{"_id":"5d39a0e78ebc3e6ca8682c13","slug":"25-cut-in-grants-of-gujarat-school-that-not-participate-in-principle-appointment-drive","type":"story","status":"publish","title_hn":"25 प्रतिशत अनुदान कटने से नाराज गुजरात के कई स्कूल, इस वजह से शिक्षा विभाग ने दिया दंड","category":{"title":"Education","title_hn":"शिक्षा","slug":"education"}}
25 प्रतिशत अनुदान कटने से नाराज गुजरात के कई स्कूल, इस वजह से शिक्षा विभाग ने दिया दंड
Thu, 25 Jul 2019 08:22 PM IST
Trainee Trainee
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: Trainee Trainee
Updated Thu, 25 Jul 2019 08:22 PM IST
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : social media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गुजरात शिक्षा विभाग ने उन अनुदानित माध्यमिक और उच्च विद्यालयों के खिलाफ कार्रवाही करने का मन बना लिया है, जिन्होंने राज्य सरकार द्वारा चालाए गए प्रधानाचार्यो की नियुक्ती अभियान में हिस्सा नहीं लिया। ऐसे विद्यालयों का 25 प्रतिशत अनुदान काट लिया जाएगा। शिक्षा विभाग के इस कदम का स्कूल मैनेजमेंट और ट्रस्टी जमकर विरोध कर रहे हैं। जिसके चलते उन्होंने सरकार को इसके विरोध में पत्र भी लिखा है।
गुजरात स्टेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने शिक्षा विभाग से गुहार लगाई है कि अभियान में भाग न लेने वाले हर विद्यालय के कारणों की अलग से जांच की जानी चाहिए। एसोसिएशन का कहना है कि कुछ विद्यालय वास्तविक कारणों के चलते अभियान में भाग नहीं ले पाए थे।
4 जून से शुरू हुए अभियान में 2,123 प्रधानाचार्यों की भर्ती की जानी थी। लेकिन कई विद्यालयों ने अभियान में भाग नहीं लिया, जिसके चलते 25 प्रतिशत स्थान रिक्त रह गए। जिसके बाद स्कूलों के आयुक्त ने जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखकर ऐसे स्कूलों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिये।
विज्ञापन
एसोसिएशन के अध्यक्ष भास्कर पटेल का कहना है कि एक स्कूल के सालाना 1.25 से 1.50 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जाता है। जिसमें स्कूलों को बुनियादी ढांचे और उपकरणों की लागत के साथ-साथ रख-रखाव का भी ध्यान रखना पड़ता है। अगर अनुदान से 25 प्रतिशत काट लिया जाएगा तो सभी स्कूल गंभीर समस्या में आ जाएंगे।
विज्ञापन
गुजरात स्टेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने शिक्षा विभाग से गुहार लगाई है कि अभियान में भाग न लेने वाले हर विद्यालय के कारणों की अलग से जांच की जानी चाहिए। एसोसिएशन का कहना है कि कुछ विद्यालय वास्तविक कारणों के चलते अभियान में भाग नहीं ले पाए थे।
विज्ञापन
4 जून से शुरू हुए अभियान में 2,123 प्रधानाचार्यों की भर्ती की जानी थी। लेकिन कई विद्यालयों ने अभियान में भाग नहीं लिया, जिसके चलते 25 प्रतिशत स्थान रिक्त रह गए। जिसके बाद स्कूलों के आयुक्त ने जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखकर ऐसे स्कूलों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिये।
विज्ञापन
एसोसिएशन के अध्यक्ष भास्कर पटेल का कहना है कि एक स्कूल के सालाना 1.25 से 1.50 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जाता है। जिसमें स्कूलों को बुनियादी ढांचे और उपकरणों की लागत के साथ-साथ रख-रखाव का भी ध्यान रखना पड़ता है। अगर अनुदान से 25 प्रतिशत काट लिया जाएगा तो सभी स्कूल गंभीर समस्या में आ जाएंगे।
कमेंट
कमेंट X