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विपक्ष की महारैली में 22 दलों के शामिल होने का दावा, पर शामिल कितने हुए?
Sat, 19 Jan 2019 09:34 PM IST
अभिषेक त्यागी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक त्यागी
Updated Sat, 19 Jan 2019 09:34 PM IST
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कोलकाता में विपक्ष की महारैली
- फोटो : PTI
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कोलकाता में शनिवार को हुई विपक्ष की महारैली में 22 दलों के जुटने की बात कही गई। लेकिन यहां पहुंचे दलों की गिनती करें तो ये दावा सही नजर नहीं आता। कांग्रेस समेत करीब 15 दल ममता की बुलाई रैली में पहुंचे थे। इस रैली तमाम बड़े नेता पहुंचे जिनमें फारुक अब्दुल्ला-उमर अब्दुल्ला और अजित सिंह-जयंत चौधरी की पिता-पुत्र जोड़ी भी नजर आई। सभी ने एक सुर में मोदी सरकार के खिलाफ हुंकार भरी।
इन 15 दलों ने रैली में शिरकत
1. तृणमूल कांग्रेस 2. कांग्रेस 3. राष्ट्रीय जनता दल 4. आम आदमी पार्टी 5. तेलगु देशम पार्टी 6. जनता दल(सेक्यूलर), 7. समाजवादी पार्टी 8. राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी 9. झारखंड मुक्ति मोर्चा 10. द्रविड़ मुनेत्र कड़गम 11. नेशनल कांफ्रेंस 12. राष्ट्रीय लोक दल 13. बहुजन समाज पार्टी 14. लोकतांत्रिक जनता दल 15. झारखंड विकास मोर्चा
कितने दल हुए शामिल?
हालांकि शनिवार की रैली में ममता बनर्जी ने दावा किया कि 22 दलों के नेता यहां पहुंचे। इसके अलावा कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने भी कहा कि आज यहां 22 रंगों का इंद्रधनुष निकला है। लेकिन अगर गिनती की जाए तो 15 दल ही नजर आते हैं। हालांकि मीडिया में यह भी कहा गया कि 20 दलों के नेताओं ने इसमें शिरकत की।
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विपक्ष की हुंकार
आगामी लोकसभा चुनाव में सभी विपक्षी दलों को साथ लाने की पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कवायद के तहत शनिवार को यहां आयोजित विशाल रैली में एक दर्जन से अधिक विपक्षी दलों के नेता एक मंच पर नजर आए और उन्होंने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को उखाड़ फेंकने की हुंकार भरी।तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता की ओर से आयोजित इस रैली में शामिल होकर 25 वरिष्ठ नेताओं ने अपनी एकजुटता प्रदर्शित की।
इन नेताओं ने अपनी पार्टियों के बीच के मतभेद को दरकिनार करने का आह्वान करते हुए कहा कि वे चुनावों के बाद प्रधानमंत्री पद के मुद्दे पर फैसला कर सकते हैं। कुछ नेताओं ने सुझाव दिया कि विपक्ष को हर चुनाव क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार के खिलाफ अपना एक संयुक्त उम्मीदवार उतारना चाहिए। उन्होंने अप्रैल-मई में संभावित लोकसभा चुनावों से पहले और संयुक्त रैलियां करने का फैसला किया। अगली रैलियां नई दिल्ली और आंध्र प्रदेश की राजधानी अमरावती में होंगी।
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इस रैली में हिस्सा नहीं लिया, लेकिन पार्टी ने लोकसभा में अपने नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और पश्चिम बंगाल से राज्यसभा सदस्य अभिषेक मनु सिंघवी को प्रतिनिधि बनाकर इस रैली में भेजा। रैली को संबोधित करते हुए खड़गे ने सोनिया गांधी का एक संदेश पढ़कर सुनाया, जिसमें पार्टी की पूर्व अध्यक्ष ने रैली की सफलता की शुभकामनाएं दी थीं।
जनसैलाब की मौजूदगी में हुई इस रैली में पूर्व प्रधानमंत्री एवं जनता दल सेक्यूलर प्रमुख एच डी देवेगौड़ा, तीन वर्तमान मुख्यमंत्री - चंद्रबाबू नायडू (तेलुगु देशम पार्टी), एचडी कुमारस्वामी (जनता दल सेक्यूलर) और अरविंद केजरीवाल (आम आदमी पार्टी), छह पूर्व मुख्यमंत्री - अखिलेश यादव (समाजवादी पार्टी), फारुख अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला (दोनों नेशनल कांफ्रेंस), बाबूलाल मरांडी (झारखंड विकास मोर्चा), हेमंत सोरेन (झारखंड मुक्ति मोर्चा) और इसी हफ्ते भाजपा छोड़ चुके गेगांग अपांग, आठ पूर्व केंद्रीय मंत्री- मल्लिकार्जन खड़गे (कांग्रेस), शरद यादव (लोकतांत्रिक जनता दल), अजित सिंह (राष्ट्रीय लोक दल), शरद पवार (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी), यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी, शत्रुघ्न सिन्हा और राम जेठमलानी ने हिस्सा लिया।
इनके अलावा, राजद नेता व बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी, बसपा सुप्रीमो मायावती के प्रतिनिधि एवं राज्यसभा सदस्य सतीश चंद्र मिश्रा, पाटीदार आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल और जानेमाने दलित नेता व गुजरात के निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी भी मंच पर नजर आए।
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इन 15 दलों ने रैली में शिरकत
1. तृणमूल कांग्रेस 2. कांग्रेस 3. राष्ट्रीय जनता दल 4. आम आदमी पार्टी 5. तेलगु देशम पार्टी 6. जनता दल(सेक्यूलर), 7. समाजवादी पार्टी 8. राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी 9. झारखंड मुक्ति मोर्चा 10. द्रविड़ मुनेत्र कड़गम 11. नेशनल कांफ्रेंस 12. राष्ट्रीय लोक दल 13. बहुजन समाज पार्टी 14. लोकतांत्रिक जनता दल 15. झारखंड विकास मोर्चा
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कितने दल हुए शामिल?
हालांकि शनिवार की रैली में ममता बनर्जी ने दावा किया कि 22 दलों के नेता यहां पहुंचे। इसके अलावा कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने भी कहा कि आज यहां 22 रंगों का इंद्रधनुष निकला है। लेकिन अगर गिनती की जाए तो 15 दल ही नजर आते हैं। हालांकि मीडिया में यह भी कहा गया कि 20 दलों के नेताओं ने इसमें शिरकत की।
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विपक्ष की हुंकार
आगामी लोकसभा चुनाव में सभी विपक्षी दलों को साथ लाने की पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कवायद के तहत शनिवार को यहां आयोजित विशाल रैली में एक दर्जन से अधिक विपक्षी दलों के नेता एक मंच पर नजर आए और उन्होंने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को उखाड़ फेंकने की हुंकार भरी।तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता की ओर से आयोजित इस रैली में शामिल होकर 25 वरिष्ठ नेताओं ने अपनी एकजुटता प्रदर्शित की।
इन नेताओं ने अपनी पार्टियों के बीच के मतभेद को दरकिनार करने का आह्वान करते हुए कहा कि वे चुनावों के बाद प्रधानमंत्री पद के मुद्दे पर फैसला कर सकते हैं। कुछ नेताओं ने सुझाव दिया कि विपक्ष को हर चुनाव क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार के खिलाफ अपना एक संयुक्त उम्मीदवार उतारना चाहिए। उन्होंने अप्रैल-मई में संभावित लोकसभा चुनावों से पहले और संयुक्त रैलियां करने का फैसला किया। अगली रैलियां नई दिल्ली और आंध्र प्रदेश की राजधानी अमरावती में होंगी।
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इस रैली में हिस्सा नहीं लिया, लेकिन पार्टी ने लोकसभा में अपने नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और पश्चिम बंगाल से राज्यसभा सदस्य अभिषेक मनु सिंघवी को प्रतिनिधि बनाकर इस रैली में भेजा। रैली को संबोधित करते हुए खड़गे ने सोनिया गांधी का एक संदेश पढ़कर सुनाया, जिसमें पार्टी की पूर्व अध्यक्ष ने रैली की सफलता की शुभकामनाएं दी थीं।
जनसैलाब की मौजूदगी में हुई इस रैली में पूर्व प्रधानमंत्री एवं जनता दल सेक्यूलर प्रमुख एच डी देवेगौड़ा, तीन वर्तमान मुख्यमंत्री - चंद्रबाबू नायडू (तेलुगु देशम पार्टी), एचडी कुमारस्वामी (जनता दल सेक्यूलर) और अरविंद केजरीवाल (आम आदमी पार्टी), छह पूर्व मुख्यमंत्री - अखिलेश यादव (समाजवादी पार्टी), फारुख अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला (दोनों नेशनल कांफ्रेंस), बाबूलाल मरांडी (झारखंड विकास मोर्चा), हेमंत सोरेन (झारखंड मुक्ति मोर्चा) और इसी हफ्ते भाजपा छोड़ चुके गेगांग अपांग, आठ पूर्व केंद्रीय मंत्री- मल्लिकार्जन खड़गे (कांग्रेस), शरद यादव (लोकतांत्रिक जनता दल), अजित सिंह (राष्ट्रीय लोक दल), शरद पवार (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी), यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी, शत्रुघ्न सिन्हा और राम जेठमलानी ने हिस्सा लिया।
इनके अलावा, राजद नेता व बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी, बसपा सुप्रीमो मायावती के प्रतिनिधि एवं राज्यसभा सदस्य सतीश चंद्र मिश्रा, पाटीदार आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल और जानेमाने दलित नेता व गुजरात के निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी भी मंच पर नजर आए।