त 2022 में सीपीएओ को पत्र लिखा गया। उसमें कहा गया है कि गौतम बच्छार को वीआरएस लेने के इतने महीने बाद भी पेंशन नहीं मिल रही है। जल्द ही गौतम की पेंशन शुरु कराई जाए। गौतम बच्छार ने पिछले साल दिसंबर में चीफ कंट्रोलर 'पेंशन', सेंट्रल पेंशन अकाउंटिंग ऑफिस, व्यय विभाग, वित्त मंत्रालय को भी अपनी शिकायत भेजी है। इसमें गौतम ने लिखा है कि उनकी पेंशन अविलंब जारी कराई जाए। पेंशन शुरु होने में जो देरी हुई है, उस राशि का ब्याज दिया जाए। शिकायतकर्ता ने 16 माह से पेंशन न मिलने को लेकर जो दिक्कतें उठाई हैं, उसका हरजाना दिया जाए।
बतौर गौतम, उस अधिकारी की जिम्मेदारी तय हो, जिसके चलते पेंशन जारी होने में अनावश्यक देरी हो रही है। वह अधिकारी बीएसएफ पीएडी या सीपीएओ का ही क्यों न हो, उसके खिलाफ कार्रवाई हो। अगर सात दिन के भीतर शिकायतकर्ता को कोई राहत नहीं मिलती है तो उसके बाद संबंधित अधिकारी या विभाग के खिलाफ कानूनी मदद एवं अदालत के न्याय का रास्ता अख्तियार किया जाएगा। बीएसएफ के पूर्व हवलदार ने उक्त मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी 30 दिसंबर 2024 को पत्र लिखा है। इसमें गौतम ने लिखा, पेंशन कोई भत्ता नहीं है। यह एक मौलिक अधिकार है। एक जवान, जिसने देश के लिए रक्षा और सिविल सेवा की है, यह उसका सम्मान है। मेरे द्वारा किए गए इतने प्रयासों के बावजूद बीएसएफ पीएडी और सीपीएओ, पेंशन नहीं दे पा रहे हैं। पेंशन न मिलने के कारण मुझे वित्तीय परेशानी झेलनी पड़ रही है। बीएसएफ के पूर्व जवान ने कहा, मुझे भावनात्मक तरीके से प्रताड़ित किया जा रहा है।देश सेवा के बाद धक्के खाने पड़ रहे हैं। पेंशन मिलने में देरी क्यों रही है, इस मामले की न्यायिक जांच कराई जाए।
गौतम बताते हैं, अगर ई पोर्टल पर कुछ नहीं दिख रहा है तो उसमें मेरा क्या कसूर है। मैने 25 साल 17 दिन नौकरी की है। अब वीआरएस ली तो मुझे धक्के खाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। आज तो डिजिटल का जमाना है। कोई भी दिक्कत, तुरंत हल हो जाती है। अगर पीडीएफ को दोबारा बनाकर अपलोड करना है तो उसे तुरंत किया जाए। इसे कौन करेगा, यह किसकी जिम्मेदारी है। पीडीएफ तैयार करने में कितना वक्त लगता है। भविष्य पोर्टल पर कौन करेक्शन करेगा। पहले वाला पीडीएफ डिलीट करो और दूसरा पीडीएफ तैयार कर दो। बीएसएफ की तरफ से भविष्य पोर्टल पर सभी तरह की जानकारी मुहैया कराई गई है। ईपीपीओ का पीडीएफ नहीं दिख रहा है, यह कह कर 16 माह से पेंशन लटका रखी है। डीओपीटी के पेंशन विभाग को भी लिख दिया है। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही। अगर ईपीपीओ डेमेज है हुआ तो उसे दोबारा से जनरेट कर दो।
भविष्य पोर्टल का लक्ष्य सेवानिवृत्ति के दिन ही सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सभी सेवानिवृत्ति बकाया का भुगतान और पेंशन भुगतान आदेश (पीपीओ) की डिलीवरी सुनिश्चित करना है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए, विभाग ने 'भविष्य' नामक एक ऑनलाइन पेंशन स्वीकृति और भुगतान ट्रैकिंग प्रणाली शुरू की है। यह प्रणाली व्यक्ति के साथ-साथ प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा पेंशन मंजूरी और भुगतान प्रक्रिया की ऑनलाइन ट्रैकिंग प्रदान करती है। यह प्रणाली पेंशनभोगियों के व्यक्तिगत और सेवा संबंधी विवरण दर्ज करती है। पेंशन की प्रोसेसिंग के लिए फॉर्म ऑनलाइन जमा किए जा सकते हैं। यह सेवानिवृत्त कर्मचारियों को एसएमएस/ई-मेल के माध्यम से पेंशन मंजूरी प्रक्रिया की प्रगति के बारे में सूचित करता रहता है। यह प्रणाली पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करके पेंशन के भुगतान में देरी को रोकती है।
पिछले कुछ दिनों में बीएसएफ में यह दूसरा केस सामने आया है। इससे पहले बीएसएफ में 24 साल और 8 माह तक सेवा देने वाले हवलदार रिकेश कर ने जब स्वास्थ्य कारणों से वीआरएस लिया तो उन्हें पेंशन मिलने के लाले पड़ गए। सामान्य तौर पर यह नियम रहता है कि वीआरएस लेने के 90 दिन के भीतर पेंशन संबंधी सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएं। पूर्व हवलदार रिकेश ने वीआरएस तो ले ली, लेकिन तीन महीने बाद भी उनकी पेंशन शुरु नहीं हो सकी। बीएसएफ की 42वीं बटालियन ने उनका पेंशन केस, पीएडी बीएसएफ को फॉरवर्ड किया था। तीन माह का इंतजार करने के बाद जब रिकेश ने पेंशन विभाग में शिकायत की तो एकाएक उसे सूचित किया गया कि उनका पेंशन केस पीएओ द्वारा एचओओ को आब्जरवेशन के साथ वापस लौटा दिया गया है। रिकेश ने इस मामले में आरटीआई भी लगाई थी। साथ ही बीएसएफ डीजी से भी प्रार्थना की थी कि वे इस केस में हस्तक्षेप कर उनकी मदद करें। कड़ी मशक्कत के बाद उनका मामला अब सुलझ गया है।
पिछले कुछ दिनों में बीएसएफ में यह दूसरा केस सामने आया है। इससे पहले बीएसएफ में 24 साल और 8 माह तक सेवा देने वाले हवलदार रिकेश कर ने जब स्वास्थ्य कारणों से वीआरएस लिया तो उन्हें पेंशन मिलने के लाले पड़ गए। सामान्य तौर पर यह नियम रहता है कि वीआरएस लेने के 90 दिन के भीतर पेंशन संबंधी सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएं। पूर्व हवलदार रिकेश ने वीआरएस तो ले ली, लेकिन तीन महीने बाद भी उनकी पेंशन शुरु नहीं हो सकी। बीएसएफ की 42वीं बटालियन ने उनका पेंशन केस, पीएडी बीएसएफ को फॉरवर्ड किया था। तीन माह का इंतजार करने के बाद जब रिकेश ने पेंशन विभाग में शिकायत की तो एकाएक उसे सूचित किया गया कि उनका पेंशन केस पीएओ द्वारा एचओओ को आब्जरवेशन के साथ वापस लौटा दिया गया है। रिकेश ने इस मामले में आरटीआई भी लगाई थी। साथ ही बीएसएफ डीजी से भी प्रार्थना की थी कि वे इस केस में हस्तक्षेप कर उनकी मदद करें। कड़ी मशक्कत के बाद उनका मामला अब सुलझ गया है।