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देश के 21 बहादुर बच्चों के अरमानों पर फिरा पानी, गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल नहीं हो पाएंगे

Fri, 18 Jan 2019 09:45 PM IST
Nilesh Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Nilesh Kumar Updated Fri, 18 Jan 2019 09:45 PM IST
सार

  • छह दशक से चली आ रही परंपरा पर लगेगा ब्रेक
  • आईसीसीडब्ल्यू पर लगा वित्तीय अनमितता का आरोप
  • महिला व बाल कल्याण मंत्रालय ने कर लिया किनारा 
  • बाल वीरता पुरस्कार वाले बच्चे शामिल नहीं हो पाएंगे

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21 brave children of country could not perform in republic day parade
गणतंत्र दिवस उत्सव की प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social Media

विस्तार

गांव, समाज, कस्बे व शहर, हमारे बीच कुछ ऐसे असाधारण बच्चे होते हैं, जो अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने में पीछे नहीं हटते। कुछ अपनी जान पर खेलकर दूसरों की जान बचा लेते हैं, तो कुछ कहीं गलत होता देख पुलिस की मदद कर अपराध पर अंकुश लगाते हैं। ऐसे बच्चों का चयन बाल वीरता पुरस्कार के लिए किया जाता रहा है। इन बच्चों को मेडल, नकद व स्कॉलरशिप प्रोग्राम से पुरस्कृत किया जाता रहा है। इसके साथ ही सबसे खास बात यह होती है कि गणतंत्र दिवस पर ये बच्चे परेड में शामिल होते हैं। 
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मिली जानकारी के अनुसार, अब तक देश के 950 से ज्यादा बहादुर बच्चे पुरस्कार पा चुके हैं। सभी बच्चे गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल रहे थे। बाल वीरता पुरस्कार के लिए इस बार भी देशभर से 21 बहादुर बच्चों का चयन हुआ है, लेकिन ये बच्चे गणतंत्र दिवस में शामिल नहीं हो पाएंगे। पिछले छह दशक से चली आ रही परंपरा पर इस साल ब्रेक लग जाएगा। इसके पीछे का कारण बताया जा रहा है, इन बच्चों का चयन करने वाली संस्था भारतीय बाल कल्याण परिषद पर वित्तीय अनियमितता का आरोप। दिल्ली हाईकोर्ट ने काउंसिल पर सवाल उठाए थे। उसके बाद महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने खुद को काउंसिल से अलग कर लिया है। 
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बदली प्रक्रिया, पुरस्कार का नाम भी बदला

देश को गणतंत्र घोषित होने के सात साल बाद 1957 से बहादुर बच्चों का चयन किया जाता रहा था। भारतीय बाल कल्याण परिषद की चयन समिति राज्यों से आए प्रस्तावों के आधार पर इन बच्चों का चयन करती थी। 6-18 वर्ष आयुवर्ग के बच्चे, जिन्होंने बहादुरी का काम किया हो, उनका चयन बाल वीरता पुरस्कार के लिए किया जाता था। जवाहर लाल नेहरू के जन्मदिन यानि कि बाल दिवस पर बच्चों को पुरस्कृत किया जाता रहा था। 
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अब इस पुरस्कार का नाम बदलकर प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार कर दिया गया है। इनका चयन महिला एवं बाल विकास मंत्रालय करती है। इसके तहत छह कैटेगरी बनाई गई है। बहादुरी के अलावे खेल, कला-संस्कृति, इनोवेशन, स्कॉलेस्टिक और समाजसेवा। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने उक्त छह कैटगरी में इस बार 26 बच्चों का चयन किया गया है। ये सभी बच्चे परेड में शामिल होंगे। 

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार के तहत इन बच्चों का चयन 

21 brave children of country could not perform in republic day parade
republic day parade

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार के तहत  इस बार 26 बच्चों का चयन किया गया है। ये सभी बच्चे परेड में शामिल होंगे। बहादुरी के लिए मध्य प्रदेश के भाई-बहन कार्तिक गोयल और आद्रिका गोयल, कर्नाटक के निखिल जितूड़ी ने मिसाल पेश की, जिसके आधार पर उनका चयन हुआ।

सके अलावे समाजसेवा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की आइना दीक्षित, पश्चिम बंगाल के आर्यमान लखोटिया और कर्नाटक के प्रत्यक्ष बीआर का चयन किया गया था। वहीं, दूसरी ओर स्पोर्ट्स में महाराष्ट्र के ए देवकुले, आंध्र प्रदेश के प्रियम टी, हरियाणा की शिवांगी और अनीश, तमिलनाडु के आर प्रागनंद्धा के साथ अंडमान निकोबार के एशो का भी चयन हुआ है।

इनोवेशन के क्षेत्र में दिल्ली की माधव लवकारे, कनार्टक के मोहम्मद सुहैल, अरुणिमा सेन, एयू नचिकेता कुमार, तमिलनाडु के अश्वथ सूर्यनारायण, ओडिशा के नैसर्गिग लैंका का चयन किया गया था।

कला और संस्कृति के क्षेत्र में महाराष्ट्र के टी अतुल पांड्या, तमिलनाडु के राम एम, गुजरात के देव दुष्यंत जोशी, कर्नाटक के विनायक एम, पश्चिम बंगाल के आर्यमान अग्रवाल और स्कॉलेस्टिक में दिल्ली के निशांत धनखड़, ओडिशा के आयुष्मान त्रिपाठी और राजस्थान की मेघा चयनित की गई थी।

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