श्रमिक स्पेशल में अब 1700 लोग कर सकेंगे यात्रा, सामान्य लोगों के लिए केवल एसी ट्रेन चलाने का विरोध
- अभी तक एक बार में केवल 1200 यात्रियों को अधिकतम ले जाया जा रहा था
- 15 एसी ट्रेनों का किराया राजधानी एक्सप्रेस स्तर का हो सकता है
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इस दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में फंसे मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाने की श्रमिक स्पेशल ट्रेनों की वर्तमान व्यवस्था चलती रहेगी। सोमवार सुबह दस बजे तक 468 श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाई जा चुकी हैं। इन ट्रेनों का किराया ज्यादातर मामलों में प्रवासी मजदूरों के मूल राज्य ही कर रहे हैं।
इन ट्रेनों में अभी तक एक बार में केवल 1200 यात्रियों को अधिकतम ले जाया जा रहा था, लेकिन अब अधिकतम 1700 यात्री जा सकते हैं। पहले यह ट्रेन मूल स्टेशन से शुरू होकर अंतिम गंतव्य स्टेशन पर ही रुकती थी।
लेकिन नई व्यवस्था में यह बीच में दो से तीन प्रमुख स्टेशनों पर भी रूकेंगी। भारी संख्या में मजदूरों के घर जाने की मांग को देखते हुए इन ट्रेनों की क्षमता में विस्तार किया गया है।
इन ट्रेनों को मजदूरों के मूल राज्य और वर्तमान में वे जिस राज्य में रह रहे हैं, उनमें आपसी सहमति के आधार पर चलाया जाएगा। रेलवे की जिम्मेदारी केवल ट्रेनों को उपलब्ध कराने तक की होगी।
कांग्रेस पार्टी ने मजदूरों का किराया अपने स्तर से देने की योजना की शुरुआत की है। वहीं, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि अगर मूल राज्य मजदूरों का किराया नहीं चुकाते हैं तो वे इसको वहन करेंगे।
एसी ट्रेनों से जरूरतमंद लोग जा सकेंगे
वहीं, जिन 15 एसी ट्रेनों को चलाने की शुरुआत हुई है, इनमें कोई भी यात्री ऑनलाइन टिकट बुकिंग कर यात्रा कर सकेगा। इनका किराया राजधानी स्तर का हो सकता है, जिनकी पूरी जानकारी आईआरसीटीसी की वेबसाइट से मिल सकती है।
इन ट्रेनों में खानपान की कोई व्यवस्था नहीं होगी। सीमित पैकेट बंद खाने की उपलब्ध खाद्यपदार्थों की व्यवस्था ऑन डिमांड सेवा पर उपलब्ध रहेगी।
क्या केवल धनी वर्ग ही ट्रेनों में चलेगा?
सामान्य लोगों के लिए केवल एसी ट्रेनों को चलाने पर कई संगठनों के विरोध के स्वर भी सामने आने लगे हैं। दिल्ली गुड्स ट्रांसपोर्ट संगठन के अध्यक्ष राजेंद्र कपूर ने कहा है कि सरकार केवल एसी ट्रेन चलाकर यह साबित करती है कि वह सामान्य लोगों के हित में नहीं, बल्कि केवल अमीरों के लिए काम कर रही है।
एसी ट्रेनों की तरह उसे सामान्य लोगों के लिए सामान्य स्लीपर ट्रेनों को चलाने पर भी विचार करना चाहिए। इनका किराया आम आदमी की पहुंच में होगा।
मजदूर जाएंगे तो कैसे चलेंगे उद्योग
फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल के राष्ट्रीय महामंत्री वीके बंसल ने कहा कि सरकार एक तरफ मजदूरों को उनके घर भेजने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी ओर उद्योगों को चलाने की कोशिश कर रही है।
लेकिन अगर मजदूर एक बार में अपने घरों को चले जाएंगे तो इनके जल्दी दुबारा लौटने की संभावना बहुत कम रहेगी। ऐसी स्थिति में उद्योगों को दुबारा पटरी पर लाने की कोशिश को चोट लग सकती है।
फेडरेशन ने प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखकर खुदरा क्षेत्र की समस्याओं से भी अवगत कराया है। उन्होंने कहा कि लगभग 33 करोड़ लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने वाले इस क्षेत्र के लिए भी सरकार को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों की तर्ज पर मदद करने पर विचार करना चाहिए।