ये साल इसरो के लिए बेहद शानदार रहा है। इस साल इसरो ने सात सफल लांचिंग की हैं। ये आंकड़ा अगले साल तक कई गुना बढ़ जाएगा। इन सबसे भारतीय वायुसेना की ताकत भी कई गुना तक बढ़ी है। इसरो ने जीएसएलवी रॉकेट से लगातार छठी सफल लॉन्चिंग की।
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जीएसएलवी-एफ 11 रॉकेट से देश के भूस्थिर संचार उपग्रह जीसैट-7ए को अंतरिक्ष के लिए रवाना किया गया। इस उपग्रह को लॉन्चिंग के करीब 20 मिनट बाद अंतरिक्ष में अपनी तय कक्षा में पहुंचा दिया गया। यह उपग्रह वायु सेना की संचार प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाएगा।
अंतरिक्ष एजेंसी ने बताया कि जीएसएलवी- एफ 11 चौथी पीढ़ी का प्रक्षेपणयान है। यह यान तीन चरणों वाला है। रॉकेट के प्रथम हिस्से में एक मोटर और ठोस ईंधन है, दूसरे हिस्से में तरल ईंधन और उच्च क्षमता वाला इंजन है और तीसरे हिस्से में क्रायोजेनिक इंजन है। इसरो के चेयरमैन के. सिवान का कहना है कि 35 दिनों के भीतर श्रीहरिकोटा से इसरो का यह तीसरा सफल प्रक्षेपण है।
जीसैट-7ए से वायुसेना और ड्रोन ऑपरेशंस में मदद मिलेगी।, जीसैट-7ए वायुसेना के एयरबेस को इंटरलिंक करने के अलावा ड्रोन ऑपरेशंस में भी मदद करेगा। फिलहाल भारत अभी अमेरिका में बने हुए प्रीडेटर-बी या सी गार्डियन ड्रोन को हासिल करने की कोशिश कर रहा है।
सैटेलाइट कंट्रोल के जरिए ये ड्रोन अधिक ऊंचाई पर दुश्मन पर हमला करने की क्षमता रखता है। 500-800 करोड़ रुपये की लगात में तैयार हुई इस सैटेलाइट में 4 सोलर पैनल लगाए गए हैं। जिनकी मदद से 3.3 किलोवाट बिजली पैदा की जा सकती है। इसके साथ ही इसमें कक्षा में आगे-पीछे जाने या ऊपर जाने के लिए बाई-प्रोपेलैंट का केमिकल प्रोपल्शन सिस्टम भी दिया गया है।
इससे पहले इसरो ने जीसैट-7 सैटेलाइट को लांच किया था। इसे रुक्मिणि के नाम से जाना जाता है। 29 सितंबर 2013 में लांच हुई यह सैटेलाइट नेवी के युद्धक जहाजों, पनडुब्बियों और वायुयानों को संचार की सुविधाएं प्रदान करती है। आने वाले समय में वायुसेना को जीसैट-7 सी मिलने के भी आसार हैं।
जीसैट-7ए से लंबी दूरी में मौजूद किसी भी एयरक्राफ्ट और पोत का पता लगाया जा सकेगा। इससे बाकी सैटेलाइट, ग्राउंड स्टेशन के रडार और भारतीय समुद्री क्षेत्र के स्टेशन की कवरेज को बढ़ाया जा सकेगा।
इस साल इसरो ने सात लांचिंग की हैं और अगले साल तक चंद्रयान-2 सहित 32 लांचिंग करेगा। इसमें जीसैट-7ए की लांचिंग भी शामिल है। वहीं 35 दिनों के भीतर कुल चार मिशन लांच हुए हैं।
इनमें 14 नवंबर को जीएसएलवी मार्क-3 डी-2 से जीसैट-29 लांच हुआ। 29 नवंबर को पीएसएलवी सी-43 से हाइसिस लांच हुआ। 19 दिसंबर को जीएसएलवी एफ-11 से जीसैट-7ए लांच हुआ और 5 दिसंबर को फ्रेंच गुयाना (विदेशी जमीन से) से जीसैट-11 की लांचिंग हुई।
इस वक्त धरती के चारों ओर दुनियाभर की लगभग 320 मिलिटरी सैटेलाइट चक्कर काट रही हैं। जिनमें से अधिकतर अमेरिका की हैं। इसके बाद इस मामले में रूस और चीन का नंबर आता है। इनमें से अधिकतर रिमोट-सेंसिंग हैं। ये धरती की निचली कक्षा में मौजूद रहकर धरती के चित्र लेने में मददगार होते हैं।
वहीं निगरानी, संचार आदि के लिए कुछ सैटेलाइट को धरती की भू-स्थैतिक कक्षा में ही रखा जाता है। ये सैटेलाइट पाकिस्तान के खिलाफ भारत द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक में भी मददगार साबित हुई थीं। चीन इस मामले में लगातार प्रगति करता जा रहा है, जिसके बाद भारत भी अब तैयार हो रहा है।