केरल: नवजात की हत्या करने वाली मां को 14 दिन की न्यायिक हिरासत, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में हुआ यह खुलासा
मामले में पुलिस ने दिन में बताया था कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, कथित तौर पर प्रसव के बाद ही उसकी मां ने बच्चे का गला घोंटकर उसकी हत्या की और सड़क में फेंक दिया। रिपोर्ट के अनुसार, बच्चे की खोपड़ी को भी नुकसान पहुंचा है।
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केरल में नवजात बच्चे को पन्नी में लपेटकर सड़क पर फेंकने वाली मां को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस ने बताया कि एर्नाकुलम के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अस्पताल गए, जहां महिला का इलाज चल रहा है। उसे 18 मई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। डॉक्टरों की मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर हिरासत आवेदन दायर किया जाएगा।
नवजात को गला घोंटकर मारा
मामले में पुलिस ने दिन में बताया था कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, कथित तौर पर प्रसव के बाद ही उसकी मां ने बच्चे का गला घोंटकर उसकी हत्या की और सड़क में फेंक दिया। रिपोर्ट के अनुसार, बच्चे की खोपड़ी को भी नुकसान पहुंचा है। पुलिस आयुक्त एस श्यामसुंदर ने बताया कि महिला ने त्रिशूर के अपने दोस्त के बारे में बताया था। उस युवक के बारे में तलाश की जा रही है।
शुक्रवार को मिला था शव
बता दें, एक दिन पहले शुक्रवार को केरल के पॉश आवासीय इलाके पनमपिल्ली में एक मृत नवजात मिला था। कोच्चि निगम के सफाई कर्मचारियों ने शव देखते ही पुलिस को सूचित किया था। मामले में केरल राज्य बाल अधिकार आयोग के अध्यक्ष केवी मनोज कुमार ने शुक्रवार को पनमपिल्ली नगर का दौरा किया। उन्होंने पुलिस आयुक्त को घटना के बारे में विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था।
डर के मारे मां ने बच्चे के शव को फेंका
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नवजात एक पन्नी से लिपटा हुआ था। पुलिस ने जांच के आधार पर एक 23 साल की महिला को हिरासत में लिया। पुलिस के अनुसार, पीड़िता यौन उत्पीड़न का शिकार थी। उसने शुक्रवार तड़के अपने अपार्टमेंट के बाथरूम में एक बच्चे को जन्म दिया। उसने अपने माता पिता से अपनी गर्भावस्था को छुपाया था, इसी डर से उसने बच्चे को पन्नी में लपेटकर सड़क पर फेंक दिया था।
बच्चों को मार डालना कोई विकल्प नहीं
घटना पर आयोग के अध्यक्ष ने चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अगर बच्चों की देखभाल करने में असमर्थता है फिर भी उन्हें लावारिस छोड़ना या मार देना कोई विकल्प नहीं हो सकता। बच्चों की देखभाल और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई प्रणालियां हमारे समाज में हैं, जैसे अम्माथोटिल या फिर चिल्ड्रन होम। यह संस्थाएं बच्चों को सुरक्षित रूप से उनकी परवरिश करती हैं और उन्हें सुरक्षित वातावरण प्रदान करती हैं।