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वंदे मातरम के 150 वर्ष: गुजरात विधानसभा में प्रस्ताव पेश, सीएम पटेल बोले- गीत कभी अप्रासंगिक नहीं होगा
Mon, 23 Feb 2026 10:27 PM IST
राहुल कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद।
Published by: राहुल कुमार
Updated Mon, 23 Feb 2026 10:27 PM IST
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मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल
- फोटो : एएनआई
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गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने वंदे मातरम गीत की रचना के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर सोमवार को विधानसभा में जश्न मनाने का संकल्प प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं बल्कि राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय चेतना का अमर प्रतीक है, जो कभी अप्रासंगिक नहीं होगा।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि भले ही यह गीत गुलामी के दौर में रचा गया था, लेकिन इसके शब्द और भाव आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। उनके अनुसार, आजादी के आंदोलन को गति देने वाला यह गीत अब अमृत काल में विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए नई प्रेरणा बन सकता है। उन्होंने बताया कि 1875 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित इस गीत ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जन-जन में राष्ट्रभक्ति की भावना जगाई और लोगों को संघर्ष के लिए प्रेरित किया।
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पटेल ने कहा कि तत्कालीन ब्रिटिश सरकार इस गीत की शक्ति से घबरा गई थी और उस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। वंदे मातरम गाने वालों को जेल में डाला जाता था और उन पर अत्याचार किए जाते थे, फिर भी यह गीत स्वतंत्रता का जयघोष बना रहा। उन्होंने उल्लेख किया कि संविधान सभा ने 1950 में इसे राष्ट्रगान जन गण मन के बराबर सम्मान दिया।
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मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का जिक्र करते हुए कहा कि देशभर में 150वीं वर्षगांठ के समारोहों के माध्यम से महान स्वतंत्रता सेनानियों का स्मरण और भारत माता की वंदना का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम की हर पंक्ति में भारत माता के प्रति भक्ति और सांस्कृतिक चेतना का संदेश निहित है। भाषण के अंत में सदन में वंदे मातरम के नारे गूंजे।
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