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सर्वे: भारत में समय पूर्व जन्म लेते हैं 13 फीसदी बच्चे, मानक के अनुरूप नहीं होता 17% नवजातों का वजन
Fri, 04 Jul 2025 07:11 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Fri, 04 Jul 2025 07:11 AM IST
सार
अध्ययन टीम ने पाया कि गर्भावस्था के दौरान पीएम 2.5 (सूक्ष्म कण प्रदूषण) के अधिक संपर्क में रहने से जन्म के समय कम वजन वाले बच्चे पैदा होने की आशंका 40 प्रतिशत तथा समय से पहले प्रसव की आशंका 70 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।
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- फोटो : सांकेतिक तस्वीर
विस्तार
देश में 13 फीसदी बच्चों का जन्म समयपूर्व हो रहा है जबकि 17 प्रतिशत बच्चों का वजन जन्म के समय मानक से कम होता है। यह खुलासा दिल्ली स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मुंबई के अंतरराष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान तथा ब्रिटेन और आयरलैंड के संस्थानों के शोधकर्ताओं ने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 और दूर संवेदी डाटा 2019-21 का अध्ययन करके गर्भावस्था के दौरान वायु प्रदूषण के संपर्क में आने से प्रसव परिणामों पर प्रभावों का विश्लेषण किया।
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अध्ययन टीम ने पाया कि गर्भावस्था के दौरान पीएम 2.5 (सूक्ष्म कण प्रदूषण) के अधिक संपर्क में रहने से जन्म के समय कम वजन वाले बच्चे पैदा होने की आशंका 40 प्रतिशत तथा समय से पहले प्रसव की आशंका 70 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। जलवायु परिस्थितियों जैसे वर्षा और तापमान का प्रतिकूल जन्म परिणामों से अधिक गहरा संबंध पाया गया। स्वास्थ्य पत्रिका पीएलओएस ग्लोबल पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, भारत के उत्तरी जिलों में रहने वाले बच्चे परिवेशीय वायु प्रदूषण के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं।
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कई राज्यों में पीएम 2.5 का असर ज्यादा
अनुसंधानकर्ताओं के मुताबिक, ऊपरी गंगा क्षेत्र में पीएम 2.5 प्रदूषकों का स्तर अधिक है, जिसमें उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्य शामिल हैं, जबकि देश के दक्षिणी और उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में इसका स्तर कम है। अध्ययन के मुताबिक समय पूर्व जन्म के अधिक मामले उत्तरी राज्यों जैसे हिमाचल प्रदेश (39 प्रतिशत), उत्तराखंड (27 प्रतिशत), राजस्थान (18 प्रतिशत) और दिल्ली (17 प्रतिशत) में सामने आते हैं। मिजोरम, मणिपुर और त्रिपुरा में समय पूर्व बच्चों के जन्म के सबसे कम मामले सामने आए हैं।
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पंजाब में कम वजन के बच्चों की दर सबसे ज्यादा
पंजाब में जन्म के समय मानक से कम वजन वाले बच्चे पैदा होने की दर सबसे अधिक 22 प्रतिशत पाई गई। इसके बाद दिल्ली, दादरा और नगर हवेली, मध्य प्रदेश, हरियाणा और उत्तर प्रदेश का स्थान आता है। शोधपत्र लेखकों ने कहा कि इस मानदंड पर पूर्वोत्तर भारत के राज्यों का प्रदर्शन कहीं बेहतर है। अध्ययन में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण और कंप्यूटर आधारित भौगोलिक आकलन से प्राप्त आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया।