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एनपीआर में अब मांगी जा सकती है 23 तरह की जानकारी, 2010 में दी गई थीं 16 सूचनाएं

Wed, 01 Jan 2020 09:37 PM IST
Mohit Mudgal डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Mohit Mudgal Updated Wed, 01 Jan 2020 09:37 PM IST
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23 types of information can now be asked in NPR, 16 type of information was asked in 2010
गृह मंत्रालय (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को लेकर जो व्यापक डेटाबेस तैयार होगा, उसमें लोगों को 23 तरह की जानकारी देनी पड़ सकती है। इससे पहले 2010 में जब एनपीआर तैयार हुआ तो 16 सूचनाएं मांगी गई थी। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि इस बार के एनपीआर में बायोमेट्रिक जानकारी नहीं ली जाएगी। साथ ही लोगों से जुटाई गई जानकारी के आधार पर कोई पहचान पत्र भी जारी नहीं होगा। गृह मंत्रालय के सूत्रों ने यह पुष्टि की है।

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राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर देश के सामान्य निवासियों का एक व्यापक डेटाबेस है। इसे नागरिकता अधिनियम 1955 के प्रावधानों के अंतर्गत और नागरिकता (नागरिकों का पंजीकरण एवं राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी करना) नियमावली, 2003 में निहित प्रक्रियाओं के आधार पर तैयार किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, पिछले कई दिनों से एनपीआर को लेकर कई तरह की भ्रामक सूचनाएं आ रही थी। जैसे, लोगों से बायोमेट्रिक जानकारी ली जाएगी। उन्हें एक पहचान पत्र जारी किया जाएगा।गृह मंत्रालय एनपीआर का जो फॉर्म तैयार कर रहा है, उसमें बायोमेट्रिक जानकारी लेने और पहचान पत्र जारी करने का कोई प्रावधान शामिल नहीं किया गया है।

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एनपीआर 2010 में मांगी गई थी ये जानकारी...

व्यक्ति का नाम, मुखिया से संबंध, पिता का नाम, माता का नाम, पति/पत्नी का नाम (यदि विवाहित), लिंग, जन्म तिथि, वैवाहिक स्थिति, जन्म का स्थान, घोषित राष्ट्रीयता, सामान्य निवासी का वर्तमान पता, वर्तमान पते पर रहने की अवधि, स्थायी निवास पता, व्यवसाय/क्रियाकलाप और शैक्षिक योग्यता शामिल थी। इसके अलावा यूआईडीएआई के माध्यम से दोहराव को रोकने और आधार नंबर बनाने के उद्देश्य हेतु 05 वर्ष और उससे ऊपर के व्यक्तियों के लिए ओआरजीआई को आवंटित राज्यों में तीन बायोमेट्रिक वस्तुत: फोटो, 10 अंगुलियों के छाप और आयरिस स्केन भी एकत्रित किए गए थे।

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एनपीआर 2020 के परीक्षण-पूर्व में शामिल अतिरिक्त फील्ड...

आधार नंबर, मोबाइल नंबर, पैन, मतदाता पहचान संख्या, ड्राइविंग लाइसेन्स, पासपोर्ट नम्बर (केवल भारतीय), पिछले निवास स्थान, निवासियों के पिता और माता के जन्म स्थान और जन्म की तिथि। एनपीआर को 2010 में पहली बार तैयार किया गया था। इसके बाद हुए जन्म, मृत्यु और प्रवास के कारण बदलाव को सम्मिलित करने के लिए, इसे फिर से अपडेट करने की जरूरत है। हालांकि 2015 के दौरान कुछ घटकों को अपडेट किया गया था। 

एनपीआर में परिवार एवं वैयक्तिक जनसांख्यिकीय विवरण शामिल होगा। विभिन्न जन कल्याण एवं लाभार्थी उन्मुख सरकारी योजनाएं जैसे कि आयुष्मान भारत, जन धन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, सौभाग्य योजना, लोक वितरण प्रणाली (पीडीएस) आदि परिवार आधारित हैं। इनके पारदर्शी एवं कुशल कार्यान्वन के लिए एनपीआर आंकड़ों का प्रयोग किया जा सकता है । एनपीआर डाटा को एकत्रित करने के लिए एक मोबाइल ऐप का प्रयोग किया जाएगा। प्रगणकों को प्रत्येक घर पर भेजना अपेक्षित है, क्योंकि सभी व्यक्ति अपने आप डाटा को अपडेट नहीं कर पाएंगे। इसके अतिरिक्त, घर-घर गणना सुनिश्चित करेगी कि पूरी जनसंख्या को शामिल कर लिया गया है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि एनपीआर अपडेट करने के दौरान घर घर गणना के समय कोई दस्तावेज एकत्रित नहीं किए जा रहे हैं।

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